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छात्रों के आंदोलन से घबरा रही हैं सरकार !👇

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देश के मन में जो सवाल हैं, वो विपक्ष के माध्यम से सदन में पूछे जा रहे हैं, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग जवाब देने से कन्नी काट रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर ट्रस्ट का गठन कर, उसमें अपने चहेते लोगों को भरा। ऐसे में अगर 'चढ़ावा चोरी' होती है, तो प्रधानमंत्री से सवाल पूछे जाएंगे। लेकिन मोदी सरकार अपने टूलकिट से देश का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। पर ये समझ लें कि इनके टूलकिट और सरकार दोनों की एक्सपायरी डेट खत्म हो गई है। राहुल गांधी जी लगातार छात्रों से बात कर रहे हैं, हमारा डेलिगेशन भी छात्रों से मिल रहा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के गुंडों को आसपास के राज्यों से झारखंड में घुसाया गया, ताकि एक अहिंसक आंदोलन को हिंसक बनाया जा सके। झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका जी तो छात्रों-युवाओं से मिल रही हैं, लेकिन क्या मोदी सरकार का एक भी मंत्री जंतर-मंतर छात्रों से मिलने गया? जंतर-मंतर छोड़िए, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सदन में नहीं आना चाहते, क्योंकि इनके काले-कारनामे सबके सामने आ चुके हैं। : AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन व राज्य सभा सांसद Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ जी

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नेता प्रतिपक्ष #तेजस्वी_जी ने पहले ही कहा था ~ “हम चाहते तो एक कॉल पर गांधी मैदान में पाँच लाख लोगों को जमा कर देते, लेकिन इससे हल नहीं निकलता। आंदोलन का स्थान गर्दनीबाग था और जानबूझ कर छात्रों को गांधी मैदान में ले जाया गया ताकि छात्रों पर FIR किया जा सके, वो एग्जाम दे ही नहीं पाए भाजपा की B टीम आंदोलन को कमज़ोर कर रही है…” आज आरोप लग रहे हैं की भाजपा से फंडिंग और वैनिटी वैन लिया गया है। क्या भाजपा से फंडिंग ले कर भाजपा जदयू शासित सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट होगा या छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने की साज़िश होगी? जब छात्रों पर लाठियाँ बरसी कंबल पांडे भाग खड़े हुए! जब छात्रों के सर फूटे, ये ग़ायब थे! इनका मानना है “ आंदोलन बेकार होते हैं, इससे हल नहीं निकलता” आज कंबल पांडे वैनिटी वैन की सुविधा लेते हुए छात्रों के खून पसीने से सींचे हुए आंदोलन को हाईजैक करने बैठे हैं। गांधी होते तो अपना माथा पीट लेते।

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