Video wird geladen...

Video konnte nicht geladen werden

Zur Startseite

घर का पैसा घर में रखने का यह सबसे बेहतरीन तरीका है 🤣🤣

96,782 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

10 Kommentare

Profilbild von Zakir Hussain
Zakir Hussainvor 1 Jahr

Bahut khatarnak log he Bhai 🤣🤣

Profilbild von 💙 Sachin rajbhar
💙 Sachin rajbharvor 1 Jahr

खतरनाक के साथ-साथ समझदार भी हैं अपना पैसा घर में ही लूट रहे हैं एंजॉय के साथ

Profilbild von shivam. kumar yadav TAF.💯 🎸🎸⬆️⬆️%%%FB
shivam. kumar yadav TAF.💯 🎸🎸⬆️⬆️%%%FBvor 1 Jahr

घर मैं कहाँ रह पायी भाई😀😀

Profilbild von 💙 Sachin rajbhar
💙 Sachin rajbharvor 1 Jahr

कहने का मतलब है यही पैसा कहीं दूसरे जगह लूटाता तो घर में नहीं रह पाता पैसा घर ही में लूटा रहा है तो घर ही में रहेगा ना पैसा

Profilbild von Anugrah singh
Anugrah singhvor 1 Jahr

यह तो सही है दोनों समझदार लग रहे हैं 😁😃☺️

Profilbild von 💙 Sachin rajbhar
💙 Sachin rajbharvor 1 Jahr

🤣🤣 बिल्कुल सही कह रहे हैं

Profilbild von Pallvi Gautam💞
Pallvi Gautam💞vor 1 Jahr

ये अच्छा आईडिया है बेसे 🤣

Profilbild von 💙 Sachin rajbhar
💙 Sachin rajbharvor 1 Jahr

बिल्कुल सही 🤣

Profilbild von PIXEL
PIXELvor 1 Jahr

🤣 🤣 🤣

Profilbild von Anand Pandey
Anand Pandeyvor 1 Jahr

Hahahaha

Ähnliche Videos

धोबी का कुत्ता अथवा धोबी का कुतका? कुछ बरसों से बार-बार अनेक लोगों द्वारा कहा जा रहा है “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का” कहावत ठीक नहीं है, और सच्ची कहावत है “धोबी का कुतका न घर का न घाट का”। कई लोकप्रिय हिन्दीभाषी अभिनेता और पत्रकार भी डटकर यह कह चुके हैं, जिससे अनेक लोग इस बात को मानने लगे हैं। सच यह है “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का” ही सच्ची कहावत है। हितोपदेश में एक धोबी के कुत्ते की कथा आती है और सम्भवतः यह कहावत वहीं से आई है। सोलहवीं/सत्रहवीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास ने कवितावली में “धोबी कै सो कूकर न घर को न घाट को” ऐसा प्रयोग किया है। सत्रहवीं शताब्दी में निपट निरंजन ने अपने काव्य में “धोबी का कुत्ता रहा, घर का न घाट का” ऐसा प्रयोग किया है। “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का” के विविध रूपों के अनेक पुस्तकों और कोशों में प्रमाण हैं। इसके विपरीत “धोबी का कुतका न घर का न घाट का” ऐसी कहावत न किसी ऐताहिसिक साहित्यिक कृति में है और न किसी कोश में। ऐसी कहावत कभी थी ही नहीं, यह केवल सामाजिक संचार शोधशाला (Social Media Research Institute) और काहो विश्वविद्यालय (WhatsApp University) की उपज है।

Nityānanda Miśra (मिश्रोपाख्यो नित्यानन्दः)

84,785 Aufrufe • vor 4 Tagen