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चलो प्रतापगढ़ ! चलो वाई !! जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज जी ने पीठ पर वार करने वाले शैतान अफ़ज़ल ख़ान का पेट चीरकर इतिहास रचा था, वहाँ उस विजय उत्सव को भव्यता से मनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पहुँचें। 8 दिसंबर - शिवप्रताप दिन (तिथि अनुसार)...

16,381 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

8 Kommentare

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JournalistDanishHasanvor 1 Jahr

Tumhari hakikat yahi h

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Isaacvor 1 Jahr

See your face man. Thinking too much about Muslims made your dark circles. Let it go, man.

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Rabbani Khanvor 1 Jahr

Motu patlu

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DRx.Naveed Razavor 1 Jahr

aaye aaayee neech aaadmiii

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Himanshu Gangwar Sushil yaara 307vor 1 Jahr

Jai Bhavani Jai Shivaji

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शिव कुमार सनातनीvor 1 Jahr

जय श्री राम जी गर्व से कहो हम हिन्दू हैं सनातनी हैं

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Atulvor 1 Jahr

Jai sanaatan 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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Sakshi Sonam ... 👭vor 1 Jahr

ये बहुत सही मुहिम चलाई आपने

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यूजीसी रोलबैक 15,000 किलोमीटर जनजागरण, जनचेतना एवं आमंत्रण वाहन यात्रा 23 अगस्त 2026, दोपहर 1:15 बजे, शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाली यूजीसी रोलबैक सवर्ण आक्रोश महापंचायत राष्ट्रीय कार्यक्रम के जनजागरण, जनचेतना और आमंत्रण हेतु 15,000 किलोमीटर वाहन यात्रा का शुभारंभ श्री महाराणा प्रताप जी की पावन भूमि मेवाड़ एवं भगवान एकलिंगनाथ जी के आशीर्वाद से राजसमंद से किया जा रहा है। यह यात्रा 5 अगस्त से 7 अगस्त तक राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सलूम्बर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर तथा उदयपुर के अन्य जिलों में जनसंपर्क करेगी। इसी क्रम में 7 अगस्त को दोपहर 12:00 बजे उदयपुर में संभाग स्तरीय “सवर्ण आक्रोश महापंचायत” का आयोजन किया जाएगा। मेवाड़ संभाग के सभी स्वर्ण समाज के संगठन, सामाजिक संस्थाएँ एवं हमारे जिला अध्यक्ष आपसी समन्वय से इस अभियान को सफल बनाएँ। प्रत्येक जिले में: एक विशाल प्रेस वार्ता आयोजित की जाए। एक जिला स्तरीय सम्मेलन/पंचायत आयोजित की जाए। यात्रा के दौरान प्रतिदिन 3 से 4 जिलों में जनसंपर्क एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी जिला अध्यक्षों एवं सामाजिक संगठनों से अनुरोध है कि वे स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करें तथा अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करें। यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा जनअभियान है। यदि आज हम जागरूक नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यूजीसी के निर्णय दिल्ली से लागू हुए हैं, इसलिए उनका समाधान और रोलबैक भी दिल्ली से ही होगा। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—23 अगस्त को अधिक से अधिक संख्या में नई दिल्ली पहुँचना और अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ बुलंद करना। आइए, बच्चों के भविष्य, शिक्षा में समान अवसर और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस जनजागरण अभियान से जुड़ें। 23 अगस्त 2026 दोपहर 1:15 बजे शाह ऑडिटोरियम, नई दिल्ली आपकी सहभागिता ही इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति है।

Dr Raj Shekhawat

23,732 Aufrufe • vor 1 Monat

जब बजट दावों की आई बारी खोखली निकली घोषणाएं सारी वित्त विनियोग विधेयक पर जवाब का सार सिर्फ इतना है कि मुख्यमंत्री जी ने RSS की वाहवाही में कसीदे गढ़कर अपनी #पर्ची कायम रखने लुभावना प्रयास किया है। इतना ही नहीं RSS की शाखाओं से निकली नफ़रत की जड़ों को आदर्श विद्या मंदिर स्कूलों में ताकत से बढ़ावा देने के लिए MLA लेड में 10 लाख की जगह 25 लाख रुपए की सहायता का षड्यंत्र रचा है, लेकिन कामयाब नहीं होंगे। प्रधानमंत्री मोदी 'पकोड़ा तलने' को रोजगार बताते हैं, तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने गुरू से एक क़दम आगे 'ढाबे पर काम' करने को रोजगार कहते हैं। मुख्यमंत्री जी ने आज सदन में कहा कि "कांग्रेस को बड़े-बडे़ काम करने की आदत है" मुख्यमंत्री जी आपने ठीक फरमाया... ▪️25 लाख का मुफ्त इलाज ▪️कर्मचारियों को OPS ▪️200 यूनिट फ्री बिजली ▪️500 रुपए में गैस सिलेंडर ▪️किसानों को कृषि के लिए 2 हजार यूनिट बिजली फ्री ▪️21 लाख किसानों का 14 हजार करोड़ का कर्ज माफ ▪️अस्पताल में फ्री इलाज, फ्री जांच और फ्री दवाई ▪️10 लाख रुपए का चिरंजीवी दुर्घटना बीमा ▪️करीब 3 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी ▪️1 करोड़ परिवार को मुफ्त फूड पैकेट ▪️गरीबों को 8 रुपए में भरभेट भोजन ▪️गरीब, कमजोर हर आय वर्ग के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूल ये कांग्रेस का दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति ही थी कि हमारी सरकार ने ये सब काम करके दिखाएं हैं, क्योंकि हम किसी की लकीर काटते नहीं हैं। कांग्रेस अपनी लकीर इतनी बड़ी खींचती है कि विरोधी भी हमारी उपलब्धियों का गुणगान करने को मज़बूर हो जाते हैं। लेकिन भाजपा सरकार की लोकलुभावन बजट घोषणाओं का कोई वास्तविक आधार नहीं है, इनकी घोषणाएं झूठी और पब्लिसिटी का पुलिंदा हैं। मुख्यमंत्री जी सदन को गुमराह करके भले ही कागजों में घोषणाएं पूरी होने का दावा करे लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। 2047 की संकल्पना कर रहे मुख्यमंत्री जी, धरातल पर हालात ये हैं कि भाजपा सरकार के मंत्री आपके ही विभाग पर भ्रष्टाचार में शामिल होने, भाजपा के कार्यकर्ता ट्रांसफर-पोस्टिंग में लूट के प्रमाण देने और आपके छात्र संगठन ABVP के युवा राज्यपाल के सामने कुलपति पर सरकार की मिलीभगत से चोरी के आरोप लगा रहे हैं। ▪️हर दिन 7 करोड़ की बजरी चोरी, अवैध खनन, ध्वस्त कानून व्यवस्था, आए दिन पुलिसवालों व वन विभाग पर हमला, हर दिन औसतन 19 महिलाओं से रेप, नाबालिगों को रिकॉर्ड दरिंदगी, पिछले 3 साल में सबसे ज्यादा पॉक्सो एक्ट के मामले, कॉलेज-यूनिवर्सिटी के पेपर लीक, अस्पतालों में दवाई नहीं, बेरोजगारों को भत्ता नहीं, असहायों को पेंशन नहीं, 500 रुपए में उज्ज्वला वाले सिलेंडर की सब्सिडी नहीं, किसानोंं को 6 घंटे बिजली नहीं और ऊपर से महंगी बिजली की लूट इस सरकार की उपलब्धि है। भाजपा सरकार की इससे बड़ी नाकामी क्या होगी कि मुख्यमंत्री के मुंह पर लोग इनके मंत्रियों को NPA बताते हैं। ▪️भाजपा ने किसान सम्मान निधि 12 हजार रुपए करने की घोषणा की गई लेकिन सिर्फ 8 हजार रुपए किए। भाजपा सरकार का डेढ़ साल पूरा होने को है, लेकिन किसान सम्मान निधि 12 हजार करने, गेहूं की MSP पर बोनस देकर 2700 रुपए में खरीदने, बाजरा को MSP पर खरीदने पर मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। आज राजस्थान के 1.05 करोड़ किसानों पर 1.74 लाख करोड़ का कर्ज है लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उनको राहत देने के लिए एक शब्द नहीं बोला। सिंचाई के पर्याप्त पानी, ओलावृष्टि के मुआवजे, बकाया बीमा क्लेम, समर्थन मूल्य पर मूंग-मूंगफली की खरीद नहीं होने से किसानों को हुए 9 हजार करोड़ के घाटे और फसल पर MSP की क़ानूनी गारंटी पर मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। ▪️युमना जल समझौते पर 4 महीने में डीपीआर बनाने वाली भाजपा सरकार को टास्क फोर्स बनाने में ही 1 साल बीत गया। शेखावाटी की जनता को कब और कितना पानी मिलेगा, मुख्यमंत्री जी ने एक शब्द नहीं बोला। क्योंकि यमुना के जल में छल के सिवा कुछ नहीं है। ▪️राजस्थान में बेरोजगारी देश में दूसरे नंबर है। सरकार युवाओं को एक नई नौकरी नहीं दे पा रही और मुख्यमंत्री गुमराह करने के लिए हर दूसरे दिन नौकरी की हवाई घोषणा करते हैं। पहले साल 1 लाख नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ पिछली कांग्रेस सरकार की नौकरियों को अपना बताकर खानापूर्ति कर ली। अकेले शिक्षा विभाग में 1 लाख से अधिक पद रिक्त हैं लेकिन मुख्यमंत्री जी ने सिर्फ 10 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा करके रात-दिन तैयारी कर रहे युवाओं के साथ मजाक किया है। ▪️राजस्थान के बेरोजगारों को 1 साल से बेरोजगारी भत्ते का इंतजार है, युवा दर-दर की ठोकरें खा रहे लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उनके लिए एक शब्द बोला। ▪️आज भी राजस्थान की जनता पड़ोसी राज्य हरियाणा और गुजरात के मुकाबले पेट्रोल 10 रुपए प्रति लीटर महंगा खरीद रही है लेकिन मुख्यमंत्री जी ने पेट्रोल के दाम घटाने और महंगाई कम करने पर एक शब्द नहीं बोला। ▪️सरकार के 1.5 साल होने वाले हैं लेकिन नकल माफियाओं एवं 'मगरमच्छों' की जांच करके कब पकड़ेंगे और कब SI भर्ती पर फैसला लेंगे? इस पर मुख्यमंत्री जी के मुंह से कुछ नहीं निकला। युवाओं को भ्रमित करके सत्ता में तो आए गए, लेकिन अब युवाओं को जवाब नहीं दे पाएंगे। ▪️भाजपा सरकार ने विदेश में विदेश में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली स्कॉरशिप योजना का आते ही नाम बदल दिया। लेकिन शर्म की बात है कि 1 साल से बच्चों को स्कॉलरशिप बंद करके बैठे हैं और बच्चे भीख मांगने को मजबूर हैं। ▪️सतत विकास का ढिंढोरा पीट रहे मुख्यमंत्री जी, सच्चाई ये है कि सदन में आपके मंत्री, साथी विधायकों के सवालों का जवाब तक नहीं दे पाते। मुद्दों से हटकर सिर्फ इधर-उधर का झूठा वाचन और दोषारोपण करते हैं। ▪️सनातन के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने आईफा पर 100 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए लेकिन भगवान गोविन्द देव जी, खाटूश्याम जी और सालासर बालाजी के लिए के लिए 1 पैसा नहीं दिया। ये ही धूर्त भाजपाईयों के सनातनी होने की सच्चाई।

Govind Singh Dotasra

43,627 Aufrufe • vor 1 Jahr

जानिए 12 ज्योतिर्लिंग और उनकी विशेषता : हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। ये12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के पवित्रतम स्थलों में से एक हैं। यहाँ प्रत्येक ज्योतिर्लिंग का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है: 1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात): - स्थान: सौराष्ट्र, गुजरात - महत्व: इसे पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यहाँ भगवान शिव को चंद्रदेव ने तपस्या करके प्रसन्न किया था। शिव पुराण के अनुसार जब चंद्रमा को प्रजापति दक्ष ने क्षय रोग का श्राप दिया था तब इसी स्थान पर शिव जी की पूजा और तप करके चंद्रमा ने श्राप से मुक्ति पाई थी. ऐसी मान्यता है कि स्वयं चंद्र देव ने इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी. यहां पर देवताओं द्वारा बनवाया गया एक पवित्र कुंड भी है, जिसे सोमकुण्ड या पापनाशक-तीर्थ कहते हैं। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है, हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है। 2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश): - स्थान: श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश - महत्व: यहाँ भगवान शिव और माता पार्वती निवास करते हैं। इसे दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है। आंध्रप्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है, इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते है, कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं। 3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश): - स्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश - महत्व: यह ज्योतिर्लिंग महाकाल के नाम से प्रसिद्ध है, जो काल के अधिपति हैं और मृत्यु के देवता माने जाते हैं। ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है जहां रोजाना होने वाली भस्म आरती विश्व भर में प्रसिद्ध है. यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है।महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है, उज्जैनवासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं। 4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश): - स्थान: मंधाता द्वीप, नर्मदा नदी, मध्य प्रदेश - महत्व: यह ओंकार पर्वत पर स्थित है, जहां शिवजी ओंकार रूप में प्रतिष्ठित हैं। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है, जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है, ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है। इसलिए किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊं के साथ ही किया जाता है, यह ज्योतिर्लिंग ॐकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है। 5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड): - स्थान: केदारनाथ, उत्तराखंड - महत्व: यह हिमालय में स्थित है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्थल है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में अलखनंदा और मंदाकिनी नदियों के तट पर केदार नाम की चोटी पर स्थित है. यहां से पूर्वी दिशा में श्री बद्री विशाल का बद्रीनाथधाम मंदिर है. मान्‍यता है कि भगवान केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा अधूरी और निष्‍फल है. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है, बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है, केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है। 6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र): - स्थान: पुणे, महाराष्ट्र - महत्व: यह सह्याद्री पर्वत श्रेणी में स्थित है और इसे भीमा नदी के स्रोत के पास माना जाता है। महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से इस मंदिर का दर्शन प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते है। 7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश): - स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश - महत्व: यह ज्योतिर्लिंग वाराणसी में स्थित है, जो भगवान शिव की नगरी मानी जाती है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर जिसे धर्म नगरी काशी के नाम से जाना जाता है वहां पर गंगा नदी के तट पर स्थित है बाबा विश्‍वनाथ का मंदिर जिसे विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है. ऐसी मान्‍यता है कि कैलाश छोड़कर भगवान शिव ने यहीं अपना स्थाई निवास बनाया था. काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है, इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है। इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा, इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे। 8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र): - स्थान: नासिक, महाराष्ट्र - महत्व: यह गोदावरी नदी के तट पर स्थित है और यहाँ भगवान शिव त्र्यंबक (तीन नेत्रों वाले) रूप में पूजे जाते हैं। गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है, इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है, भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है, कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा। 9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखंड/महाराष्ट्र): - स्थान: देवघर, झारखंड / परली, महाराष्ट्र - महत्व: इसे रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है, क्योंकि रावण ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी। श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है, भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। 10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात): - स्थान: द्वारका, गुजरात - महत्व: यह सागर तट पर स्थित है और नागों के देवता के रूप में भगवान शिव की पूजा होती है। गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है, धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है, भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। 11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु): - स्थान: रामेश्वरम, तमिलनाडु - महत्व: यह स्थान भगवान राम के द्वारा शिवलिंग स्थापित करने के कारण पवित्र माना जाता है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरं नामक स्थान में स्थित है, इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है। 12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र): - स्थान: औरंगाबाद, महाराष्ट्र - महत्व: यह एलोरा गुफाओं के पास स्थित है और इसे 'धुश्मेश्वर' के नाम से भी जाना जाता है। घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है, इसे घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैl ये 12 ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से हैं और भक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय हैं। हर ज्योतिर्लिंग का अपना ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व है, और ये स्थल भक्तों को भगवान शिव के दिव्य रूप का अनुभव कराते हैं। हर हर महादेव 🙏

Jitendra Sharma

141,035 Aufrufe • vor 2 Jahren

मुख्यमंत्री Atishi जी , हमने आपसे केवल एक मांग की है कि माननीय उपराज्यपाल जी के आदेश के बाद सभी मार्शल्स एवं सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स की बहाली का आदेश आपको देना है; 1 नवम्बर से इनको काम पर लगना चाहिए था, आज 3 तारीख हो गई है, इनका दीपावली व भाई दूज का त्योहार भी चला गया, लेकिन ये अभी तक काम पर नहीं लगे हैं। हमने साफ कह दिया है कि आज शाम तक इनको काम पर लगाइए, नहीं तो हम आपके घर पर आएँगे; लेकिन आज भी आप यह कह रही हैं कि अगले 4-5 दिन में यह हो पायेगा या नहीं, AAP को नहीं पता। ये जो बस मार्शल्स और सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स हैं, ये काम के दिन के आधार पर वेतन पाते हैं, और AAP की लापरवाही के कारण इस महीने के 7-8 दिन इनके खराब हो जाएँगे। आप बौखला कर कश्मीर से कन्याकुमारी तक के बहुत से वक्तव्य दे रही हैं, मैं आपको चुनौती देता हूँ कि आप एक भी भाजपा शासित राज्य बताइए जहाँ संविदा कर्मियों के लिए वेतन का संकट हो—नहीं बता पाएँगी। मैं आपकी राजनीतिक मजबूरी को समझ सकता हूँ, लेकिन मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि आपको इनकी बहाली का श्रेय लेना है तो ले लीजिए, आपको गले में माला पहननी है तो पहन लीजिए, लेकिन इन गरीब भाई-बहनों को नौकरी पर लगा दीजिए। AAP माननीय LG Delhi के निर्देश का पालन कीजिए, और इसके लिए मैं कल सुबह 11 बजे अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ इन बस मार्शल्स और सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स की बहाली का आदेश लेने आपके निवास पर आ रहा हूँ।

Virendraa Sachdeva

14,106 Aufrufe • vor 1 Jahr

खतरनाक रिपोर्टिंग का एक दिन... बहराइच में नाव पलटने की घटना की रिपोर्टिंग करने गया था। जिस भरथापुर गांव में यह हादसा हुआ वह बहराइच जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भारत का आखिरी गांव। लखनऊ से सुबह कार के जरिए निकला। घटना स्थल पर पहुंचने से 50 किलोमीटर पहले ही नेटवर्क चला गया। लगातार बारिश चल रही थी। करीब 2 बजे कतर्निया घाट पहुंचे। स्थानीय साथी सोनू मिले। उनके साथ बाइक पर बैठे। सूख चुकी नदी से होते हुए ट्रांस गेरुआ नदी के पास पहुंचे। यहां ये भी घटना स्थल 7 किलोमीटर दूर था। सामने नदी थी। आसपास कई पत्रकार और पुलिस के साथी थे। आसमान पर बादल थे। पत्रकारों ने कहा कि आगे जाना सेफ नहीं। क्योंकि नदी पार करने के बाद 7 किलोमीटर घने जंगल से होकर जाना पड़ेगा। जिसमें रास्ता नहीं है। हाथी-तेंदुआ और तमाम जंगली जानवर हैं। अजीब यह कि अगर चले भी जाओ तो अगले एक घंटे में काम निपटाकर वापस आना होगा। क्योंकि शाम 5 बजे इधर से निकलना मतलब मौत को चुनौती देना है। हमने हिम्मत बांधी। तय किया कि जाएंगे। 9 लोग अभी भी नहीं मिले, उनके परिजन इंतजार कर रहे हैं, उनसे मिलेंगे। नाव के जरिए नदी पार की। स्थानीय साथी सोनू ने एक बाइक का इंतजाम किया। हम जंगल के रास्ते गांव पहुंच गए। घटना कवर की। एक अफसर बोले, पीड़ितों से बात मत करिए, वह पैनिक हो जाते हैं। असल में हम ऐसे आदेश नहीं मान सकते थे, हम दिखाने ही उन्हें गए थे। हमने सबकी बाइट ली। डीएम समेत अधिकारियों का पक्ष जाना। सर्च अभियान देखा। इन चीजों में 2 घंटे बीत गए। एक जगह थोड़ा सा नेटवर्क आ रहा था, वहां से कुछ वीडियो ऑफिस भेजा। अब हमारे लौटने का वक्त था। शाम थी। बारिश भी तेज थी। इस बार हमारे सारथी बने साथी उवैश खान। उवैश हमेशा से जंगल या आसपास रहे हैं इसलिए हाथियों के व्यवहार से थोड़ा बहुत वाकिफ थे। हम लोग चले। जैसे तैसे दोबारा नदी के पास आए। पार की। खबर फाइल की। जिस भरथापुर गांव में गए थे। तीन दिन हो गए, डूबे 9 लोगों में सिर्फ एक की लाश मिली है, बाकी 8 का कुछ भी पता नहीं चल सका है। आशंका है कि उन्हें मगरमच्छ और घड़ियाल खा गए। इस भरथापुर गांव की आबादी करीब 500 है, यहां नदी पर पुल नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि आगे नेपाल है। ये गांव भी अपने मूल स्थान से कट गया है। अब जंगल में रहने के लिए लोग मजबूर हैं। यहां का एक ही उपाय है- लोगों को नदी के इस पार लाकर कहीं बसा दिया जाए। क्योंकि ये लोग जिस हाल में हैं, उस हाल में रहने की कल्पना कोई नहीं कर सकता। लाइट-सड़क-शौचालय कुछ भी नहीं है।

Rajesh Sahu

52,622 Aufrufe • vor 11 Monaten

कई बार सांसद रह चुके एक वरिष्ठ राजनेता ने अभी-अभी अपने क्षेत्र से एक पढ़े-लिखे नागरिक की बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुई बातचीत का ऑडियों निम्नांकित लिखकर मुझे कार्यवाही करने के लिए भेजा है। यही बात मैंने तीन दिन पहले UPPCL के चेयरमैन, MD और अन्य अधिकारियों को कहा था। कड़े शब्दों में यह भी कहा था कि 1912 की टोल फ्री व्यवस्था या अन्य टेक्नोलॉजी आधारित व्यवस्था मानवीय व्यवस्था की पूरक हो सकती है; विकल्प नहीं। मैंने कहा था कि ऐसे कई ग़लत, असामयिक और अव्यवहारिक निर्देशों के कारण जनता को परेशानी हो रही है। अधिकारी फ़ोन उठाना बिल्कुल ही बंद कर दिए हैं। तितलौकी थी ही, अब नीम पर चढ़ गई। और अनेक ऐसे ग़लत निर्णय हमारे बार-बार लिखित/ मौखिक रूप से मना करने के बावजूद हुए हैं। सबने मीटिंग में मुझसे असत्य बोला कि 1912 पर ही शिकायत करने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया है। मुझे उनकी इस बात पर विश्वास नहीं हुआ।मैंने कई बार पूछा। हर बार वही असत्य सुनने को मिला। वास्तविकता आप स्वयं सुनिए… बिजली के अधिकारियों, कर्मचारियों को एक बार पुनः कह रहा हूँ कि जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। उनसे त्वरित और उचित भाषा में संवाद करें और समस्या का निराकरण करें। अन्यथा परिणाम भयंकर होंगे। ———- उस राजनेता का मुझे मिला ह्वाट्सऐप संदेश: — माननीय मंत्री जी, बस्ती शहर के एक बड़े मुहल्ले में सुबह 10 बजे से लाइट नहीं है. रात्रि 8 बजे तक बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के फोन ना उठाने पर अधीक्षण अभियंता बस्ती को काल करने पर उन्होंने जिस तरीके से बात की उसको सुनकर आप स्वयं जान जाएंगे कि public grievance के प्रति ये कितने संवेदनहीन हैं तथा इनके अपने संबंधों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार की छवि जानबूझ कर खराब करने में लगे हुए है । बातचीत की रिकॉर्डिंग नीचे इस प्रकार है। Narendra Modi Yogi Adityanath Jagat Prakash Nadda Manohar Lal Pralhad Joshi Bhupendra Singh Chaudhary UPPCL Energy Minister Office UP Madhyanchal Vidyut Vitran Nigam Limited Dakshinanchal Vidyut Vitran Nigam Limited(DVVNL) Purvanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited Pashchimanchal Vidyut Vitran Nigam Ltd Kanpur Electricity Supply Company #NayeBharatKaNayaUP #GoodGovernance #HumaraUP #VikasExpress

A K Sharma

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अनशनरत छात्र नेता श्री शुभम रेवाड़ से एसएमएस अस्पताल में मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत की : पत्रकार: सर, आप शुभम से मिले हैं, आपने बातचीत की है ? जवाब : लंबे अरसे से सभी लोग मांग कर रहे हैं, शुभम भी मांग कर रहा था कि चुनाव होने चाहिए। यह समझ के परे है कि चुनाव क्यों नहीं करवा रही सरकार? हमारे वक्त में चुनाव उस साल हमने इसलिए नहीं करवाए थे, चुनाव के आचार संहिता लागू होने वाली थी। तो हमने कहा कि यह समाप्त होते ही चुनाव होंगे। और लगातार हम लोग पैरवी कर रहे हैं, सोशल मीडिया में लिख रहे हैं। यह पॉपुलर डिमांड है राजस्थान के नौजवानों की। सबको मालूम है कि छात्र संघों से निकले हुए लोग कहां तक पहुंचे? इनको नहीं मालूम एबीवीपी वालों को? अरुण जेटली जी थे केंद्र में वित्त मंत्री, वो भी छात्र संघ अध्यक्ष थे दिल्ली के अंदर। यहाँ हमारे रघु शर्मा जी हैं, महेश जोशी जी हैं, राजेंद्र राठौड़ जी हैं जो इनके खुद की पार्टी के नेता हैं। आप बताइए कितने लोग पहुंचे हैं जो कि छात्र राजनीति से आए । मैं खुद हूँ, मैं तो चुनाव हार गया था छात्र संघ का, जिनके नाम मैं ले रहा हूँ चुनाव जीते हुए थे और मैं हार के भी पहुँच गया जहाँ पहुँचना था मुझे। तो यह कोई बात नहीं हो कि आप चुनाव बंद करके जो नई पीढ़ी आने वाली है, अभी जेन - ज़ी आने के बाद में इनको समझ में नहीं आ रही है क्या कि जेन - ज़ी की ताकत क्या होती है ? भारत सरकार को भी झुका दिया, इस्तीफा होना पड़ा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान जी का। तो सरकार को समझना चाहिए, आगे आ के बात करनी चाहिए। इसको गंभीरता से लेना चाहिए। 15 दिन हो गए आज भूख हड़ताल पे, पानी पीना छोड़ दिया, मैंने जबरदस्ती पानी भी पिलाया उनको अभी। तो आप मुझे बताइए कि एक इंसान अगर अपनी भावना रिप्रेजेंट कर रहा है लाखों बच्चों की, छात्रों की, मेरे वक्त में ही गुरुचरण छाबड़ा जी ने नशामुक्ति को ले के तीन बार उन्होंने अनशन किया, इसी SMS के अंदर। तब मैं खुद फोन करता था उनको, एज़ ए मुख्यमंत्री , समझाता था उनको, मेरे मंत्रियों को मैंने भेजा उनके पास में, आखिर में हमने समझौता करके उनका तुड़वाया अनशन। तीसरी बार मेरी सरकार चली गई थी, फिर वो अनशन में बैठ गए। वो भारतीय जनता पार्टी के एमएलए रहे हुए थे। अफसोस इस बात का, उनकी पार्टी का पूर्व एमएलए था, वरिष्ठ नेता था, वही 15 दिन तक भूख हड़ताल करते रहे, कोई नहीं आया यहाँ पर। तब मैं खुद आया यहाँ पर, विपक्ष में रहते हुए मैं आया। उनको मैंने बहुत समझाया। पर उन्होंने मेरी बात नहीं मानी, कि 'नहीं-नहीं, मैं बिल्कुल ठीक हूँ, यह है, वो है'। दूसरे दिन खबर आई कि वो सीरियस हो गए हैं और अगले दिन खबर आई कि वो मर गए। कोई बीजेपी नेता, बड़े-बड़े उनके घर पर दाह संस्कार में नहीं जा पाए, इतना घबरा गए थे वो,गिल्टी कॉन्शियस थे। आखिर में छिप-छिप के गए उनके यहाँ बैठने के लिए। यह स्थिति थी, अभी तक मुझे याद है वो बात। उनके परिवार वाले लोगों ने बहुत आंदोलन चलाए बाद में , वो बंद हो गए। तो कहने का मतलब यह है कि ऐसे मामलों में सरकार चाहे किसी पार्टी की हो, मुख्यमंत्री खुद को बात करनी चाहिए। उनके मंत्री बात करें और जो आमरण अनशन इन्होंने शुरू किया है उसको तुड़वाएं, यह मेरी मांग है मुख्यमंत्री से। मैंने जयपुर कलेक्टर से बात करी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मैं लगा हुआ हूँ, अधिकारियों से बात कर रहा हूँ और मैं बात पहुँचा रहा हूँ आप सब की वहाँ सीएमओ के अंदर। शाम को 4-5 बजे तक की बात करी है। शुभम ने कहा है कि 4-5 बजे का मुझे कहा गया है। मैंने इनको कहा अगर वो पॉजिटिव जवाब नहीं दें आपको, तब भी आप यह अनशन तोड़ो। हम सब मिलकर के आगे आह्वान करेंगे, बल्कि तुम आगे आओ। अगर वहाँ जेन - ज़ी दिल्ली में देश भर में आ सकते हैं सड़कों पर, यह भी मुद्दा ऐसा ही है। पूरे छात्र संघ इसमें सहयोग करेंगे, हो सकता है एबीवीपी के छात्र भी साथ आ जाएंगे छात्रों के। मांग तो कॉमन मांग है, यह तो कोई कांग्रेस-बीजेपी की थोड़ी है! वो तो मुख्यमंत्री जी इनको चाहिए था ऐसी मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, यह मेरा मानना है।

Ashok Gehlot

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आज आखिरी बार काशी आएंगे काशी के अपने सबसे दुलारे सप्तक, पद्मभूषण छन्नूलाल जी। कुछ देर बड़ी गैबी वाले घर की दीवारों को अलविदा कहने। जहां आने और रहने पिछले कई सालों से छटपटाते रहे। और फिर मसाने की होरी गाकर जिस मणिकर्णिका के हवाले शवों की राख से होली को काशी के उत्सव की धुन बनाया, वहां हमेशा के लिए बाबा की हथेली पर सो जाने। क्या कहते हैं उसे, चिरनिद्रा…। बात फरवरी की है। सुरों के आला को मृग छौने सा ढूंढती मैं मीरजापुर पहुंची थी। इससे पहले उन्हे जमीन पर मसनत लगाए भारत भवन के मुक्ताकाश मंच पर सुना था। बनारस में वो ढूंढे नहीं मिल रहे थे। बेमन से मीरजापुर रह रहे थे। मीरजापुर में उन्हें दुनियादारी ने दुनिया वालों से छुपा रखा था। गंगा के दुलारे का मीरजापुर में जरा भी मन नहीं लग रहा था। वो कह नहीं पाते थे, पर उन्हें बनारस बहुत याद आता था। बाहर बोर्ड लगा था - संगीत संत पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र, मिलने का समय सायंकाल 7 से 9 बजे। भीतर, अस्पताल वाले बेड जिसे ऊपर, नीचे कर सकते हैं, उस पर वो बिना हिले-डुले लेटे हुए थे। चेहरा मुरझाया सा। हां, लेकिन लाल गोल तिलक उनकी पुरातन शनाख्त सा ललाट पर धरा हुआ था। तार्रूफ करवाया गया। मेरे नाम के साथ बनारस सुनकर उनकी आंखें तारों सी टिमटिमाने लगीं। मैंने पूछा, बनारस याद आता है? क्या-कुछ याद आता है? बोले - हमारा पूजा करना याद आता है। छोटी गैबी में रहते थे। कहने के लिए छोटी गैबी है लेकिन है बड़ी गैबी। कौन सा गाना ध्यान आता है तो कहते हैं बहुत दिन हो गया। लेकिन शिष्यों को सिखाते थे। सब फरमाइश करते थे गुरुजी सुनाइए। खेले मसाने में होरी। हमने कहा गुरुजी हमें भी सुना दीजिए तो बोले, दरअसल…खाने का और गाने का मन नहीं कर रहा है। पीछे से उनका केयरटेकर टोकते हुए कहता है - डॉक्टरवा मना किए हैं अभी बोलने, गाने को। पर वो कहा रुकने वाले, वो गाने लगते हैं। चार अधूरी लाइनें गाए ही थे कि शब्द लड़खड़ाने लगते हैं। वो बोले- शब्दवा भूल जात हैं। कुछ देर बाद कहते हैं, काशी में प्रोग्राम करेंगे। स्वास्थ्य ठीक रहा तो काशी के घाट पर करेंगे। मैंने पूछा - मसाने में होरी सुनाएंगे, तो कहने लगे वो हमीं ने बनाया है। फिर वो अचानक मसाने में होरी गाने लगते हैं। बीच-बीच कुछ शब्द बिसर जाते हैं। फिर क्षण भर सांस लेकर ऊंचा-नीचा सुर लगा गाने लगते हैं…. चिताभस्म भरी झोरी,दिगंबर मसाने में होरी। फिर आखर-आखर गाना समझाने लगते हैं…. होली में कौन कौन था, गोपन गोपी, श्यामन राधा। वो अब थकने लगे थे। वहां तैनात उनका केयरटेकर घूर घूर कर जाने का इशारा कर रहा था। कभी पानी पूछकर तो कभी मिठाई सामने परोस कर। तभी मैंने संगीत के देवता का कंपकंपाता हाथ खुदई उठाकर अपने सिर पर धर लिया।… चलिए जल्दी से आशीर्वाद दे दीजिए। जैसे ही मैंने कहा वो जरा सा मुस्कुरा दिए। काशी और उसे घाट में तुरपे मसाने की होरी, ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी के राग आज हमेशा के लिए याददाश्त का सबसे जहीन टुकड़ा बन गया है। #छन्नूलालमिश्र #kashi #ChannulalMishra

Upmita Vajpai

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प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, भारत सरकार विषय – महिला दिवस पर महिला सहकर्मी पत्रकारों के सम्मान-स्वाभिमान के लिए न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के प्रबंधन की पात्रता की गहरी पड़ताल के संदर्भ में. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, देश-दुनिया में महिलाओं के सशक्तिकरण, योगदान, उपलब्धि, सुरक्षा, सम्मान और संभावनाओं का सामूहिक मंगलगान है. स्वावलंबन औऱ स्वाभिमान से भरी आधी आबादी के समुचित औऱ सार्थक योगदान को रेखांकित करने का दिवस. उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने का वैश्विक संकल्प भी. लेकिन आज मैं देश की कुछ योग्य, स्वाभिमानी औऱ कर्मठ महिला पत्रकार सहकर्मियों की पीड़ा आपके सामने रखने आया हूं. यह खुला पत्र अनुशासन औऱ ईमानदारी के ढाई दशक से अधिक के मेरे पत्रकारीय जीवन की सबसे अराजक, पीड़ादायक और भयावह घटना का सार्वजनिक पाठ भी है. तस्वीर साफ करने और मूल बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए इसे मैं कुछ प्वांयट्स में रख रहा हूं. 1- न्यूज इंडिया 24/7 न्यूज चैनल के चेयरमैन शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के कई बार के अनुरोध और स्वतंत्र रुप से काम करने के भरोसे के बाद मैंने 25 दिसंबर 2025 को बतौर इडिटर इन चीफ चैनल को ज्वॉयन किया. इस चैनल का दफ्तर सेक्टर 63, नोएडा, गौतमबुद्धनगर, यूपी में है. ज्वॉयन करने के बाद मुझे चैनल की अव्यवस्था औऱ शैलेंद्र शर्मा के मनमाने तरीके से चैनल चलाने के रवैये की जानकारी होने लगी. चूंकि मैंने संपादकीय अधिकार औऱ दायित्व के साथ कभी समझौता नहीं किया, इसलिए चैनल को व्यस्थित ढंग से चलाने और खबरों की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए हर अनावश्यक दखल से चैनल को मुक्त रखने का प्रयास करने लगा. 2- इस दौरान कई नियुक्तियां हुईँ. उनमें महिला एंकर, रिपोर्टर औऱ प्रोड्यूसर भी रहीं. लगभग डेढ महीना पूरा होते होते-होते शैलेंद्र शर्मा ने यह कहना शुरु कर दिया कि जितने भी लोग हायर किए गए हैं, वे अपने पेपर जमा नहीं कर रहे हैं. सच्चाई यह थी कि सबों ने एचआर की तरफ से मांगे गए सारे कागजात जमा कर दिए थे. इसके बाद उन्होंने इस बात पर तकरार शुरु कर दी कि ज्यादातर लोगों के दिए कागजात फर्जी हैं. इनमें उन्होंने महिला पत्रकारों को खास तौर से निशाने पर लिया. मैंने सभी साथियों से व्यक्तिगत रुप से मिलकर उनके जरिए दिए गए पेपर्स की वैधता सुनिश्चित की. एचआर इन बैठकों में रहा. दो-तीन अपवाद के मामलों को मैंने वहीं निपटा भी दिया. मगर इस दौरान रात-विरात कई लोगों को टर्मिनेशन या फिर कागजों के पूरा नहीं होने पर सेवा समाप्त किए जाने के कंपनी नियमों के खिलाफ, मेल आते रहे. मेरी महिला साथी इससे ज्यादा आहत और प्रताड़ित महसूस करती रहीं. 3- मैंने संपादक होने के नाते शैलेंद्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के इस अराजक औऱ अवैध तरीके पर सवाल उठाया औऱ उनको सलाह दी कि अगर आपको कागजात चेक ही करवाने हैं तो बेहतर है ऑडिट करवा लीजिए. मगर ऐसा नहीं करके उन्होंने एचआर से आधी रात के बाद रात 2.43 बजे एक मैसेज जेनरेट करवाया कि 26 फरवरी को सुबह 11.30 बजे चेयरमैन ने मीटिंग बुलाई है. 4- 26 फरवरी 2026 को शैलेंद्र शर्मा अपने प्राइवेट सुरक्षागार्ड औऱ एक पुलिसगार्ड के साथ न्यूजरुम में आए. पूरे न्यूजरुम स्टाफ को उन्होंने चारों ओर जमा किया. बीच न्यूजरुम टेबल लगवाया औऱ जितने लोग हायर किए गए थे उनमें से अधिकतर की फाइलें टेबल पर रखवाईं. संपादक होने के नाते मैं भी अपने रुम से निकलकर वहां आ चुका था. मैंने अपने 28 साल के करियर में ऐसा डरावना माहौल औऱ ऐसा आक्रामक-अभद्र व्यवहार चैनल के अंदर नहीं देखा. शैलेंद्र शर्मा ने मेरे एक सीनियर कलीग के साथ जिस तू-तड़ाक और दोयम दर्जे की भाषा में बात करनी शुरु की, उसने खड़े सभी सहकर्मियों को आक्रांत कर दिया. किसी भी व्यवस्था में मुद्दे, असहमति या विरोध हो सकते हैं, लेकिन उन पर चर्चा करने और निपटारे के कुछ तरीके होते हैं. वे निरंकुश, अपमानजनक और भयावह नहीं हो सकते. 5- इसके बाद उन्होंने अपने निजी गार्ड से वीडियो बनावाना शुरु किया औऱ यह कहना भी कि ये फाइलें जितने लोगों की हैं, उन्होंने पेपर जमा नहीं किए हैं, इनकी गारंटी कंपनी नहीं लेती है औऱ इनको सैलरी राणा जी देंगे. मैंने वहां भी इसका विरोध किया औऱ कहा कि हायर किए लोग इसी इंडस्ट्री के हैं, उन्होंने अपने सारे पेपर जमा किए हैं औऱ एचआर के साथ मैंने खुद इसको चेक किया है. घटना के तुरंत बाद वह वीडियो शैलेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर डलवाया. उनकी मंशा ताकत का भय पैदा करने औऱ निरंकुश तरीके से न्यूज चैनल चलाने का संदेश देने की थी. वह वीडियो मैं यहां संलग्न कर रहा हूं. 6- क्या कोई भी संस्थान यह बता सकता है कि- जिन लोगों को काम करने के लिए बायोमेट्रिक एंट्री दी गई, उनका ड्यूटी शेड्यूल तैयार करवाया गया, उनसे काम लिया गया - डेढ महीने बाद वह संस्थान किस आधार पर उन कर्मचारियों के डॉकयूमेंट को फर्जी बताते हुए उनको रातों रात टर्मिनेट कर सकता है या फिर काम करने से रोक सकता है? उनको वेतन देने से मना कर सकता है? यह व्यवहार अवांछित, मनमाना तो है ही क्या अवैध भी नहीं है? 7- प्रधानमंत्री जी, मैंने आपका इंटरव्यू लिया है. देश औऱ समाज के प्रति मेरी पत्रकारिता के लिए आपकी तरफ से मुझे प्रशस्ति-पत्र भी भेजा गया. पत्रकारिता के क्षेत्र में मेरे योगदान पर प्रतिष्ठित पुरस्कारों की मुहर है. औऱ मैंने डेढ दशकों से अधिक के संपादकीय दायित्व के साथ सार्थक औऱ सकारकात्मक पत्रकारिता की है. जीवन में अनुशासन, ईमानदारी, पत्रकारीय मर्यादा और सम्मानजनक व्यवहार को मैंने ना सिर्फ बरता है बल्कि सामनेवाले से अपेक्षा भी की है. 8- इस घटना ने ना सिर्फ मुझे मानसिक रुप से आहत किया है बल्कि न्यूज चैनलों के गलत हाथों में जाने के खतरे से भी अवगत कराया है. मीडिया संस्थान देश औऱ समाज के कई तरह के दायित्वबोध के साथ चलते हैं. वे लोकतंत्र का आवश्यक अंग हैं. उनका मालिकाना हक रखनेवालों की पात्रता की गहरी पड़ताल अनिवार्य है. क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए चैनल को औजार समझनेवाले और संदेहास्पद पृष्ठभूमि के लोगों को लाइसेंस देना, संस्थान में काम करनेवाले पत्रकारों के सम्मान औऱ सुरक्षा तक के लिए घातक है. इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. ऊपर मैंने जिस मूल चिंता की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करने की बात लिखी है, वह यही है. 9- अपने महिला सहकर्मियों के नाम मैं यहां जान बूझकर नहीं लिख रहा हूं. इसमें उनकी भी सहमति है. मैं, महिला औऱ पुरुष सभी साथियों के अधिकार औऱ स्वाभिमान के लिए देश के संविधान और कानून के दायरे में जो भी उचित है, उसकी लड़ाई लड़ रहा हूं औऱ लड़ूंगा. लेकिन मेरा आग्रह यह है कि देश में मीडिया संस्थानों की गरिमा, पत्रकारिता की मर्यादा औऱ पत्रकारों के सम्मानजनक तरीके से काम करने का इकोसिस्टम बनाए रखने के लिए न्यूज चैनल मालिकों की पात्रता और योग्यता अवश्य सुनिश्चित की जाए. आपका राणा यशवंत Narendra Modi PMO India Ministry of Information and Broadcasting Ashwini Vaishnaw गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Yogi Adityanath Office Yogi Adityanath CM Office, GoUP

Rana Yashwant

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🚩 श्री हनुमान जी के आगे हारे क्रेन-बुलडोजर? 😮🙏 दस दिन बीत गए, लेकिन संकटमोचक हनुमान जी वहीं अड़े हैं। अब IIT एक्सपर्ट क्या करने वाले हैं? 🤔 उज्जैन की तस्वीरों ने याद दिलाईं यूपी की वे कहानियाँ, जब तीन जगहों से नहीं डिगे भगवान तो बदलना पड़ा था रास्ता! 🚩 खड़े हनुमान कैसे बने ‘डॉक्टर हनुमान’? करीब एक हजार साल पुरानी मूर्ति का क्या है रहस्य? सुनिए चौंकाने वाले दावे... 🙏 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav, जो खुद उज्जैन से हैं, उनके शासन में कई अधिकारी एक हनुमान मंदिर को हटाने की जिद पर क्यों अड़े हैं? यही सवाल हर उस हनुमान भक्त का है, जो खड़े हनुमान जी की पूजा करता है। कुछ ऐसा ही सवाल मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Uma Bharti भी पत्र लिखकर पूछ रही हैं। ✍️ महाकाल की नगरी में महाबली हनुमान जी की प्रतिमा हटाने में प्रशासन को जो दिक्कतें आईं, उसने सभी को हैरान कर दिया। 😮 📌 4 सितंबर को नगर निगम की टीम ने मंदिर के कुछ हिस्से को हटाया और प्राचीन प्रतिमा को हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अगले दिन JCB और क्रेन की मदद से प्रतिमा हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। इसके बाद पुरातत्व विशेषज्ञों को बुलाया गया। इस बीच लोगों ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी और मूर्ति हटाने का विरोध किया। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई गई। आखिरकार मशीनों का इस्तेमाल रोक दिया गया। 🙏 अब IIT Indore की टीम विशेष मशीनों की मदद से मूर्ति की गहराई का पता लगा रही है। दावा किया जा रहा है कि यह प्रतिमा करीब एक हजार साल पुरानी है। वहाँ पूजा करने वाले भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। इससे पहले पुलिस की टीम बैंड-बाजे के साथ हनुमान जी को मनाने के लिए भी पहुँची थी, ताकि रुका हुआ काम आगे बढ़ सके। लेकिन अब तक बात नहीं बन पाई है। 🚩 स्थानीय लोगों का कहना है कि इसे ‘डॉक्टर हनुमान’ कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ कोई भी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पहुँचे तो हनुमान जी के आशीर्वाद से उसकी परेशानी दूर हो जाती है। 🙏 दरअसल, 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए सड़कों के चौड़ीकरण की योजना है, जिसके लिए हनुमान जी की प्रतिमा हटाने की कोशिश की जा रही थी। अब सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि वहाँ बड़ी संख्या में लंगूर पहुँच चुके हैं। 🐒 हालाँकि, इस दावे पर अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अगर यह बात सच है, तो सवाल उठता है—क्या त्रेता युग में भगवान राम के साथ वानर सेना खड़ी थी, वैसे ही कलियुग में भगवान हनुमान की प्रतिमा को बचाने के लिए ‘लंगूर सेना’ खड़ी हो गई है? 🙏🐒 आस्था इसे चमत्कार मान सकती है, जबकि विज्ञान इन घटनाओं को अपनी कसौटी पर परखता है। देश में ऐसे कई उदाहरणों की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं, जब प्राचीन मंदिर या प्रतिमाएँ हटाने के प्रयासों के बीच रास्ता बदलने की बात सामने आई। 🛕 उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के खेरेश्वर मंदिर के पास स्थित प्राचीन बालाजी मंदिर को हटाने की कोशिश का भी जिक्र मिलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर हटाने पहुँची मशीन खराब हो गई थी। बाद में करीब 150 साल पुराने मंदिर को जैक की मदद से खिसकाने की बात सामने आई। इसी तरह लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज के विभिन्न मार्गों पर सड़क चौड़ीकरण और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के दौरान प्राचीन मंदिरों को बचाने के लिए मार्ग में बदलाव किए जाने के उदाहरण भी बताए जाते हैं। 🚩 यानी कुछ लोगों के लिए यह आस्था और भगवान के आशीर्वाद का विषय है, जबकि प्रशासन और विशेषज्ञ इसे तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टि से देख रहे हैं। उत्तराखंड में भी कई लोग आज तक यह मानते हैं कि यदि धारी देवी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश नहीं की गई होती, तो शायद इतनी भीषण आपदा नहीं आती। हालांकि इस तरह की मान्यताओं को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग हो सकता है। हर जगह की अपनी-अपनी कहानियाँ हैं और लोगों की अपनी-अपनी आस्थाएँ। 🙏 आप इसे आस्था मानते हैं, संयोग या विज्ञान का विषय? फैसला आपको करना है। 🚩🙏

अखण्ड भारत संकल्प

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यह डॉ अनिल कुमार मीणा जी है,जालौर राजस्थान में कार्यरत है। पहले उनके साथ अस्पताल में मारपीट ओर जातिगत उत्पीड़न होता है। SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कराने के बाद सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह राजपूत द्वारा FIR वापस लेने फिर से जातिगत उत्पीड़न करके उनके सरकारी आवास में जान से मारने हेतु धमकाया जाता है। अब FIR के कुछ बिंदु पढ़िए। रात्रि लगभग 11 बजे एक मरीज सग्रामाराम (आयु लगभग 80 वर्ष) को उसके परिजन गंभीर अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दासपा लेकर आए थे। मैंने तुरंत मरीज को अटेंड किया और उपलब्ध आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा व इनिशियल ट्रीटमेंट (इनिशियल ट्रीटमेंट) प्रदान किया। मरीज की नाजुक एवं चिंताजनक स्थिति को देखते हुए मैंने परिजनों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि मरीज सीरियस है अतः इसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र (हाई सेंटर) के लिए रेफर करना आवश्यक है। तदनुसार मैंने तुरंत मरीज का रेफरल कार्ड तैयार कर दिया तथा चिकित्सालय स्तर से त्वरित कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस (एम्बुलेंस) की व्यवस्था भी करवा दी। एम्बुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज के परिजनों ने मरीज को तुरंत ले जाने से मना कर दिया और आनाकानी करने लगे परिजनों का कथित तौर पर कहना था कि हमारे घर पर काम है, हम सुबह लेकर जाएंगे अथवा हम इसे हमारे पर्सनल व्हीकल (निजी वाहन) से ही लेकर जाएंगे और वे एम्बुलेंस ले जाने से साफ मुकर गए। मरीज को विधिवत रेफर करने और एम्बुलेंस सुपुर्द करने के बाद, मैं रात्रि भोजन के लिए अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने सरकारी क्वार्टर पर चला गया। फिर परिजनों की घोर लापरवाही और समय पर उच्च केंद्र न ले जाने के कारण लगभग 40 मिनट के बाद मरीज सग्रामाराम की अस्पताल परिसर में ही मृत्यु हो गई। मरीज की मृत्यु होते ही परिजनों ने अचानक उग्र व हिंसक रूप धारण कर लिया और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर श्री रामलाल जी के साथ गाली-गलौज व मारपीट करते हुए, उन्हें जबरन पकड़कर मेरे सरकारी क्वार्टर की तरफ लेकर आए तथा बाहर चिल्लाने लगे कि डॉक्टर साहब को बाहर निकालो। जैसे ही में चिल्लाने की आवाज सुनकर अपने क्वार्टर के पीछे के हिस्से से बाहर अस्पताल परिसर की तरफ आया, वहां खड़े परिजनों में शामिल 5 पुरुषों (मेल) ने मुझे देखते ही तुरंत मेरे साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी और चिल्लाने लगे कि आपने हमारे बाप को मार दिया है और अब हम आपको मारेंगे। वे पांचों पुरुष मुझे रास्ते में लगातार बर्बरतापूर्वक थप्पड़ मारते और पीटते हुए जबरन खींचकर अस्पताल के वार्ड (वार्ड) के अंदर लेकर चले गए और फिर आगे का पूरा हिंसक प्रकरण व मारपीट अस्पताल वार्ड के अंदर की गई, जहाँ उनके साथ उपस्थित एक महिला (फीमेल) भी इस पूरे कृत्य में उनकी मदद कर रही थी तथा पुरुषों में से एक ने मेरे सिर पर किसी अज्ञात ठोस वस्तु (ऑब्जेक्ट) से जोरदार वार किया जिससे मुझे गंभीर चोट आई। हमलावरों ने हमें धमकाते हुए सख्त हिदायत दी कि अपने-अपने मोबाइल फोन जेब में ही रखो, कोई भी अपने फोन को टच (स्पर्श) नहीं करेगा और उन्होंने हमें किसी को भी फोन लगाने या सूचना देने से पूरी तरह रोक दिया। इसके बाद उन्होंने हमें जान से मारने की प्रत्यक्ष धमकियां देते हुए कहा कि तुम्हें जान से मार देंगे, तुम्हारा गला काट देंगे, तुम्हारी गर्दन और पूरा शरीर अलग करके कुएं में डाल देंगे, यह दासपा है और यहां किसी को पता भी नहीं चलेगा। इस घोर मानसिक व शारीरिक खौफ के साए में उन्होंने मुझसे जबरन दबाव बनाकर एक नोट (पत्र) लिखवाया कि मैंने गलत इंजेक्शन लगाकर मरीज को मार दिया है और इसका मुआवजा कौन देगा अपनी तथा नर्सिंग स्टाफ की जान बचाने के लिए मुझे मजबूरन उस झूठे पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े और उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर रामलाल जी से भी उस पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। 7. यह कि इसके बाद आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक (होस्टेज) बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया। आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया। इसी दौरान उन्होंने जातिगत द्वेषता व दुर्भावना प्रदर्शित करते हुए मेरी जाति के बारे में पूछा और मेरे द्वारा स्वयं को मीणा बताने पर अत्यंत अपमानजनक व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि मीणा, चमार तुमको कोई नॉलेज नहीं है तुम यहाँ के नहीं हो और यहाँ के बारे में कुछ नहीं जानते, तुम्हारी पगार कितनी है, सरकार तुम्हें कितनी पगार देती है, तुम्हारे पास डॉक्टर की डिग्री है भी या नहीं है। घटना के 8 दिन बाद भी Jalore Police ने अभी तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। Bhajanlal Sharma Rajasthan Police HelpDesk CMO Rajasthan

Ashok Meghwal

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मंगेश यादव के एनकाउंटर पर सवाल क्या खड़े हुए, कुछ लोग विचलित हो गये. लेकिन सच अगर कड़वा है तो क्या नकार दें? पढ़िए आगे 👇 28 अगस्त को दिनहदाड़े सुल्तानपुर शहर में मशहूर सर्राफ भरत जी ज्वैलर्स के यहां करीब डेढ करोड़ रूपये की लूट हुई पुलिस के मुताबिक, इस लूट में कुल 11 बदमाश शामिल थे. इस लूट का मुख्य आरोपी विपिन सिंह नाम का अपराधी है विपिन सिंह पर गुजरात से लेकर उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में लूट, डकैती, चोरी, हत्या का प्रयास के 36 मुकदमे दर्ज हैं मुख्य आरोपी विपिन सिंह ने नाटकीय तरीके से पुलिस को चकमा देते हुए 04 सितंबर को कोर्ट में सरेंडर कर दिया जबकि लूट के 4 दिन बाद 02 सितंबर को पुलिस मंगेश यादव के जौनपुर स्थित उसके घर पहुंचती है आधे कपड़ो में लेटे मंगेश को पुलिस रात में करीब 2 बजे अपने साथ लेकर जाती है इसके तीन दिन बाद 5 सितंबर को सुबह मंगेश को तथाकथित एनकाउंटर में मार देती है STF दावा करती है कि मंगेश के पास से 32 बोर की पिस्टल, 315 बोर का तमंचा, बाइक और लूटे गए जेवर बरामद किए हैं. जबकि जेवर बरामद नहीं होते इसके अलावा पुलिस जब मंगेश को अपने साथ ले गई थी, तब वो निहत्था गया था, उसके पास कुछ नहीं था इस घटना में शामिल 11 अपराधियों में से सिर्फ एक मंगेश यादव को एनकाउंटर में मारा जाता है। जबकि घटना में 3 सितंबर को सचिन सिंह, गोविंद सिंह और त्रिभुवन को मुठभेड़ में घायल कर गिरफ्तार किया जा जाता है. किसी की जान नहीं ली गई अगर पुलिस का इरादा मंगेश को जिंदा गिरफ्तार करने का होता तो पुलिस सिर्फ एक गोली मारकर पकड़ सकती थी, जैसा इस मामले के तीन और अपराधियों के साथ किया गया है मगर STF ने मंगेश को चार गोलियां मारी वो भी पैर से ऊपर वाले भाग में इस एनकाउंटर को चप्पल पहनकर अंजाम देने वाले यूपी STF के CO धर्मेश कुमार शाही हैं. जो सबइंस्पेक्टर से CO बने हैं अभी साल 2019 में वह डिप्टी SP की रैंक पर प्रमोट हुए थे. शाही ने अभी तक 50 से अधिक एनकाउंटर किए हैं. मंगेश के पहले भी इनके कई एनकाउंटर पर सवाल खड़े हुए हैं ये वही डीके शाही हैं, जिनकी पत्नी ऋतु शाही BJP की नेता हैं. ऋतु शाही को हाल में ही उत्तर प्रदेश महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है. साथ ही साथ ऋतु शाही गोरखपुर क्षेत्र में BJP महिला मोर्चा की क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष भी हैं मंगेश एनकाउंटर की जांच भी डीके शाही के सजातीय अधिकारी SDM विदुषी सिंह को दी गई है जो लोग अपराधी की जाति पर उठ रहे सवालों से विचलित हैं क्या अब उनके पास है कोई जवाब? अब आक्रोश नहीं मचाओगे? अब अन्याय नहीं दिखेगा? अब ज्ञान नहीं देंगे? असलियत है कि लगभग सारे न्यूज़रूम में दलितों आदिवासियों और पिछड़ों का कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं है इक्का दुक्का कैमरा वाला होगा शायद - जो ना शो की हैडलाइन निर्धारित करता है, ना अख़बार की सुर्ख़ी - और ना बनावटी आक्रोश आईना दिखाने पर बुरा लगना स्वभाविक है - लेकिन सच से कैसे मुँह मोड़ा जाये

Supriya Shrinate

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जोहार साथियों उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत के द्वारा बाप पार्टी व मेरे को लेकर बड़बोले बयानो की छोछली सोशल मीडिया पोस्ट का मैं जवाब देना उचित नहीं समझा। लेकिन कहावत है ना झूठा आदमी झूठ को बार बार और जोर-जोर से परोसता है तो दुनिया उसको सच मान लेती है, इसलिये आज मन्नालालजी की झूठी छोछली पोस्ट का जवाब देना भी जरूरी समझ रहा हूँ। मन्नालाल रावत का लट्ठु झूठ 1. एक साल पहले मणिपुर में आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र करके सड़को पर घुमाया व 300 के करीब लोगों की हत्या कर दी गई। उस बात को लेकर BAP पार्टी के नेतृत्व में डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर मशाल जुलूस निकाला था और अब वही फोटो के साथ दिनांक 01.04.2025 को मन्नालालजी पोस्ट करके कहते है कि बाप नेता पाक एजेंसी ISI की ताकते हैं और तीन दिन बाद दिनांक 03.04.2025 की रात लोकसभा में देश के गृह मंत्री अमित शाह क्या बोले, आपने सुन ही लिया। क्या मन्नालालजी की नजर में देश के आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेता पाकिस्तानी है ? 2. झाड़ोल कोटड़ा में नर भक्षी पैंथर के हमले से कई आदिवासियों की मृत्यु व घायल हो गये थे। पीड़ित को सहायता तो दूर, और मन्नालालजी कहने लगे ये पैंथर तो बाप पार्टी व राजकुमार द्वारा छोड़े गये है। इनसे बड़ा फैंकने वाला सायद कोई होगा। 3. एक रिकॉर्डिंग वायरल हुई थी जिसमें सांसद मन्नालाल रावत उनके बीजेपी कार्यकर्ता को कह रहे हैं - जाओ आदिवासियों के घर जला दो उनको लट्ठ लेकर मारो। एक आदिवासी सांसद द्वारा आदिवासी समाज के घर जलाने की बात करता है। क्या उनकी ये गंदी सोच उनके प्रमाण पत्र को शक के घेरे में डालता है कि नही ? 4. संविधान सभा में आदिवासी समुदाय व देश की आमजनता की मजबूती से पैरवी करने वाले जयपाल सिह मुंडा की जन्म जयंती मनाने पर कहने लगे ये झारखंडी व ईसाई है और जयंती मनाने वाले लोग देश विरोधी ताकत हैं। क्या जयपाल सिह मुंडा के प्रति ऐसे विचार एक ST सांसद के मन में आ सकते है ? 5. वक्फ बिल को लेकर मन्नालालजी वीडियो में राम राम दोस्तों संबोधन करके झूठ बोलने लगे कि बाप पार्टी वक्फ बिल का सपोर्ट करके अनुसूचित क्षेत्र की जमीन मुस्लिम को देना चाहती है। अब हकीकत गृह मंत्री अमित शाहजी व सांसद ओवैसी जी के भाषण में स्पष्ट किया है और हकीकत है कि अनुसूचित क्षेत्र घोषित होने के बाद उस क्षेत्र में वक्फ को नवीन जमीन आवंटन नही की है और ना ही भविष्य में की जा सकती है। किसी ST व्यक्ति ने मुस्लिम धर्म अपना भी लिया है तो भी वो वक्फ को जमीन नही दे सकता, ना ही वक्फ बोर्ड ST की जमीन ले सकता है और ना ही वो सदस्य बन सकता है, लेकिन बीजेपी के नेताओं का कल्चर है जोर से बोलो झूठ बोलो और देश की भोली भाली जनता को गुमराह करो। 6. इस बार 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस मनाने वाले आदिवासी भाइयों को मन्नालाल रावत द्वारा बधाई तो दूर की बात, उन पर नवअगस्तीये करके भद्दी टिप्पणी की थी। 7. आदिवासी समुदाय का व्यक्ति अगर कोई गर्व से खुद को आदिवासी कहता है तो ऐसे व्यक्ति को मन्नालालजी संविधान विरोधी व देशद्रोही का दर्जा देते है। क्या ऐसी सोच आदिवासी सांसद की हो सकती है ? इसलिए उनके प्रमाण पत्र पर लोगों को शक होने लग गया है। 8. अंग्रेजों, राजा-रजवाड़ों से आजादी को लेकर अलग भील प्रांत की माँग करते हुए मानगढ़ पर 1500 से अधिक शहीद हुए भील गणवीरों व गोविंद गुरु महाराज के इतिहास को मन्नालाल रावत ने पाठ्यक्रम से हटाने की माँग कर डाली थी। क्या सच में एक आदिवासी सांसद आदिवासियों के महापुरुषों के इतिहास को हटाने की सोच रख सकता है ? कुछ तो दाल में काला है। 9. भारत सहित पूरे विश्व में मानव उत्पत्ति व मानव विकास को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ज्ञान देने वाले मानवशास्त्र विषय को देश के शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम से हटाने की माँग लोक सभा में कर दी। इस घटना के बाद तो मन्नालाल रावत आदिवासी विरोधी ही नही, पूरे मानव जाति के विरोधी लगे। ये तो मन्नालालजी रावत के कुछ ही भ्रमित करने वाले बयानों का उदाहरण है, बाकी आदिवासी, दलित, मुस्लिम व गरीब के लिये रात दिन षड्यंत्र करके झूठ पर झूठ बोलते हैं। मुझे व्यक्तिगत मन्नालालजी से कोई समस्या नही है लेकिन उनकी आदिवासी समाज विरोधी हरकतों से मुझे ही नहीं, पूरे आदिवासी क्षेत्र की जागरूक जनता को दिक्कत है। हालाँकि अंधभक्त ताल में ताल ठोकते रहते हैं। जोहार

Rajkumar Roat

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Environment Warriors: The Guardians of the Green' के तत्वाधान में आज मुस्तफाबाद फॉरेस्ट गेस्ट हाउस, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नौवें चरण में साइकिल एवं स्कूल किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में तैनात 25 वॉचर्स को साइकिलें प्रदान की गईं। इसका उद्देश्य उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाना और गश्त के दौरान उन्हें सुगम आवागमन की सुविधा देना है। Herbivores Species की संख्या बढ़ रही है, जो यह दर्शाता है कि जंगल का स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र बेहतर हो रहा है। विभिन्न प्रजातियों के हिरणों के झुंड भी बढ़ गए हैं, जैसा कि 1980 के शुरुआती दशक में हुआ करता था। इस मौके पर वन एवं वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे जिला वन अधिकारी श्री मनीष सिंह जी एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी श्री सहेंद्र यादव जी उपस्थित रहे। इसी क्रम में सीएसआर फंड्स के माध्यम से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए अतिरिक्त वाटर पंप उपलब्ध कराए जाने की घोषणा की गई तथा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए पीताम्बरा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया गया। प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी की कक्षा 5 उत्तीर्ण कर चुकी 10 मेधावी छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं, ताकि वे आगे की शिक्षा के लिए दूरी की बाधा को पार कर सकें, साथ ही नवीन प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए उन्हें 'वेलकम किट' (स्कूल बैग, स्टेशनरी और कैप) भेंट की गई। पूर्व में विद्यालय में एक स्मार्ट क्लास की भी स्थापना कराई गई थी! बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी के प्रधानाध्यापक श्री मुनीश पाठक जी भी उपस्थित रहे। इसके साथ ही एक सहज (स्पॉन्टेनियस) क्विज़ का आयोजन भी हुआ, जहाँ जिज्ञासा ने सवालों का रूप लिया और पाँच प्रश्नों ने ज्ञान की लौ को और प्रज्वलित किया। इसी क्रम में एक छात्र ने भावपूर्ण कविता से मन को छू लिया, तो दूसरे ने मधुर गीत से वातावरण को सुरमयी बना दिया। ऐसे अनमोल क्षण ही इस कार्यक्रम की आत्मा बन जाते हैं, युवा छात्र ही देश का भविष्य हैं, और उनकी ऊर्जा में एक उज्ज्वल कल की झलक साफ दिखाई देती है। इन्हीं नन्हे सपनों में कल का सशक्त भारत आकार ले रहा है। इसके उपरांत उपस्थित ग्रामीणों और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। संस्था के सदस्यों ने 'ग्रीन गार्जियंस' की भूमिका निभाते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और वन्यजीवों की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इन टाइगर रिजर्वों में अबतक 6 कार्यक्रम किए गए। इनमें अबतक वन रक्षकों को 250 साइकिलें, पार्क ड्राइवरों व गाइडों को 2000 जैकेट्स तथा निगरानी एवं वन्यजीव अवलोकन के लिए 100 निकॉन दूरबीन प्रदान किए गए हैं, साथ ही दो विद्यालयों में 2 स्मार्ट क्लास की स्थापना कराई गई है तथा महिलाओं के स्वावलंबन के लिए 20 सिलाई मशीनें प्रदान कर 2 तारा शक्ति सिलाई केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, तथा वनजीवन के लिए पानी की सरल उपलब्धता हेतु सोलर संचालित वाटर पम्प भी स्थापित कराए गए हैं। यह कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे! उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के जंगल और नेशनल पार्क सुरक्षित रखना इसलिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये केवल जैव विविधता के केंद्र नहीं, बल्कि हमारी जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और आपदा नियंत्रण की प्राकृतिक ढाल हैं। ये वन गंगा बेसिन के जलस्तर को बनाए रखते हैं, बाढ़ को नियंत्रित करते हैं, हजारों वन्यजीवों—विशेषकर बाघ, हिरण और हाथियों—का आवास हैं, और स्थानीय समुदायों की आजीविका से भी जुड़े हैं। तराई के जंगलों का संरक्षण दरअसल पर्यावरण सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। पर्यावरण संरक्षण की इस अनूठी पहल के अंतर्गत युवा सहभागिता को बढ़ावा देने के समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लखनऊ में प्रख्यात फिल्म अभिनेता संजय दत्त के साथ Net Zero @ Sarojininagar कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें रैली निकाल कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है। इसी क्रम में सरोजनी नगर में 200 रुद्राक्ष के पौधे लगाए जा चुके हैं। पर्यावरण के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण और शैक्षणिक उन्नति की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान श्री अम्बिका मिश्रा जी, श्री अजय गुप्ता जी, सिद्धार्थ हरीश जी भी उपस्थित रहे। Environment Warriors

Rajeshwar Singh

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पत्रकार का सवाल: अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर आपका क्या कहना है? जवाब: जैसा कि अभी आप सबके सामने आया है, न तो दवाइयाँ आ रही हैं और न ही कोई सप्लाई हो रही है। आज जनता बेहद दुखी और परेशान है, और योजनाएँ सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह गई हैं। यह बहुत गंभीर और चिंताजनक मामला है। हमारी सरकार की यह इतनी शानदार स्वास्थ्य योजना थी जिसकी तारीफ़ आज भी पूरे हिंदुस्तान और हर राज्य में हो रही है। शायद दुनिया के किसी भी कोने में ₹25 लाख तक का मुफ़्त इलाज नहीं मिलता, जहाँ एमआरआई, सीटी स्कैन, दवाइयाँ और डायलिसिस सब कुछ मुफ़्त था। अब आप बताइए कि उसके बाद आज ऐसी बदतर स्थिति क्यों बन रही है? हम जहाँ भी जाते हैं, लोग हमसे शिकायत करते हैं कि अस्पताल वाले इलाज के बदले पैसे माँग रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार से निजी और सरकारी अस्पतालों को समय पर भुगतान (Payment) नहीं मिल रहा है, और इस लापरवाही का हर्जाना वे आम जनता से वसूल रहे हैं। यह भला कौन सा तरीका हुआ? योजना अभी भी लागू है, इसे बंद नहीं किया गया है, लेकिन सरकार से बजट न मिलने के कारण दवाइयाँ मिल नहीं रही हैं और ऑपरेशन ठप पड़े हैं। जब अस्पतालों को सरकार से पैसा नहीं मिल रहा है, तो वे जनता से पैसे माँग रहे हैं। इसमें भला उस गरीब और बेकसूर जनता का क्या दोष है? यह आज का सबसे महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु है। पत्रकार का सवाल: कल यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री जी एक बार फिर दिल्ली गए थे और वहाँ कोई मीटिंग हुई है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? जवाब: यह अच्छी बात है, मैं तो इसका स्वागत करता हूँ। मैंने पहले भी कहा था और आज फिर दोहराता हूँ कि जिस दिन आप राजस्थान में यमुना का पानी ले आएँगे, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर आकर आपको माला पहनाऊँगा। मैंने नीमकाथाना में भी यही घोषणा की थी कि 'मुख्यमंत्री जी, अगर आप जनता का यह सपना पूरा कर दें, तो मैं खुद आपके घर आकर आपका अभिनंदन करूँगा।' मैं अपने इस वादे पर आज भी पूरी तरह कायम हूँ। लेकिन बात सिर्फ दिल्ली या चंडीगढ़ जाकर बार-बार बैठकें करने से नहीं बनेगी, हमारा सीधा सरोकार ज़मीन पर पानी आने से है, मीटिंगों से नहीं। पत्रकार का सवाल: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि गहलोत साहब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके खुद के राज में ज़बरदस्त भ्रष्टाचार हुआ था? जवाब: नहीं, मैंने आज सुबह अखबारों में उनका बयान पढ़ा, जो कि बेहद अजीब और समझ से परे था। उन्होंने आपत्ति जताई कि मैंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 'घोड़े और गधे' क्यों कहा। मैं स्पष्ट कर दूँ कि मैंने आम जनप्रतिनिधियों को ऐसा नहीं कहा; मैंने यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किए हैं जो बिक चुके हैं या बिक रहे हैं। जो विधायक (MLA) और सांसद (MP) जनता का भरोसा तोड़कर 10 करोड़, 25 करोड़ या 50 करोड़ रुपये में अपनी निष्ठा बेच रहे हैं, उनके लिए मैंने 'बिकने वाले घोड़े, गधे, भैंस और बकरी' जैसे चार शब्दों का प्रयोग किया था। इसमें भला गलत क्या है? जनता जिन पर भरोसा करके, अपना कीमती वोट देकर उन्हें सदन में भेजती है, वे पैसों के लालच में आकर बिक जाते हैं। आज बंगाल और महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह सबके सामने है। महाराष्ट्र में शिवसेना के 28 में से 20 सांसद चले गए, 80 में से 60 विधायक पाला बदल गए और अभी कल ही 8 में से 6 सांसद और चले गए। ऐसे बिकने वाले लोगों की पूजा तो की नहीं जा सकती! मदन राठौड़ जी दरअसल सिर्फ अपने दिल्ली बैठे वरिष्ठ नेताओं (Seniors) को खुश करने और अपनी नंबरिंग बढ़ाने के लिए इस तरह की बयानबाज़ी का प्रयास कर रहे हैं। पत्रकार का सवाल: सर, चर्चा है कि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी मंत्रिमंडल का विस्तार या बदलाव होने वाला है? मेरा जवाब: देखिए, यह हमारा काम नहीं है, यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर यही चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी ही अपने पद पर बने रहें। आजकल मीडिया में लगातार यह चलने लगा है कि 'ये हट रहे हैं, वो हट रहे हैं।' मैं चाहता हूँ कि वे बने रहें; वे एक भले आदमी हैं, व्यवहार कुशल हैं और सभी से बेहद सम्मान के साथ बात करते हैं। ऐसे शालीन व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री का पद शोभा देता है और वे विपक्ष के नाते हमें भी सूट करते हैं। 1/2

Ashok Gehlot

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आपने एक चीज नोटिस किया होगा जैसे ही प्रवेश वर्मा जी ने अरविंद केजरीवाल के शीश महल का पूरा एक डिटेल टूर जनता को दिखा दिया तब से केजरीवाल एंड गैंग एकदम चुप हो गए इनको जैसे सांप सुंघ गया है वरना यह पहले कहते थे चलो हमारे साथ हम दिखा दें ना तो वहां कोई मार्बल लगा है साधारण फर्श है ना वहां कोई रिमोट वाले टॉयलेट लगे हैं ना वहां कोई आधुनिक कोई सिस्टम है केजरीवाल गैंग कहती थी वहां कोई स्विमिंग पूल नहीं है जबकि वहां पर कुल दो स्विमिंग पूल है और उन स्विमिंग पूल के लिए जर्मनी से पानी का फिल्टर सिस्टम इंपोर्ट किया गया उसको भी मेडिकल इमरजेंसी बताकर इंपोर्ट किया गया क्योंकि कोविद का दौर चल रहा था संजय सिंह तो यहां तक कहता था कि टीवी भी बिल्कुल सिंपल टीवी है लेकिन जब प्रवेश वर्मा जी ने पूरा शीश महल का एक-एक चीज देश और दुनिया को दिखाया तब से यह गैंग एकदम खामोश है अब कुछ चुटिया कहेंगे कि अरविंद केजरीवाल तो सरकारी आवास बना रहा था बिल्कुल वह सरकारी आवास बना रहा था भारत भारत में और भी मुख्यमंत्री हैं किस मुख्यमंत्री ने पांच बंगलो को तोड़कर इतना बड़ा शीश महल बनवाया और लगभग डेढ़ सौ करोड रुपए खर्च किए और किस मुख्यमंत्री की पत्नी ने बार-बार यह बोला कि मुझे यह चाहिए मुझे वह चाहिए क्योंकि पीडब्ल्यूडी की फाइल में सुनीता केजरीवाल का जिक्र कल 12 बार है की मैडम CM यह चाहती है मैडम CM वह चाहती है मैडम CM फलाना चाहती हैं असल में अरविंद केजरीवाल यह मान चुका था कि वह बहुत लंबे समय तक दिल्ली का मुख्यमंत्री बना रहेगा उसके करीबी बताते हैं कि वह मान गया था कि वह कम से कम अभी 20 साल और दिल्ली का मुख्यमंत्री रहेगा इसीलिए वह मंच से कहता था कि मोदी जी इस जन्म में आप हमें हरा नहीं पाओगे इसीलिए उसने बेदर्दी से यह पूरा शीश महल बनवाया अरविंद केजरीवाल उसे ईरानी कहावत से प्रेरित था माल ए मुफ्त दिल ए बेरहम यानी अगर मुफ्त का माल मिले तो अपने दिल को बेरहम कर लो इसके अलावा सबसे दुखद बात यह है कि इन्होंने 42 पेड़ काटे और उन पेड़ों को काटने के लिए किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया और जो 50 साल से कम उम्र के पेड़ थे 10:00 बजे पर्यावरण मंत्री गोपाल राय के पास पेड़ काटने की रिक्वेस्ट आती है और 10:05 पर गोपाल राय पेड़ काटने का इजाजत दे देते हैं वैसे यह शीश महल अरविंद केजरीवाल के लिए इतना अशुभ निकला की इसी शीश महल ने अरविंद केजरीवाल को बर्बाद कर दिया इसका सबसे पहले खुलासा नवभारत चैनल ने किया था और जिस रिपोर्टर ने यह खुलासा किया था उसका नाम भावना किशोर था उस महिला रिपोर्टर के पीछे अरविंद केजरीवाल ने पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस यूनिट की ड्यूटी लगा दी क्योंकि दिल्ली पुलिस अरविंद केजरीवाल के पास नहीं थी तब उन्होंने पंजाब सरकार को कहा कि इस भावना किशोर को बुरी तरह से फिट कर दो इसने मेरे शीश महल को दुनिया को बताया है भावना किशोर किसी काम से पंजाब गई वह गाड़ी में बैठी थी एक ई रिक्शा उनकी गाड़ी से टकराया और उसके बाद उनके ऊपर एससी-एसटी एक्ट लगा दिया गया इस मामले में भी कोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर फटकारा था की भाई यह एक्सीडेंट के मामले में तुम एससी एसटी एक्ट कैसे लगा सकते हैं और भावना किशोर तो गाड़ी में बैठी थी और ऊपर से जब सीसीटीवी फुटेज सामने आ गया तब पता चला कि उसे ई रिक्शा वाले ने जानबूझकर गाड़ी को टक्कर मारी थी यानी यह पूरी तरह से प्लानिंग थी एक खुन्नस थी की भावना किशोर की हिम्मत कैसे हुई शीश महल पर रिपोर्ट बनाने की खैर अरविंद केजरीवाल और सुनीता भाभी जहां भी होंगे फुर्सत में बैठकर शीश महल की बातें करते होंगे सुनीता भाभी कहती होगी केरूर तुम्हें याद है वह शीश महल का रिमोट वाला कमोड ?? केजरू तुम्हें याद है वह 35 लाख का फ्रिज जो हमने कोरिया से इंपोर्ट किया था? केजरू मुझे वह टीवी की बड़ी याद आती है केजरू शीश महल का फर्श कितना शानदार था यार गर्मी में ठंडा रहता था ठंड में गर्म रहता था अरे केजरू वह खुल जा सिम सिम वाला सिस्टम कितना शानदार था यार बस तालियां चुटकी बजाओ पर्दे खुल जाते थे पर्दे बंद हो जाते थे फिर अरविंद केजरीवाल ठंडी सांस लेकर आंहे भरकर कहता होगा सुन्नु वह शीश महल में गुजारे गए दिन हमारे जिंदगी के सबसे शानदार दिन है बस अब उन्हीं दिनों को याद करके पूरी जिंदगी निकालनी है क्योंकि अब दोबारा तो हम किसी राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे और इस चुनाव में तो पंजाब सरकार भी हमारे हाथ से जा रही है और उसके बाद दोनों एक दूसरे के आंसू पोछते होंगे

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

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BJP से बड़प्पन की उम्मीद करना बेमानी है. और नरेंद्र मोदी से बड़ा दिल दिखाने की अपेक्षा करना बेवक़ूफ़ी संसद सत्र शुरू हुआ, नेता विपक्ष राहुल गांधी और नेता सदन नरेंद्र मोदी एक साथ स्पीकर महोदय को लेकर ऊपर पहुँचे एक नई शुरुआत की पहल ख़ुद राहुल गांधी ने पहले हाथ बढ़ा कर की. नेता प्रतिपक्ष के रूप में सदन में उनका पहला वक्तव्य बेहद उम्दा था. धीर गंभीर बात, हिंदुस्तान के लोगों के प्रतिनिधित्व की बात करते हुए - विपक्ष की आवाज़ को जगह दिये जाने की पुरज़ोर पैरवी की. यहाँ से अगर BJP चाहती तो एक अच्छी पहल हो सकती थी लेकिन छोटे मन के लोगों से बड़ी बातों की उम्मीद करना ही ग़लत है. स्पीकर ने 49 साल पहले लगी इमरजेंसी का प्रस्ताव रखा, फिर आज 27 जून को राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा लिखित अभिभाषण में भी 25 जून 1975 की इमरजेंसी का ज़िक्र किया पुराने घाव कुरेदने से क्या हासिल होगा? इमरजेंसी का निर्णय ग़लत था, इसमें कोई दोराय नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि इंदिरा जी ने ख़ुद उस गलती को माना था और लोकतांत्रिक चुनाव कराए थे. यही नहीं, इमरजेंसी से कोई वास्ता ना होने के बावजूद स्वयं राहुल गांधी ने इमरजेंसी को एक गलती बताया है और ऐसा कभी दोबारा ना हो इसीलिए वह संविधान को हर हाल में सुरक्षित रखने के किए प्रतिबद्ध हैं लेकिन अब क्योंकि छेड़ ही दिया है तो कुछ सवाल पूछ ही लिए जायें : 1) एक साथ एक ही सत्र में क़रीब 146 विपक्षी सांसदों को लोक सभा से निलंबित करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 2) विपक्षी सांसदों के माइक बंद कर देना, क्या यह एमरजेंसी नहीं है? 3) राहुल गांधी के 14 मिनट के भाषण में 11 मिनट ओम बिरला की शक्ल दिखाना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 4) 51 मिनट के राष्ट्रपति के आज के अभिभाषण में 6 बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को और 73 बार नरेंद्र मोदी को दिखाना, क्या ये इमरजेंसी नहीं है? 5) स्पीकर का ‘जय संविधान’ बोलने पर आपत्ति करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 6) जबरन काले कृषि क़ानून, CAA, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 पास कराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 7) सिर्फ़ वॉइस वोट से क़ानून को पारित कराना, लोकसभा में 35% विधेयक एक घंटे से कम समय में पारित कराना और मात्र 16% बिल को Parliamentary Standing Committee के भेजना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 8) संसद के प्रांगण से छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा गाँधी और बाबासाहेब की प्रतिमाओं को बिना विपक्ष से चर्चा किये बियाबान में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 9) विधायकों की नीलामी करके चुनी हुई सरकारें गिराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 10) विपक्ष को ED, CBI, Income Tax से प्रताड़ित करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 11) चुनाव के दौरान मुख्यमंत्रियों को जेल में डालना, मुख्य विपक्षी पार्टी के बैंक खाते बंद करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 11) विपक्षी नेताओं की, न्यायाधीशों की, अफ़सरों की, अपने ख़ुद के मंत्रियों की पेगसस से जासूसी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 12) एक साल से जलते हुए मणिपुर को उसके हाल पर छोड़ देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 13) चीनी अतिक्रमण से आक्रोशित लद्दाख की अनदेखी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 14) किसानों को सवा साल तक दिल्ली की सरहद पर छोड़ देना जिसमें 750 किसानों की शहादत हो गई, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 15) किसान नरसंहार के मुख्य अभियुक्त के पिता को गृह राज्यमंत्री बनाए रखना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 16) रोज़गार की माँग करते युवाओं को पुलिस से बर्बर लाठीचार्ज कराना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 17) छात्रों को प्रदर्शन करने पर जेल में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 18) पेपर पर पेपर लीक होना, परीक्षाएँ स्थगित होना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 19) 21 साल की क्लाइमेट एक्टिविस्ट को गिरफ़्तार करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 20) पत्रकारों पर असहज सच दिखाने के लिए राष्ट्रद्रोह के मुक़दमे लगाना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 21) मीडिया को अपने बस में करने के बाद सोशल मीडिया और यूट्यूब पर शिकंजा कसने की कोशिश करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 22) सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ की सबसे बड़ी फैक्ट्री चलाने के बाद अगर किसी और का पोस्ट ठीक ना लगे तो उसे सीधे जेल में डाल देना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 23) मनमाने फ़रमानों से लॉकडाउन लगाना, नोटबंदी करना, क्या यह इमरजेंसी नहीं है? 24) औरतों के ख़िलाफ़ जघन्य से जघन्य अपराध हों और सरकार हर बार आरोपी को संरक्षण दे, क्या यह इमरजेंसी नहीं है?

Supriya Shrinate

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