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जाति पूछना भी एक विशेषाधिकार है जो सबके पास नहीं होता

358,299 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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Kranti Kumar2 лет назад

किस गधे ने आपको पत्रकार बनाया ? जाति जनगणना में जाति पूछना या OBC SC ST समाज के अधिकारों की बात उठाना कोई गलत नही है. अनुराग ठाकुर ने अपमानित करने के उद्देश्य से राहुल गांधी की जाति पर प्रहार किया. सवर्ण जाति पूछकर या उसके पास कई तरीके हैं अपमान करने के, वो उन तरीकों का बखुबी इस्तेमाल कर अपमानित करते हैं.

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Raghav trivedi2 лет назад

एक पत्रकार इस बात बात को डिफेंड कर रहा है कि सदन में किसी व्यक्ति की जाति पर टिप्पड़ी करके, व्यक्तिगत टिप्पड़ी करके भी कुछ गलत नहीं किया गया है... इसीलिए ऐसे लोगों को मीडिया में सरकारी पालतू कहा जाता है

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Sùññy Shrìvastava2 лет назад

अशोक जी ने भी आज रगड़ दिया mix ब्रीड को 😂😂👇👇

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Dr Sandeep Yadav2 лет назад

पत्तलकारिता!

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Ranjit Rajput2 лет назад

यहां किसी के मुंह से चू तक नही निकली 🤣🤣 आज बिलबिला रहे हैं

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Vikas Bansal2 лет назад

.. तबियत से धुलाई प्रोग्राम चालू है.. अंधभक्तों के नेताओं का पहले ये सड़क चौराहों पर होता था अब ये उच्च सदन पर भी शुरू हो गया है.. तुझे और अंधभक्तों को मुबारक..🤣🤣🤣🤣🤣..

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Ashi Tiwari2 лет назад

संतरे आज ऐसै धोये गये 🤣🤣😭

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Vivek Mishra2 лет назад

श्री @yadavakhilesh जी, जाति में विभाजन आपकी पुरानी नीति रही है। दुःख इस बात है कि जब लठैत समाज स्वयं को पिछड़ा बोलता है जबकि दलितों , आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार लठैतों ने ही किया है। इस देश में कथित ब्राह्मणवाद की बात सब करते हैं लेकिन देश के लिए सबसे खतरनाक लठैतवाद पर कोई प्रश्न नहीं करता।

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Mr.Gupta2 лет назад

राहुल तो खुद दिन भर जाति का राग अलापते रहते हैं..पूछ कर सही तो किया...अखिलेश को तो बीच में बोलना ही नहीं चाहिए..उनकी पूरी राजनीति तो जाति समीकरण पर ही टिकी है...सच का आईना दिखा दो तो लोगों की जलने लगती है...

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कर्वज्ञम्2 лет назад

शहज़ादों की उदंडता पर पूरा देश हंस रहा है। लोग कह रहे हैं कि विरासत में पार्टी मिलती है बुद्धि और बहुमत नहीं।

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डॉक्टरी से आगे जहां और भी हैं डॉ. अशोक शर्मा को सरकार ने एपीओ नहीं किया होता तो शायद हम उनके बारे में कुछ जान ही नहीं पाते। डॉक्टर साहब डॉक्टर से आगे बढ़कर एक नेता भी हैं और एक समाज सुधारक भी। गांव वालों से कनेक्ट बहुत अच्छा है यह दिख रहा है। विचार प्रगतिशील हैं। समाज सुधारकों वाले ही हैं। सरकार ने जब एपीओ कर ही दिया है तो इनका बहुत अच्छा उपयोग समाज को दिशा देने में भी कर सकती है। आदमी दिल से बोलता है। दिमाग उन्नत है। समझ अच्छी है। चेहरा मोहरा भी प्रेजेंटेबल है। बाकी कई बार यह भी होता है कि जो होता है वह दिखता नहीं है और जो दिखता है वह होता नहीं है। ऐसा सिर्फ राजनीति में ही नहीं होता।

Arvind Chotia

26,323 просмотров • 8 месяцев назад