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जाती की परिभाषा योगी जी ने बताया केंद्र सरकार को ये समझ आए तो बेहतर है

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जिस सरकार का मुखिया ईमानदार हो उस सरकार के जिम्मेदार डंके की चोट पर बात करते है। योगी सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सामने उनके ही विधायक बृजभूषण सिंह हुड़दंग करने आये थे। शिकायत किया की फला फला गाव मे पानी नही आ रहा है,सड़के खोद दी गई है। मंत्री जी ने डंके की चोट पर कहा की अगर ऐसा हुआ तो तत्काल कार्रवाई होगी। बस मुझे उन जगहो का दौरा करा दिजिए। मै तुरंत सस्पेंड करूँगा। विधायक जी पता नही क्यो शाँत हो गये?कहने लगे कहा-कहा जायेंगे? शिकायत बस ले लिजिए। मंत्री जी ने कहा शिकायत रखिए औचक निरीक्षण करते है। सभी कार्यक्रम स्थगित कर दूँगा। आप लेकर चलिए और दिखाईये कहा सड़के खोदी गई है और किस गाँव मे पानी नही आ रहा है? जो मुद्दा विधायक जी का था उनके समर्थको ने मंत्री जी के हाथ मे डाल दिया। अब विधायक जी सोच रहे होंगे किन चूतियो के कहने पर मैने ये सब कर दिया? एक बात और सुनिए विधायक जी बाहुबली है और राजपूत भी है। देख लिजिए राजपूतो की कितनी चल रही है? राजपूत और विधायक शब्द जोड़ने से मेरा तात्पर्य मात्र इतना था की योगी जी है तो सबके है और नही है तो किसी के नही है। जो सर्वविदित है। अब या तो मसला कमिशन का था और मंत्री जी समझ गये या तो अखिलेश यादव से टिकट विधायक जी को लेना था यह बात भी मंत्री जी समझ गये। प्रदेश अध्यक्ष रहे है तो राजनिति के रंग तो समझते ही होंगे। खैर विधायक जी के मन मे जो भी रहा हो दाल नही गली और मंत्री जी का रंग देखकर ढिला पड़ गए। स्वतंत्र देव सिंह को उनके ईमानदारी के लिए तारीफ मिलनी चाहिए। योगी जी के सबसे करीबी लोगो मे स्वतंत्र देव सिंह शामिल है। उनकी इमानदारी प्रशंसनीय है।

Arun Yadav

48,654 views • 8 months ago

नाथ संप्रदाय में ‘आदेश’ का मतलब और महत्व: नाथ योगी एक-दूसरे से मिलते वक्त ‘नमस्ते’ या ‘राम-राम’ नहीं, बल्कि *“आदेश”* बोलते हैं। इसका अर्थ है: आ = आत्मा, दे = देव/परमात्मा, श = शरीर यानी: _“आत्मा, देव और शरीर एक हैं”_ या _“मैं तुम्हारे भीतर स्थित शिव को प्रणाम करता हूं।” गोरखनाथ जी ने कहा है: “आदेश आदेशे सब कोई, आदेश कहे सो योगी होई।” मतलब जो ‘आदेश’ का मर्म समझ ले, वही सच्चा योगी है! अभिवादन नहीं, उद्घोष है: ये साधारण हैलो-हाय नहीं। ये गुरु-परंपरा को नमन है। आदिनाथ शिव, मत्स्येंद्रनाथ और गोरखनाथ को याद करना है। जब नाथ योगी ‘आदेश’ बोलता है तो वो सामने वाले के अहंकार को नहीं, उसके भीतर के शिव-तत्व को प्रणाम करता है। ‘आदेश’ सुनते ही पता चल जाता है कि सामने वाला नाथ पंथी है। ये उनकी पहचान है। योगी आदित्यनाथ जी को ‘आदेश’ करते कई बार देखा गया है! योगी आदित्यनाथ जी सिर्फ UP के CM नहीं हैं। वो गोरखनाथ मठ के महंत और 'नाथ संप्रदाय के सबसे बड़े "पीठाधीश्वर" हैं। गोरक्षपीठ की परंपरा:गोरखनाथ मंदिर में सुबह गोरक्षनाथ जी की आरती के बाद, या किसी भी नाथ योगी से मिलते वक्त वो हाथ जोड़कर “आदेश” बोलते हैं। ये 1000 साल पुरानी परंपरा है। जब भी कोई नाथ योगी, नागा साधु या संत उनसे मिलने आता है, तो योगी जी पहले ‘आदेश’ करते हैं। कई बार रैली में संत समाज के सामने वो मंच से ‘आदेश’ का उद्घोष करते हैं। ये जनता को बताता है कि उनकी जड़ें कहां हैं। इसीलिए जब योगी जी ‘आदेश’ करते हैं तो वो CM की कुर्सी नहीं, गोरक्षपीठ की गद्दी का धर्म निभा रहे होते हैं। आदेश...🙏🔥

Thakur Saurabh Singh

19,905 views • 5 months ago