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चाँद पर देश
10 条评论

‘चाँद पर देश’ देश का झंडा हमारा चाँद पर लहरा गया, पर जो फिर देखी ज़मीं तो हमको रोना आ गया, बच्चों को जब पीटते हैं हम मज़हब के नाम पर, झुकता नहीं क्या तब हमारा झंडा ऐसे काम पर? कैसी प्रगति है ये, कहिए क्या हमारी जीत है? भाई भाई से लड़े क्या ये ही अपनी रीत है?

पैदा होता है जो भी इंसान हमारे देश में, उसका मज़हब करता है तय उसका मूल्य इस परिवेश में आदमी का आदमी होना नहीं काफ़ी अभी, पहले बतलाये वो अपना धर्म और जाति सभी हम तभी सोचेंगे उसको मारें या इज़्ज़त करें, कि गले उसको लगायें या उसे बेइज़्ज़त करें

हर नहीं हैं आप हिंदू फिर तो बचते ही रहें, जुर्म अत्याचार सब चुपचाप बस सहते रहें विज्ञान ऊँचा है हमारा, चाँद पर अब देश है, पर देश की ऊँचाइयों से ऊँचा अपना द्वेष है मारते हैं काटते हैं सबको बदले के लिये, सदियों पहले जो हुआ था आज हम सबके लिये

ख़तरे का डर जो फैला के लाये ये तूफ़ान हैं, अब नहीं ख़तरे में हिंदू, ख़तरे में इंसान हैं ख़तरे में हैं वो सभी जो सोच सकते हैं यहाँ, प्यार हो या भाईचारा, सब हैं ख़तरे में यहाँ चाँद पर तो हमने अपने देश को रोशन किया, छीन कर बचपन किसी का, लाल फिर दामन किया

वक़्त थोड़ा है, बचा लें देश की हम जान को, देखें ना मज़हब किसी का, देखें हम इंसान को देखें ना मज़हब किसी का, देखें हम इंसान को - शिवम्

@sushant_says Best lines!!! Kash hum 2014 mein Manmohan singh ji ki baat samjh chuke hote. Aaj ka India dekhke mayusi hoti hai. Sirf aur sirf Nafrat hai charon taraf. Majhab ho ya jaati bas nafrat… Yahi hai Modi ki den.

Salute to words and emotions behind this

@sushant_says शानदार 👍

Bahut khoob ... If not now, when?

@TheDeshBhakt Brilliant! Please offer your platform to this gentleman & further propagate this message.
