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जंगलराज की यादें आज भी बिहार के जख्म ताजा कर देती हैं। 🚨

15,406 просмотров • 10 месяцев назад •via X (Twitter)

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दिल्ली से आए सामंतवादी पत्रकारों की हालत देखिए — जनता के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं, “कब तक लालू के जंगलराज की बात करेंगे? भूल जाइए ना, तेजस्वी को एक मौका दीजिए!” अरे भइया, अगर इतना ही प्रेम है तो पत्रकारिता छोड़िए और सीधे राजद जॉइन कर लीजिए। लेकिन बिहार की जनता अब भोली नहीं रही — सजग है, सयानी है। दो टूक जवाब देती है — 👉 “जब तक ज़िंदा हैं, तब तक जंगलराज को याद कराते रहेंगे।” और वहीं, विकास पर भी ज्ञान देती है — बताती है कि लालू परिवार ने जो गड्ढा बिहार को 15 साल में दिया, एनडीए ने उसे 20 साल में भरने की कोशिश की है। लालू के समर्थक चाहते हैं कि न तो उनके ‘जंगलराज’ की याद दिलाई जाए, और न उनके पापों का हिसाब लिया जाए — ताकि लालू का बेटा फिर से गद्दी पर बैठ सके और बिहार को एक बार फिर अंधकार में धकेल दे।

Amit Malviya

73,917 просмотров • 8 месяцев назад