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'छावा' का ट्रेलर बहुत आशाएँ समेटे आया है! #Chhaava
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10 Comments

बेहतरीन ट्रेलर है 🔥🔥🔥🚩🙏

😀How to become a green thumb? Picture this can help you!

इन्हीं को पाकिस्तान जाने से रोकने खुद गांधी बाबा नूंह पहुंचे थे।.. धन्य थे बाबा तुम !!! डॉ माथुर कहते हैं कि उनके पास साल में रेप के ढाई सौ से ज्यादा मामले आते थे। हैवानियत के किस्से ऐसे सुने थे कि दरिंदे जानवरों को भी नहीं छोड़ते थे। हत्या, अपहरण, लव जिहाद, धर्मांतरण, गोतस्करी, गोहत्या… ऐसे तमाम अपराधों के लिए कुख्यात मेवात (जो मुख्य रूप से हरियाणा के नूंह, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है) एक बार फिर चर्चा में है। कारण दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दो महिला पत्रकारों ने जमीन पर उतरकर इस क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों के जीवन की उस हकीकत को बयान किया है जिसकी कल्पना मेवात इलाके से बाहर रहने वाले कर भी नहीं सकते। रिपोर्ट मुख्यत: अलवर के मेवात इलाके से जुड़ी है। सोचकर देखिए, सुनकर ही कैसा लगता है कि घर की दहलीज तक जाने के लिए छोटी-छोटी बच्चियों को चेहरे पर नकाब लगाना पड़े या बाहर जाने के लिए लड़कियाँ अपने कपड़े छोड़कर लड़कों वाले कपड़े पहनें ताकि किसी की नजर उनपर न पड़े और उनके साथ कोई अनहोनी न हो। दिन की रौशनी में लड़कियाँ मुँह ऐसे ढककर घूमें जैसे अगर पर्दा हटा तो कुछ भी हो सकता है। प्रेरणा साहनी और पूजा शर्मा की यह रिपोर्ट यही बताती है कि दिन के उजालों में पसरा सन्नाटा ही इलाके की असली तस्वीर है। डर और बेचैनी से भरे माहौल में दूर तक चलते हुए जब दोनों पत्रकारों को एक बुजुर्ग महिला मिलीं तो उन्होंने बताया कि उनके घर में 4 पोतियाँ लेकिन वह चारों को लड़के वाले कपड़े पहनाती हैं ताकि जब कोई उन्हें देखे तो लड़का ही समझे, वो यही कपड़े पहनकर आती-जाती हैं। इसके अतिरिक्त जो घर इन पत्रकारों को दिखे उनमें कपड़े बाहर निकली धूप में सूखने की बजाय भीतर टँगे मिले। सवाल किया तो पता चला कि ऐसा इसलिए ताकि किसी को ये मालूम न चले कि इस घर में लड़कियाँ है। सोच सकते हैं कि इलाके में रहने वाले लोग लड़कियों को बाहर के माहौल से बचाए रखने के लिए कितने प्रयत्न करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि मेवात के इलाकों में लड़कियाँ बाहर नहीं निकलती… बाहर निकलती हैं लेकिन पहला झुंड में, दूसरा अपना मुँह पूरी तरह से ढककर। कहीं आना जाना होता है तो ये लड़कियाँ उन टैम्पो का इंतजार करती हैं जो भरे हों, क्योंकि खाली टैम्पो में बैठने से लड़कयों को डर रहता है कि कहीं कोई अकेला पाकर कुछ गलत न कर दे। लड़कियों की सुरक्षा के यहाँ ये हाल हैं कि घर की चारदीवारी में जब बेटियाँ होती हैं तब भी घर के पुरुषों को बाहर रहकर उनकी रक्षा करना पड़ती है। शायद उन्हें ऐसा लगता हो कि कहीं दरवाजे से हटने पर कोई जबरन घर में घुस बेटियों को शिकार न बना ले। घरवालों के मन में बच्चियों की सुरक्षा का डर ऐसा है कि उनकी शादी 14 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है। मेवात क्षेत्र में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर पसरा यह भय निराधार ही नहीं है। मेवात के ग्रामों पर बनी रिपोर्ट में स्थानीयों के अलावा पूर्व सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ रवि माथुर का भी बयान है। डॉ माथुर कहते हैं कि उनके पास तो साल में रेप के ढाई सौ से ज्यादा मामले आते थे। हैवानियत के किस्से ऐसे होते थे कि दरिंदे जानवरों को भी नहीं छोड़ते थे। डॉक्टर के अतिरिक्त इलाके की डिप्टी एसपी (स्पेशनल इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन इंचार्ज) डॉ पूनम चौहान ने कहा कि उन्होंने कुछ ही माह में 70 से ज्यादा पॉक्सो के मामले देखे हैं। डिप्टी एसपी मानती हैं कि ये हालात तब तक नहीं बदलेंगे जब लड़कों को समझा, सिखाकर संवेदनशील नहीं बनाया जाएगा। क्षेत्र के हालातों के परखने के बाद जब दोनों महिला पत्रकार उन क्षेत्रों की ओर बढ़ने चलीं जहाँ से रेप के मामले सबसे ज्यादा आए- जैसे रामदढ़, नौगाँव आदि तब उन्हें भी सलाह दी गई कि वो लोग रात के अंधेरे में उस तरफ न जाएँ क्योंकि वहाँ खतरा बहुत ज्यादा है। सोच सकते हैं कि अंजान महिलाओं को लेकर इतनी चिंता में रहने में ग्रामीण अपने घर की बहन-बेटियों को कैसे रखते होंगे और उनकी चिंता में कैसे दिन-रात बीतती होगी…। मेवात से बाहर रहने वालों को शायद ये बातें अतिश्योक्ति भरी लगें या दिमाग में ऐसा आए कि ये सब हो कैसे सकता है… लेकिन हकीकत वही जानतें है जो स्थानीय हैं। इंटरनेट पर केवल क्षेत्र का नाम डाल देने भर से तमाम घटनाएँ निकलकर सामने आती हैं जो सोचने पर मजबूर करती हैं कि ऐसा आखिर यहाँ क्या है जो अपराध घटने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं… फिर नजर यहाँ के डेमोग्राफी और एक ही पैटर्न में घटती घटनाओं पर जाती है, तब जाकर समझ आता है कि समस्या आखिर है कहाँ।

Akshay Khanna is the true actor "the best" , vicky hindi is not up to the mark ‼️

इसके कुछ डायलॉग नेहरू जी के Discovery of India बुक से लिया गया है...... DR

"हे हिंदवी स्वराज्य व्हावे, ही तर श्रींची इच्छा" iss Original statement ko badla gaya hai film mai. Vicky Kaushal in film promotion interview said, stuntmens works so hard and even during ramzan they were working. Unfortunately, iss film se pseudo Secularism jhalak raha hai 😏

बाकी चीजों का नहीं पता पर विकी कौशल निराश नहीं करेगा इतना पता है और अक्षय खन्ना तो है ही पार एक्सीलेंस।❤️🤞🔥🥳

उन आशाओं पर खड़ा उतरेगा क्या

Kuch logo ke pichwa*e me aag lag gayi hain..trailer dekh ke😂

Actor में जान है!!!
