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#घुंघट पर ज्ञान देने वाले लिब्रांडुओं को यह वीडियो जरूर देखना चाहिए..👇 अपने परंपरागत पोशाक में घुंघट लिए खड़ी यह बाईसा आज गुजरात में सिविल कोर्ट में जज नियुक्त हुई है..✅ अगर घुंघट सच में पिछड़ेपन का प्रतीक होता तो यह बहन आज न्याय की कुर्सी तक नहीं पहुँचती..🔕...

15,647 views • 5 months ago •via X (Twitter)

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यह वीडियो उत्तरकाशी की यमुना घाटी का है। वीडियो में आप साफ देख सकते हैं कि दिसंबर के महीने में ही जंगल किस तरह धधक रहे हैं। यह वह समय है जब पहाड़ों में ठंड अपने चरम पर होती है, जब जंगलों को नमी मिलनी चाहिए। लेकिन यहां हालात उलटे हैं। अपर यमुना से लेकर टौंस वन प्रभाग तक आग फैली हुई है। दिन में धुएँ के गुबार और रात में लपटें साफ दिखाई दे रही हैं। यह सिर्फ जंगल की आग नहीं है। यह बदलते मौसम, लापरवाही और सिस्टम की विफलता की चेतावनी है। दिसंबर में जंगलों का जलना बताता है कि आने वाले महीनों में हालात कितने भयावह हो सकते हैं। अगर अभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाला फायर सीजन और ज़्यादा विनाशकारी होगा।

Kumaon Jagran

14,587 views • 8 months ago

मैं लडूंगा न्याय मिलने तक✊✊ समर्थन देने के लिए Repost करें। दिल्ली के मुखर्जी नगर में "दीपक कुमार मीणा" की बर्बर हत्या सरकार की नाकामी का एक और खौफनाक उदाहरण है। एक निर्दोष युवक की जान चली गई, और सरकार चुप्पी साधे बैठी है। क्या यही है वो 'सुशासन' का दावा, जिसमें अपराधी बेखौफ घूमते हैं और न्याय की आवाज़ें दबा दी जाती हैं? सरकार को इस घटना पर अपनी जिम्मेदारी से भागने का कोई हक नहीं। दीपक की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की नपुंसकता का प्रतीक है। अगर सरकार अब भी निष्क्रिय रही, तो यह साबित हो जाएगा कि सत्ता के सिंहासन पर बैठे लोग जनता की सुरक्षा नहीं, सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। यह देश इस असंवेदनशीलता को बर्दाश्त नहीं करेगा। अगर दीपक को न्याय नहीं मिला, तो यह सरकार अपनी नैतिकता और विश्वास दोनों खो देगी। #JusticeForDeepakMeena #MukherjiNagar #Delhi

Mukesh Kumar Verma

18,097 views • 1 year ago

यह आदमी यूपी सरकार में मंत्री है। नाम है Dr. Sanjay Kumar Nishad ! यह शख्स जिस पद पर है, उसकी गरिमा की इसे रत्ती भर भी परवाह नहीं है। यह मुसलमानों को धर्मांतरण की सलाह दे रहा है। National Commission for Minorities को कमसे कम इसका तो संज्ञान लेना चाहिए। दूसरी बात यह है कि जिस आदमी की कैबिनेट में यह मंत्री है, पहले उनका धर्मांतरण करा ले! उसके बाद मुसलमानों को सलाह देना। सोचिए! अगर यह आदमी मुसलमान को बुरा भला ना कहता तो यह मंत्री बन पाता? यह किसी चौराहे पर भीख मांग रहा होता। यह लफ्ज़-ए-मुस्लिम की ही तो बरकत है कि जेब कतरे तक विधायक बन जा रहे हैं। अब मदर ऑफ डेमोक्रेसी के सत्ताधारियों से सवाल कीजिए। कि जो भारतीय दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे हैं, अगर उन देशों की सरकार के मंत्री उनके सामने ऐसी ही शर्त रख दें कैसा लगेगा?

Wasim Akram Tyagi

17,526 views • 3 months ago

"सैनिक की वापसी राष्ट्र की गरिमा का प्रश्न" जब कोई सैनिक सीमा पर तैनात होता है, वह केवल अपने परिवार की रक्षा नहीं करता वह सम्पूर्ण राष्ट्र के सम्मान, स्वतंत्रता और स्वाभिमान का प्रहरी होता है। आज वही प्रहरी बीएसएफ के जवान पूर्णम कुमार साहू पिछले 20 दिनों से पाकिस्तान की हिरासत में हैं। यह कोई सामान्य भूल नहीं, यह भारत माता के एक सपूत का अपहरण है। क्या यह वही देश है जो हर मंच पर देशभक्ति के नारे लगाता है? क्या यह वही सरकार है जो सैनिकों को देवता कहती है? तो फिर आज इस सच्चे सैनिक की रिहाई के लिए हर तरफ़ सन्नाटा क्यों है? उनकी पत्नी गर्भवती हैं, और एक-एक पल उनकी पीड़ा को बढ़ा रहा है। हर बीता दिन उस माँ के दिल को चीर रहा है जिसने अपने लाल को तिरंगे में लिपटे देखने की कल्पना तक नहीं की थी। भारत की धरती से पूछिए क्या उसका एक बेटा सीमा पार किसी अंधेरे कक्ष में न्याय के इंतज़ार में बैठा रहेगा, जबकि देश अपनी चुनावी रैलियों और मंचों पर "वीर जवानों" की जयकार लगाता रहेगा? हमारे पड़ोसी देश के नागरिक जब भूल से सीमा पार कर लेते हैं, तब भारत उन्हें मानवता और मर्यादा के साथ सम्मानपूर्वक लौटा देता है। तो आज जब हमारा सैनिक मानवीय भूल से सीमा पार चला गया, तो वही मानवता कहाँ खो गई? कहाँ है वह "मजबूत सरकार" जो हर संकट में कड़ा रुख अपनाने का दावा करती है? क्या सैनिक का जीवन केवल पोस्टर तक सीमित रह गया है? यह समय राजनीति का नहीं, राष्ट्रनीति का है। यह समय धर्म या जाति के बहकावे में पड़ने का नहीं, एक सैनिक के सम्मान और सुरक्षा के लिए एकजुट होने का है। हमारी स्पष्ट और दृढ़ माँग है: इस विषय को विदेश मंत्रालय सर्वोच्च प्राथमिकता दे पाकिस्तान पर कूटनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया जाए और यदि आवश्यक हो, तो वैश्विक मानवाधिकार मंचों पर आवाज़ उठाई जाए "एक सैनिक का अपमान , सम्पूर्ण भारत का अपमान है। एक सैनिक की रिहाई , सम्पूर्ण भारत की गरिमा है।" देश की जनता को अब केवल नारे नहीं चाहिए उन्हें कर्म चाहिए, उत्तर चाहिए, और सपूत की वापसी चाहिए। आज एक ही प्रश्न भारतवासी पूछें कब लौटेगा हमारा जवान, हमारी मातृभूमि की गोद में?" जय हिंद! वन्दे मातरम्! #BringBackPKSahu #हमारा_जवान_वापस_लाओ

Faith of india

19,963 views • 1 year ago

दर्दनाक, शर्मनाक, निंदनीय। नाबालिग दलित बालक लोकेश के साथ भिवाड़ी पुलिस द्वारा की गई बर्बर मारपीट के बाद आज अस्पताल पहुंचकर उसकी हालत देखकर मन व्यथित और आक्रोश से भर उठा। जिस निर्दयता से उसे पीटा गया है, उसके पैरों में फ्रैक्चर है। जानकारी मिली है कि भिवाड़ी पुलिस ने लोकेश को पानी के ड्रम में भी प्रताड़ित किया, जिससे उसके फेफड़ों में पानी जाने की आशंका है। वह आज ICU में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, यह संवेदनशील समाज के लिए एक कलंक है। मैं लोकेश के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। यह घटना केवल पुलिस की कार्यशैली पर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की पूरी कानून-व्यवस्था और मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिना FIR के किसी नाबालिग को इस प्रकार प्रताड़ित करना, आखिर यह कहाँ का न्याय है? जब कानून के रखवाले ही अत्याचार करने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन आज जयपुर में हैं, मेरा उनसे आग्रह है की मुख्यमंत्री जी से पूछिए कि हाल ही में सलूम्बर में आदिवासी बच्चों की मौत, बांसवाड़ा की घटना, भिवाड़ी में मजदूरों पर लाठीचार्ज और भिवाड़ी में पुलिस अत्याचार का जिम्मेदार कौन है ? अपराध के मामलों में राजस्थान को अग्रणी बनाने का जिम्मेदार कौन है ?

Tika Ram Jully

15,420 views • 4 months ago

मुस्लिम मरे तो लिंचिंग , हिंदू मरे तो मौन..! 13 दिसंबर की रात को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा गौरक्षक और लव जिहाद के कैंसर से हिन्दू बहन बेटियों की रक्षा करने वाले बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी थी। आज एम्स में महेश ने अपने प्राण त्याग दिए। दुर्भाग्य यह है कि आज यह खबर मीडिया में चर्चा का भी विषय नहीं। वहीं नासिर जुनैद हत्याकांड में देश के तमाम मीडिया ने घंटो कई दिनों तक इस पर डिबेट की थी, गौ रक्षकों को भक्षक बनाकर दिखाया गया था। राजस्थान के तत्कालीन सीएम से लेकर दिल्ली के बड़े बड़े नेता समर्थन में खड़े हो गये थे। लाखों करोड़ो रुपये से लेकर सरकारी नौकरी तक दी गई थी। लेकिन बिट्टू बजरंगी पर इतना सन्नाटा क्यों है..?

Shivam Dixit

46,058 views • 2 years ago

यह कोई “कानून-व्यवस्था” की चूक नहीं है, यह सरकारी सिस्टम का खुला अपराध है। NEET की तैयारी कर रही एक बेटी के साथ बलात्कार और हत्या और बिहार सरकार आज भी संवेदनहीन, बेहिस और बेपरवाह बनी बैठी है। आज पीड़िता की माँ से मिली, उनके आंसू सवाल बनकर खड़े हैं, अगर सिस्टम ज़िंदा होता, तो मेरी बेटी आज ज़िंदा होती। मैं उनका दर्द कम नहीं कर सकती, लेकिन यह तय है कि दोषियों को सज़ा दिलाकर ही दम लूँगी। पुलिस कहाँ थी? प्रशासन क्या कर रहा था? नेतृत्व किस नींद में सो रहा है? यह सिर्फ़ अपराधियों की दरिंदगी नहीं, बल्कि निष्क्रिय सरकार, निकम्मी पुलिस और सड़ चुके सिस्टम की नाकामी है। बेटियों की लाशों पर चुप्पी साधने वाला शासन जवाबदेह है। बयानबाज़ी से न्याय नहीं मिलता, गिरफ़्तारी, फास्ट-ट्रैक ट्रायल और सख़्त सज़ा चाहिए। कब तक माँएँ ऐसे सड़कों पर रोती रहेंगी? कब तक सपने लहूलुहान होते रहेंगे? कब तक सरकार अपराधियों की ढाल बनी रहेगी? हम डरेंगे नहीं। हम चुप नहीं बैठेंगे। यह लड़ाई अब सिस्टम के ख़िलाफ़ है। जब तक दोषियों को सज़ा नहीं, जब तक ज़िम्मेदार अफ़सरों पर कार्रवाई नहीं, तब तक यह आंदोलन और तेज़ होगा। न्याय दो, वरना सत्ता छोड़ो। बेटियों के खून का हिसाब देना होगा !! #JusticeForNeetGirl

Yogita Bhayana योगिता भयाना

34,032 views • 6 months ago

‘रजाकार’ शब्द से ही हम में से अधिकांश परिचित नहीं हैं, तो उसकी नृशंसता कहाँ से समझ पाएँगे। हैदराबाद में हिन्दुओं के नरसंहार का यह वह अध्याय है जिसे लम्बे समय तक छुपाया रखा गया। यह फिल्म एक श्रद्धांजलि तो है ही, पर एक दुस्साहस भी है उस तंत्र के समक्ष जो इसे रिलीज नहीं होने देना चाहते। आपको यह दृश्य विचलित ही करेंगे क्योंकि इस्लामी आतंक के इस दौर के नरसंहार, बलात्कारों के सामान्यीकरण और किताब में उद्धृत दुष्कर्मों को उचित बना देने वाले रजाकारों की क्रूरता आपको विचलित न करे, तो आप संवेदनहीन हैं, या इस्लामी आतंकियों के समर्थक हैं। कल यह फिल्म तेलुगु में रिलीज हो रही है और सप्ताह भर बाद हिन्दी में आएगी।

Ajeet Bharti

188,865 views • 2 years ago