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चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है - पवन खेड़ा

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2 सितंबर को नई दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन कमीशन ऑफिस ने पवन खेड़ा जी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इतना ही नहीं- चुनाव आयोग ने पवन खेड़ा जी, उनकी पत्नी की निजी जानकारी साझा कर दी और जो नोटिस दी गई, उसकी भाषा भी दोषी ठहराने और मानहानि वाली है। यानी गलती खुद चुनाव आयोग की है और आरोप पवन खेड़ा पर लगाए जा रहे हैं। • 2017 में पवन खेड़ा जी जब जंगपुरा शिफ्ट हुए तो उन्होंने नए पते पर नाम ट्रांसफर करने के लिए फॉर्म भरा, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनका नाम नए पते पर शिफ्ट कर दिया। • पवन खेड़ा जी के पास अपने नाम को शिफ्ट कराने की प्रक्रिया की रसीद भी है, जिस पर 18 अगस्त 2017 की तारीख लिखी है। • अब अचानक से आठ साल बाद दो जगह वोटर होने की वो कहानी सामने आई है- जिसमें नाम शिफ्ट करने का काम खुद चुनाव आयोग ने किया है। इस सबके बाद चुनाव आयोग कारण बताओ नोटिस जारी कर पवन खेड़ा जी, उनकी पत्नी का नाम और छवि को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। : AICC- लॉ, ह्यूमन राइट्स व RTI विभाग के चेयरमैन Abhishek Singhvi जी 📍 दिल्ली

Congress

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#WATCH | मुंबई, महाराष्ट्र: शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बयान पर कहा, "असम का चुनाव अच्छा चल रहा है लेकिन पवन खेड़ा जैसे नेताओं ने अपने बड़बोलेपन की वजह से इस चुनाव में कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाया है... पासपोर्ट वाला विषय लाना ही नहीं चाहिए था। पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा ने इस चुनाव को व्यक्तिगत बना दिया है जबकि ये चुनाव भाजपा बनाम कांग्रेस होना चाहिए... इससे चुनाव बिगड़ जाता है। चुनाव मुद्दों पर, विकास पर, नीति और रणनीति पर होने चाहिए। इन सब विषयों का जनता का कोई लेना-देना नहीं है... हमें लगता है कि पवन खेड़ा जो कांग्रेस के बड़े नेता हैं, उनको कम से कम ऐसी चीजों से बचना चाहिए और चुनाव को व्यक्तिगत नहीं होने देना चाहिए।"

ANI_HindiNews

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