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चुनाव आयोग पूरी तरह से सत्ता के हाथों में है। महाराष्ट्र के बाद से लगातार वोटिंग पर्सेंटेज में गड़बड़ी हो रही है। मैं मुख्य विपक्षी दलों से कहना चाहता हूं इसे गंभीरता से ले - प्रशांत किशोर

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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी अब Rahul Gandhi के प्रयासों से सब जान गए हैं। लेकिन ये खेल कई सालों से हो रहा था। कांग्रेस ने सबसे पहले इसे 2018 में मध्य प्रदेश के चुनावों से पहले पकड़ा था। तब कांग्रेस के विश्लेषण के बाद करीब 27 लाख संदेहास्पद वोटर लॉस्ट से हटाए गए थे। फिर केवल 47,927 वोट के अंतर से कांग्रेस ने वह चुनाव जीता था। अगर लाखों ग़लत वोट हटाए नहीं गए होते, तो तब भी परिणाम कुछ और हो सकता था। इस सफल विश्लेषण के बाद चुनाव आयोग ने फ़ैसला लिया कि आगे से वोटर लिस्ट जिस फॉर्मेट में मिलेगी, उसे डेटाबेस में बदला नहीं जा सकेगा! तब से अब तक वोटर लिस्ट को encrypt करने के कई कदम चुनाव आयोग उठा चुका है। 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में मोदी सरकार ने सभी वोटर लिस्ट को encrypt करने का फैसला ले लिया। इसी वजह से अब कांग्रेस को कर्नाटक की सिर्फ एक विधानसभा की लिस्ट जांचने में 6 महीने लगे। क्यों अब ये electronically नहीं संभव नहीं हो रहा है। इसी लिए राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग से महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव की without encryption (machine readable) वोटर लिस्ट माँग रहे हैं, जो नहीं दी जा रही है। पारदर्शिता को दबाने के ये फ़ैसला चुनाव आयोग क्यों कर रहा है?

Gurdeep Singh Sappal

26,131 Aufrufe • vor 1 Jahr