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छः महीने में ये दोनों अपने बाप बदल सकते हैं।
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जो ख्वाहिश रखते हैं हंसने की अनायास ही रोते हैं। शिकवा करेंगे भी किससे अपने सिक्के ही खोटे हैं।। अपने कर्तव्यों का पता नहीं क्या करते क्या होते हैं। केवल शरीर से बड़े हो गए दिल से अब भी छोटे हैं।। बहुत ज्ञानी बन रहे छीनकर सच्ची खुशी। केवल जी रहे हैं वो जिए नहीं हैं जिन्दगी।।🚩🇮🇳

#BoycottAdipurush

संवाद बदलने की घोषणा भर से हमारी पीड़ा कम नही होगी इसलिए एक आवाज मे कहने की जरूरत है #BanAdipurush

तर्क ये है कि यही आम बोल चाल की भाषा है और बच्चे रामायण की कहानी से ऐसे कनेक्ट कर पाएँगे। हँसी आती है मुझे। मतलब ये आम के पेड़ पर जामुन उगाने वाली बात है। कहानी त्रेता युग की है और भाषा टपोरी छाप कलयुग की। ऐसे कैसे चलेगा? दोस्त यारों के मुँह से ऐसी भाषा निकलती है ना कि भगवान के मुँह से । मुझे लगता है कि फ़िल्म के राइटर और डायरेक्टर अति आत्मविश्वास के शिकार थे और उसी का नतीजा है कि अभी तक उन्हें गलती का एहसास नहीं हो रहा है।

इसमें कोई संदेह नहीं है शायद बदल गये है।।

