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"जो अपने आप को साधकर चले वह साधु है, क्या आपको लगता है मुख्यमंत्री जी साध कर चल रहे हैं अपने आप को?" - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
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11 条评论

मुगलिया मानसिकता वाले अब साधु की परिभाषा बता रहे हैं

Video version of @EckhartAurelius's new poem, "Catharsis" This is truly worth watching!

जय समाजवाद

अखिलेश यादव को संतों और सनातन पर टिप्पणी करने से पहले अपने परिवार की राजनीति और अपनी पार्टी की गिरी हुई स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने अपनी सादगी और निष्ठा से प्रदेश को माफियाराज से मुक्त किया, जबकि समाजवादी पार्टी सिर्फ तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के लिए जानी जाती है।

अखिलेश यादव जी के इस बयान को देखते हुए, यह व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी लगती है जो मुख्यमंत्री के व्यवहार और कार्यों के प्रति एक राजनीतिक प्रहार है। साधु की परिभाषा को ध्यान में रखते हुए, जिसका अर्थ है किसी को जो अपने आप को नियंत्रित करते हुए जीवन जीता है, यहाँ प्रश्न यह उठता है

"जो सत्ता के लिए सिद्धांत बेच दे, वो कैसा नेता? अखिलेश यादव जी, पहले खुद को साध लीजिए—कभी जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, आज उन्हीं के साथ मंच साझा कर रहे हैं!"

बिल्कुल चल रहे है और अब तुम लोग को सीधा किए हुए है तो पीड़ा है 😂

कहावत है ..बंदर क्या जाने अदरख का स्वाद। महाकुंभ और सनातन विरोधी नास्तिक साधु संतों पर सवाल न उठाएं तो अच्छा है।

साधने से याद आया कि ये क्या है फिर ? आपने चुने हुए अपने विधायक को ऐसे क्यों हटाया

Kaika murkmintri hai? Ye sobse bakwass murk montri hai.

और अन्ध्भक्त लोग भविष्य के प्रधानमंत्री इनमे देख रहे है जो व्यक्ति केवल एक प्रदेश में है तो इतना ज़हर उड़ेलता है सोचिए जिसदिन पूरे देश में होगा उसदिन केवल हिंसा की बात होगी जब्की सबको पता है देश के चारों कोने चारों धर्म से बंधे है जिससे एक देश का निर्माण होता है
