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गाव के ऐसे प्रतिभाओ को मौका मिले तो ओलंपिक खेलों में गोल्ड मैडल जरूर जीतेगी

30,148 görüntüleme • 1 ay önce •via X (Twitter)

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जेएनवीयू जोधपुर के एक हॉस्टल में राजपुत छात्रों में आपसी मारपीट के बाद आए 80 घावों का मामला। बताया जा रहा है कि सालों से जेएनवीयू विश्वविद्यालय की हॉस्टल न. 3 में बच्चों की सीट पर कब्जा किए बैठे, खुद को चुनावी एग्जिट पोल के एक्सपर्ट मानने से लेकर ओलंपिक खेलों के एक्सपर्ट बने फिर रहे, शेरों के शेर, वीर महायोद्धा रवींद्र भाटी के प्रिय साथी जेठू राजपुत है। ये वही आदमी है जो कुछ दिन पहले ही कुश्ती एक्सपर्ट बने और सीधे विनेश फोगाट को कुश्ती और उसके नियम के साथ ये सीखा रहे थे कि ओलंपिक मेडल कैसे लाया जाता है, पर यहां इन एक्सपर्ट जी को शायद कुश्ती के नियम, गुर नहीं याद आए और ठीक से कुश्ती नही कर पाए तो मेडल की जगह लठ मिल रहा है। काश इन्होंने विनेश फोगाट से नफरत न कर के उसकी कुश्ती का मैच देखा होता तो ये मैदान में हाथ जोड़ने की जगह सामने वालों से जीतकर शायद गोल्ड जीत सकते थे और विनेश का जज्बा, हौंसले देखे होते समझे होते तो जानते कि कितनी भी विषम परिस्थितियों में भी दुश्मन के आगे हाथ जोड़ने, भीख मांगने की जगह डटकर मुकाबला करना होता है। वैसे इनके जैसी सोच दिखाने वालों को विनेश तो नहीं जानती है न ही ऐसे मारपीट और गुंडागर्दी के मामलों में पहलवान बेटियां इंटरेस्ट रखती है लेकिन अगर अंदरूनी चोट को ठीक करने का देसी तरीका जानना है तो मै बता सकता हूं मैंने काफी गहन अध्ययन किया है। नोट: इस तरह की कुश्ती कभी भी ओलंपिक मेडल नहीं दिलवाती है, ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए आपको कुश्ती के अखाड़ों में उतरना पड़ता है और दारु की जगह दूध दही घी का कल्चर अपनाना पड़ता है। प्रशासन से निवेदन है ऐसे गुंडागर्दी पर लगाम लगाएं और जेएनवीयू विश्वविद्यालय जोधपुर हॉस्टल में सालों से कब्जा किए बैठे गुंडागर्दी की मानसिकता वाले सभी लोगों को बाहर का रास्ता दिखा कर पढ़ाई लिखाई करने वाले छात्रों को मौका दें।

अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali

26,576 görüntüleme • 2 yıl önce