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जातियों में बटेंगे नहीं, सनातनी होकर डटेंगें… बात ख़त्म #भिक्षा_यात्रा ———-
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8 Kommentare

तुम्हारे इस जन्म में तो नहीं होगा क्यूँकि नफ़रत के शिवाय कुछ सीखा ही नहीं है

भीमराव अम्बेडकर की संविधान ही जातिवाद है? जाति नही मानना यानी संविधान का उलंघन करना है गुरु जी।

बहुत उच्च विचार, दलित समाज को बराबरी का अधिकार कोई भी उच्च वर्ग का समाज नहीं देना चाहता, गांव में क्या हालत है आज जातिवाद चरम सीमा पर है

तो फिर एक काम करो कोई किसी की भी बहन बेटी से शादी कर सकता है यह नियम बना दो और बिना परमिशन की कोई भी किसी के मंदिर में जा सकता है अगर हिम्मत है तो ऐसा करके दिखाओ

जय हिन्द 🇮🇳

पहले ब्राह्मण का ऊंच नीच का मन्त्र ही खत्म करके दिखा दे तू ??

अगर हम सब अपने को सनातनी मानते हैं बाबा जी तो इसका मतलब वेद,दर्शन,उपनिषद,इत्यादि को मानते हैं फिर वर्ण,जाती भूलने की आप बात करते हैं, इससे तो फिर धर्म खतरे में आ सकता है पूरा अपने धर्म की नीव हिल जाएगी, सोचिए जरा 🤦😀

बहुत बहुत आभार स्वामी जी जैसे पत्ते, टहनी, शाखाएँ, जड़, तना, सब मिलकर ही एक पेड़ बनता है एक के बिना भी अस्तित्व खत्म और ऐसे ही हम सभी सनातनी हिंदूत्व की जड़, तना, शाखाएँ, टहनियाँ और पत्ते है हम सभी का दायित्व है इसकी रक्षा करना स्वामी जी आपकी अग्रणी भूमिका को कोटि कोटि प्रणाम
