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Ana Sayfaya Dön

गरीबी और रोटी की भूख 💔😢

24,626 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)

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भूख...? “जब बचपन कचरे में भूख तलाशने लगे, तो समझिए व्यवस्था सड़ चुकी है…” केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan जी के गृह क्षेत्र विदिशा की वो तस्वीर पूरे देश के ज़मीर को झकझोर देने वाली है — एक मासूम बच्ची, कचरे के ढेर में से फेंके गए खाने के पैकेट खोजती है… वो भूख से लड़ रही थी, जबकि सरकार फाइलों में “भोजन सुरक्षा” और “बाल कल्याण” की योजनाओं का गुणगान कर रही थी। Collector Vidisha कलेक्ट्रेट से कुछ दूरी पर, प्रशासन की नाक के नीचे, एक बच्ची को भूख मिटाने के लिए गंदगी में उतरना पड़ा —क्या यही है "विकसित भारत" का सपना? MP MyGov सवाल सरकार ये बताएं: जब हर गांव-शहर में मिड डे मील, बाल आंगनवाड़ी, और पोषण अभियान जैसी योजनाएँ चल रही हैं, तो फिर ये बच्ची भूखी क्यों थी? क्या अधिकारी सिर्फ रिपोर्टों और फोटो से योजनाओं को “सफल” दिखाने में व्यस्त हैं? क्या हमारे बच्चे अब भी सिर्फ चुनावी भाषणों के "वोट बैंक" बनकर रह गए हैं? सीएम Dr Mohan Yadav जी सच्चाई कड़वी है— मध्य प्रदेश जैसे राज्य में जहाँ "लाडली लक्ष्मी" और "पोषण मिशन" की बात होती है, वहीं एक बच्ची को कचरे से रोटी ढूंढनी पड़ती है। ये सिर्फ गरीबी नहीं — ये नीति की असफलता और संवेदनहीन शासन का चेहरा है। Chief Minister, MP हमारी मांगें : विदिशा प्रशासन तत्काल इस बच्ची की पहचान करे और उसे सुरक्षित संरक्षण दे। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रदेश भर में आंगनवाड़ी और पोषण योजनाओं का वास्तविक ऑडिट कराया जाए। गरीबी-भुखमरी पर श्वेतपत्र (White Paper) जारी किया जाए — ताकि सच्चाई जनता के सामने आए। अगर एक बच्ची को खाना कचरे से निकालना पड़े — तो फिर किस मुँह से कहा जाएगा कि "देश अमृतकाल में है"? इस बच्ची की भूख हम सबकी जिम्मेदारी है। अब वक्त है कि सरकार जवाब दे, क्योंकि बचपन भूख का शिकार नहीं, भविष्य का आधार होना चाहिए।

Sunil Astay

12,114 görüntüleme • 10 ay önce