Loading video...

Video Failed to Load

Go Home

गाँव-गाँव बंद होत पाठशाला बा खुलत मधुशाला बा न। एह गरीबवन से दूर होत उजाला बा खुलत मधुशाला बा न।

10,213 views • 1 year ago •via X (Twitter)

0 Comments

No comments available

Comments from the original post will appear here

Related Videos

पहला दोस्त (मोहित): "चलिए राहुल बाबू, बाहर से कुछ खा-पीकर आते हैं।" दूसरा दोस्त (राहुल): "नहीं भैया आप जाइए, मुझे थोड़ा पढ़ाई करना है।" मोहित: "अरे चलो भाई! आज संडे है... 50 हज़ार की नौकरी के लिए इतना सैक्रिफाइस?" राहुल (गंभीरता से): "ये जो मेरा दोस्त है न भैया मोहित, हम दोनों एक ही गाँव के हैं। इसके दादाजी किसी समय पर सरकारी टीचर थे। जब हम दोनों गाँव जाते हैं, तो जब ये किसी के द्वार पर जाता है, तो लोग कहते हैं- 'मास्टर साहब के पोता आइल बा' (मास्टर साहब का पोता आया है)। और जब मैं जाता हूँ, तो लोग कहते हैं- 'फलानवा के बेटा आइल बा' (फलाने का बेटा आया है)। पूछते हैं- 'का काम करे?' (क्या काम करता है?)" राहुल: "बस, बाबूजी के नाम में जो ये 'फलानवा का बेटा' है न, इसे 'फलाना जी का बेटा' बना देना है। और उसके लिए जितना सैक्रिफाइस करना होगा, हम करेंगे।" इतनी शिद्दत से मेहनत करें कि जब लोग आपके पिता का नाम लें, तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो जाए। अपना समय वहां निवेश करें जहाँ भविष्य संवरता हो, न कि वहां जहाँ खुशियाँ पल भर की और पछतावा उम्र भर का हो। याद रखिए, जीवन एक ही बार मिला है-कुछ ऐसा कर गुजरिए कि आपकी पहचान आपकी मेहनत की गवाह बने।

Ansh Pratap

26,848 views • 7 months ago

सवाल: मुख्यमंत्री जी की चौपाल के संबंध में आपका क्या कहना है? जवाब: मैंने पहले भी कहा है कि असली 'चौपाल' का मतलब होता है कि पहले गाँव में बाकायदा सूचना दी जाए कि आज इतने बजे मुख्यमंत्री जी की चौपाल होने वाली है। गाँव के सभी लोग, जिनकी परेशानियाँ हैं, तकलीफ़ें हैं, समस्याएँ हैं, वे सब वहाँ खुलकर आएँ। कोई ज्ञापन दे रहा हो, कोई अपनी बात बता रहा हो और मुख्यमंत्री वहीं अधिकारियों को समाधान के निर्देश दे रहे हों; इसे कहते हैं असली चौपाल। लेकिन वहाँ तो चुनिंदा (Selected) लोगों को बुलाया जा रहा है, जो न तो कोई सवाल पूछ सकते हैं, न कोई ज्ञापन दे सकते हैं, न अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं और न ही कोई ज़मीनी फीडबैक दे सकते हैं। असली चौपाल का मकसद ही यह होता है कि गाँव के लोग सरकार और नीतियों के बारे में क्या सोचते हैं, उनकी क्या समस्याएँ हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है, इसका पता चले। अगर मुख्यमंत्री के पास सीधे जनता से ऐसा फीडबैक आता है, तभी प्रदेश और गाँव का भला हो सकता है। ग्रामीण जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि 'हमने मुख्यमंत्री से बात की, उन्होंने तुरंत आदेश दिया और हमारा काम हो गया।' आज धरातल पर वैसी चौपालें नहीं हो रही हैं, यही मेरी मुख्य शिकायत है।

Ashok Gehlot

33,503 views • 3 months ago

“मुझे सिर्फ 6 महीने के कार्यकाल का मौका दीजिए…” फिर तुलना कर लीजिए किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री से अगर 6 महीने में हक-वंचित, किसान, महिला, युवा और गरीबों की ज़िंदगी सुनहरी न हुई – तो मैं उसी दिन पद छोड़ दूँगा। ✅ हम 2000 रूपए किसान सम्मान निधि या 5 किलो राशन नहीं देंगे, लेकिन हम बच्चों को ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे जिसकी डिमांड पूरी दुनिया में होगी। ✅ प्राइमरी स्कूल से ही शानदार इंग्लिश और 6 भाषाओं की पढ़ाई, एवं संविधान की शिक्षा ताकि बचपन से ही समझ हो कि अपराध न करें, सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें और भेदभाव से दूर रहें। ✅ गाँव की महिलाओं और युवाओं के लिए रोज़गार। ✅ हर गरीब को बेहतर इलाज — ताकि किसी पिता, बेटे, बेटी की जान पैसों की कमी से न जाए। हमारा विज़न: सशक्त समाज, बराबरी वाला समाज।

Aazad Samaj Party - Kanshi Ram

163,148 views • 1 year ago

#MyModiStory अपनी हर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी जी ऐसे सुझाव देते हैं जो न सिर्फ़ उपयोगी होते हैं, बल्कि उनकी समय से आगे की सोच को भी दर्शाता है। जब मैं सड़क परिवहन राज्य मंत्री था, तब मुझे उनके ऐसे ही पहलुओं को करीब से जानने का मौका मिला। मुझे याद है एक चर्चा राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रही थी और उस दौरान मोदी जी ने एक बहुत गहरी बात कही कि “सड़कें और राजमार्ग केवल आवाजाही का साधन नहीं हैं, ये तो समृद्धि की जीवनरेखा हैं।” उन्होंने इसे एक साधारण लेकिन बेहद प्रभावशाली उदाहरण से समझाया था कि “एक किसान खेत में फसल उगाता है। अगर पास में सड़क है तो वह समय पर अपनी उपज मंडी तक पहुँचा सकता है। लेकिन अगर सड़क दूर है, खासकर जल्द खराब होने वाली चीज़ों के मामले में, तो देर होने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।” मोदी जी ने आगे कहा कि “अगर सड़क किसान के गाँव तक पहुँचती है तो वह आसानी से सब्ज़ियाँ खेत से गाँव की सड़क तक ला सकता है और वहाँ से हाईवे पकड़कर ज़िले की मंडी तक पहुँच सकता है। लेकिन अगर गाँव से 5 किलोमीटर तक सड़क ही न हो, तो किसान को भारी परेशानी होगी। समय पर उपज बाज़ार में न पहुँचने से उसे सही दाम नहीं मिलेगा और उसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा।” उनकी हर नीति में जनकल्याण की नीयत जो झलकती है, वही मोदी जी की सबसे बड़ी विशेषता है। Modi Story

Dr Mansukh Mandaviya

25,126 views • 1 year ago