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गांव मे गुलाम नही मालिक रहते है।
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ताऊ इसलिए हुक्का आराम से पी रहा उसके पास उसकी पुश्तैनी 100 बीघा जमीन हैं और उसमे मजदूर काम कर रहे हैं मजदूर को समय ही नहीं धूप सेंकने का क्यू की पूरा दिन खेत में निकल जाता हैं पेट के लिए अगर फिर भी वो आराम से हुक्का पीने लगे तो जातिगत ठेकेदार बोलेंगे की ये हमारे आगे हुक्का पिएगा

इन्हे भी जब एहसास हुआ जब अथाह संपति बना ली, जब यह गांव में मालिक की तरह जीवन गुजार रहे थे तो काहे निकल पड़े शहर में नौकर बनने। सब बकवास है बिना आर्थिक स्थिति अच्छी हुए जीवन मुश्किल है चाहे गांव हो या शहर।

Bhosadi wala mumbai mein karodon ka ghar bana ke, logo ko chutiya bana rha hai😉

Wo log hamesha hi financial preshan bhi to rahte hai Wo bhi dard bata hi do na

Fir malik kyo nahi bante wo log jo aisa gyan de rhe hai.. 🙏

तो फिर आप शहर में क्या कर रहे हो?

💯✅📌

The attitude one can carry say a lot about his personality...

इसीलिए अब नज़र गांवों की जमीनों पर है बचा सको तो बचा लो !
