Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

गरीब आदमी.. गाड़ी आवश्यकता के लिए खरीदता है..!

469,447 просмотров • 3 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

Фото профиля Urvarshi Singh
Urvarshi Singh3 лет назад

🌹नमन करते हैं आप को 💗 से 🌷🥀🪷🙏 🌷🙌🌷🪷👏🪷

Фото профиля SHUBHAM UPADHYAY
SHUBHAM UPADHYAY3 лет назад

आपके इन्हीं विचारों के कायल हैं हम। आप पूरे ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट ब्रांड एम्बेसडर हैं। आप जैसे हर पुलिसवाला हो जाए तो इस देश की दिशा और दशा दोनों बदल जाएगी ।

Фото профиля Sapna Sappu Official
Sapna Sappu Official3 лет назад

Hero 🥰

Фото профиля राजेश जादौन 🇮🇳
राजेश जादौन 🇮🇳3 лет назад

काश! कबाड़ योजना लाने वाली सरकार भी इस पहलू को समझती । @PMOIndia @nitin_gadkari

Фото профиля 🚩आदिशक्ति🚩शिवशक्ति🚩
🚩आदिशक्ति🚩शिवशक्ति🚩3 лет назад

बिलकुल सही कहा आपने 👍

Фото профиля देवेंद्र कुमार सिंह
देवेंद्र कुमार सिंह3 лет назад

साहब मैंने तो पुरानी CT100 खरीदी थी, नई ले नही सकता । अगले दिन ट्रैफिक पुलिस ने चालान काट दिया 1000 का बिना हेलमेट के । अब बकील 1500 मांग रहा है उस चालान को हटवाने का क्या करूँ।

Фото профиля Sachin Aazad 🚩धर्म प्रथमं द्वतियम संविधानमं 🚩
Sachin Aazad 🚩धर्म प्रथमं द्वतियम संविधानमं 🚩3 лет назад

@bhagwat_pandey Sir aap jase officer kash har koi hota mujhe lagta hai up police ko v aapse kuchh seekhna chahaiye... Mai Ayodhya ka rahne wala hu par aapka videos dekhta hu aapka fan hu sir bada wala aappse mulaakat ki aasa hai 🙏🏻🙏🏻☺️☺️

Фото профиля Sanjeev Karaiya जय श्री राम
Sanjeev Karaiya जय श्री राम3 лет назад

🙏

Фото профиля Reetesh Pandey
Reetesh Pandey3 лет назад

बहुत सुन्दर सर, क्या ये वीडियो मैं अपने यूट्यूब चैनल मे डाल सकता हू

Фото профиля Dhananjay
Dhananjay3 лет назад

बात तो आपकी ठीक लग रही है अक्सर सक्षम लोगों का चालान नहीं कटते हमने देखा है क्योंकि ये सक्षम लोग तुरंत सिफारिश जो करवा लेते हैं।

Похожие видео

सीने में दर्द से जूझता एक गरीब आदमी इलाज के लिए BHU के अस्पताल पहुँचा—और वहाँ ₹3.5 लाख का बिल थमा दिया गया। सवाल सीधा है कि सरकारी संस्थान में इलाज जीवन बचाने के लिए होता है या गरीब को डराने और तोड़ने के लिए? बीमारी देखी गई या पहले जेब तौली गई? अब आदमी उम्मीद लेकर AIMS पहुँचा। जाँच के बाद ECG के लिए 12 दिन बाद की तारीख दे दी गई। दो रातों से वह शख़्स रात 12 बजे कड़ाके की ठंड में खुले में अपने नंबर का इंतज़ार करता रहा। क्या सीने का दर्द कैलेंडर देखकर बढ़ता है? क्या इमरजेंसी को “डेट” दी जाती है? यही है दो भारत। एक जहाँ नेताओं और अफ़सरों का इलाज बिना पर्ची, बिना लाइन, एक घंटे में हो जाता है। दूसरा जहाँ गरीब आदमी का नंबर आते-आते वह खुद मर जाता है। यहाँ प्राथमिकता बीमारी नहीं, पहचान है; जरूरत नहीं, रसूख है। यह सिर्फ़ एक-दो मामलों की कहानी नहीं पूरे देश के सरकारी जिला अस्पतालों की हकीकत है। संसाधन हैं , बजट है, दावे हैं—लेकिन गरीब के लिए इलाज नहीं, इंतज़ार है। यह सिस्टम इलाज नहीं करता, चयन करता है। और यह चयन हर दिन गरीब के खिलाफ होता है।

खुरपेंची स्वास्थ्य

45,278 просмотров • 6 месяцев назад