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गाना पक्ष-विपक्ष ने बहुत बनाया लेकिन जमीन तक यह गाना पहुँचा। हर जुबान पर यह गीत है... सुनो... 👇

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अमीर खान प्रोडक्शन ने 2010 में एक पिक्चर बनाई - पीपली लाइव - मीडिया की गिद्धगिरी पर बड़ा कटाक्ष था उसका एक बड़ा फेमस गाना था👇 “सखी सईया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाये जात है” मोहन सिंह जी की सरकार ने इसे बैन नहीं किया था. तमाम TV चैनल इसे खूब बजा बजा कर शो करते थे, सरकार से सवाल पूछते थे कल प्रोडक्शन हाउस ने यह गाना सोशल मीडिया पर फिर पोस्ट कर दिया लोग शेयर करके लगे. महंगाई ने नाक में दम किया हुआ है, लोगों को मानो एक आवाज़ मिल गई हो लेकिन शाम तक मोदी सरकार ने सोशल मीडिया से ये गाना डिलीट करवा दिया यह है इनकी सहनशीलता - महँगाई पर काबू करने के बजाय गाने को डिलीट करना प्राथमिकता है बहरहाल, गाना तो पहले ही वायरल था, अब और ज्यादा हो रहा है किसी ने ठीक ही कहा है - विनाश काले विपरीत बुद्धि वैसे मेरे हिसाब से तो बेरोज़गारी और महँगाई की दोहरी मार के चलते गाना बदल गया है “सखी सईया तो नईखे कमात है महंगाई डायन खाये जात है”

Supriya Shrinate

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