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जंतर-मंतर खाली करा दिया गया है आज रात के बाद न तो अभिजीत दीपके दिखेगा न सोनम वांगचुक दिखेगा। दोनों अपने अपने घर चले जाएंगे। लेकिन रह जाएंगे आज की भीड़ द्वारा किया गया नाश और फिर उन भीड़ में बेवकूफ युवाओं का बर्बाद भविष्य। क्योंकि जब उन पर...

16,835 次观看 • 1 个月前 •via X (Twitter)

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भाजपा सरकार के एजेंडे में न तो भर्ती है और न ही कोई और नौकरी। भाजपा नौकरी न देकर पीडीए के हक़ का आरक्षण मारना चाहती है। भाजपाई हर काम को आउटसोर्सिंग के ज़रिए करवाना चाहते हैं, इससे एक तरफ़ उन्हें आरक्षण नहीं देना पड़ता है और दूसरी तरफ़ जिनको आउटसोर्सिंग का ठेका मिलता है, उनसे कमीशन और चंदा वसूली करके ये भाजपाई अपना ख़ज़ाना भर लेते हैं। भाजपा की अग्निवीर जैसी योजनाओं ने देश की सुरक्षा के साथ ही युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल दिया है। आज बेरोज़गारी का जो हाल है, उससे न केवल युवाओं में बल्कि उनके परिवारों तक में मायूसी का माहौल है। लोग खेत-ज़मीन बेचकर अपने बच्चों को बड़ी उम्मीद से पढ़ाते हैं लेकिन जब भर्ती-नौकरी की कहीं कोई बात नहीं होती है तो वो नाउम्मीदगी और निराशा से घिर जाते हैं। भाजपा के राज में कोई ख़ुशख़बरी नहीं आती है। लोग मुस्कुराना भूल गये हैं। भाजपा ने पीड़ा, दुख, अपमान-अन्याय के सिवा जनता को कुछ नहीं दिया है। इसीलिए जनता अब ‘हँसी-ख़ुशी छीननेवाली भाजपा’ को हटाकर ही सच्चा उत्सव-त्योहार मनाएगी। भाजपा जाए तो भर्ती-नौकरी आए!

Akhilesh Yadav

54,563 次观看 • 10 个月前

हरियाणा में BJP के पास झूठ और बहकावे के अलावा अब कुछ भी नहीं बचा। इसीलिए BJP कौशल निगम और भर्तियों के बारे में फर्जी वीडियो वायरल करके जनता को बरगला रही है। सच तो ये है कि कौशल निगम में युवाओं के लिए न कोई जॉब सिक्योरिटी है, न उचित वेतन, न पदोन्नति, न मेरिट और न ही आरक्षण लागू होता है। कांग्रेस सरकार आने पर खाली पड़े 2 लाख सरकारी पदों पर पक्की भर्तियां होंगी। कौशल निगम के जरिए काम कर रहे कर्मियों को ठोस नीति बनाकर जॉब सिक्योरिटी और बेहतर वेतन की व्यवस्था करेंगे, साथ ही भविष्य में ठेकेदारी वाली इस कच्ची भर्तियों की प्रथा को खत्म कर देंगे। पेपर लीक और भर्ती माफिया का भी जड़ से सफाया होगा।

Bhupinder Singh Hooda

15,263 次观看 • 2 年前

आज RSMSSB द्वारा आयोजित JTA परीक्षा (2600 पदों) में OMR शीट्स को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। परीक्षा की OMR शीट्स पर न तो अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर हैं और न ही पर्यवेक्षकों के, जबकि दोनों ही हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। यह परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चेयरमैन आलोक राज का कहना है कि यह ‘मिसप्रिंट’ के कारण हुआ है। ऐसे में मेरा सवाल है कि इतने बड़े स्तर पर मिसप्रिंट कैसे संभव हो सकता है? क्या यह संकेत नहीं है कि पहले भी OMR शीट्स में गड़बड़ी होती रही है? इसके साथ ही चेयरमैन आलोक राज द्वारा एक और ‘नवाचार’ किया गया है, जिसमें शामिल हैं: 1.दोगुना कटऑफ जारी न करना 2.स्कोर कार्ड जारी न करना 3.निर्धारित समय पर परिणाम घोषित न करना

Manoj Meena

27,041 次观看 • 1 年前