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चुनाव आता है तो यह पाखंडी घूम-घूमकर बोलता है कि "हिंदुओं, एक हो जाओगे; बंटोगे तो कटोगे" चुनाव खत्म होने के बाद यह पाखंडी कहता है — हिंदू बंटे रहने चाहिए। भाजपा और आरएसएस का असली एजेंडाधारी

102,164 просмотров • 7 месяцев назад •via X (Twitter)

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खुशखबरी यह है कि इंडिया गठबंधन पूरे देश में 𝟑𝟎𝟎 से अधिक सीटें जीत रहा है। देश की महान जनता जान चुकी है कि:- यह झूठ पर सच की जीत का चुनाव है यह बुराई पर अच्छाई की जीत चुनाव है यह जुमलों का नहीं हकीकत का चुनाव है यह ग्लोबल नहीं स्थानीय मुद्दों का चुनाव है यह खास का नहीं आम आदमी का चुनाव है यह बेरोजगारी नहीं बल्कि नौकरी का चुनाव है यह बकवास करने का नहीं विकास करने का चुनाव है यह बीजेपी वालों के संविधान बदलने जैसे नापाक इरादे जैसे नौकरी, संविधान, आरक्षण और लोकतंत्र बचाने का चुनाव है। यह देश के किसान-नौजवान, छात्र-शिक्षक, नारी सम्मान और व्यापारी-कर्मचारी का चुनाव है।#India #TejashwiYadav #Bihar #trending #viral

Tejashwi Yadav

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मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना है कि सब ने मिलकर मतदाता सूची को शुद्ध बनाने का काम किया है. और उसे “प्योरतम” बताया, लेकिन सच यह है कि यह सूची BJP नेताओं को एक ही साल में दो-दो राज्यों में वोट डालने का अवसर दे रही है. ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि एक व्यक्ति सिर्फ एक ही जगह वोट कर सकता है, अगर दो बार वोट करे, तो अपराध है. लेकिन सच तो यह है कि राकेश सिन्हा सहित BJP के दर्जन भर नेताओं के द्वारा इस अपराध को करने के बाद भी कोई कार्यवाही न होना मुख्य चुनाव आयुक्त की खुली थेथरई का प्रमाण ही है. मुख्य चुनाव आयुक्त सबूत माँग रहे थे, सबूतों की भरमार भी हो गई, लेकिन कहते हैं न कि “बेशर्माईतेरा आसरा’, वास्तविकता यही है कि ‘बेशर्माई के ही आसरे हैं ज्ञानेश कुमार!’

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

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पत्रकार का प्रश्न : सर जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या हुई है। जवाब : देखिए कानून को तोड़ के कोई हत्या करता है, वह तो हत्यारा होता है। चाहे जेल के अंदर हो, चाहे फील्ड में हो, चाहे कहीं हो। इसलिए मुझे इसकी जानकारी तो है नहीं, मीडिया में खबर आई है, तो यह तो इनकी लापरवाही तो है, कि जेल के अंदर कैसे तो मतलब ऐसी स्थिति बन गई और पहले बीकानेर में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। जगह-जगह घटनाएं होती हैं तो दुख होता है, कि जेल के अंदर कैसे तो हथियार पहुँच जाते हैं, कैसे हत्याएं होती हैं, कैसे मोबाइल पहुँच जाते हैं। तो यह तो जेल के जो हमारे अधिकारी हैं और सरकार है, उनको चाक-चौबंद होना चाहिए जिससे कि ऐसी घटनाएं नहीं हों। कानून अपना काम करे। कानून चाहे जगन गुर्जर हो चाहे कोई हो, अपना काम करे। परंतु इस प्रकार से अगर हत्याएं होती हैं आपस के अंदर ही, तो कल उसने मारा कल उसको और कोई मार देगा मान लीजिए। तो यह चलता रहेगा क्या सिलसिला? तो यह अच्छी बात थोड़ी है। यह कोई जाट, गुर्जर और किसी जाति की बात नहीं है। यह बात है कि आप किस प्रकार से हत्या हो जाती है जेल के अंदर, तो आपस में हत्याएं होने लग गईं। तो यह कोई सिलसिला रुकेगा ही नहीं। तो यह चिंता सरकार को होनी चाहिए। पत्रकार का प्रश्न : सर, यह कोई पैरामेडिकल जो एग्जाम्स थीं, उसको भी निरस्त करने का फैसला किया गया है, गड़बड़ी के चलते। जवाब : यह कल आए थे बच्चे मेरे पास में, बहुत तकलीफ में थे बेचारे कि साहब हमने इतनी मेहनत करी, एग्जाम का वक्त आया और पेपर लीक हो गया। अब यह किस मुँह से हमें दोष दे रहे थे? इनके वक्त में तो ओएमआर शीट भी और यह पेपर लीक हो रहे हैं और यह पूरे देश में हो रहे हैं। नीट का पेपर तो केंद्र सरकार, एनटीए की देखरेख में हो रहा था। तो यह जो है, इनके पास कोई जवाब तो है नहीं। हमें बदनाम करने का पूरा इन्होंने षड्यंत्र किया था चुनाव में, उसमें कामयाब हो गए थे। अब जनता के सामने एक्सपोज हो गए हैं, यह बोलने की स्थिति में नहीं रहे हैं।

Ashok Gehlot

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