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जान".... मेरी मंजिल तुम्हीं हो, मैं दूसरे रास्ते पे भटक जाता हूं...

73,724 次观看 • 2 年前 •via X (Twitter)

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सनी देओल जैसे एक्टर ऐसे दहाड़कर, ललकारकर बोलते हैं 'मैं जाट हूं' तो इस कौम के तमाम नौजवानों को लगता है बाकी इंसानों से अलग और कुछ खास हूं। सड़क पर गाड़ी छू जाए तो बोलेंगे-यहीं गाड़ दूंगा, जाट हूं। कॉलेज में बहस हो जाए तो बोलेंगे-बीच से फाड़ दूंगा, जाट हूं। लड़कियां ना कह दें तो बोलेंगे-ज्यादा नखरे मत दिखा, मै छोरा जाट हूं। और बढ़ते बढ़ते ये जातीय वर्चस्व का नशा यहां तक पहुंच जाता है कि भगाना कांड हो जाता है, दलित लड़कियों का सामूहिक बलात्कार हो जाता है। मिर्चपुर कांड हो जाता है, दलितों का कुत्ता जाटों पर भौंक कैसे दिया! इसलिए उनकी पूरी बस्ती को जला दिया जाता है। जाति का गुरूर इतना हावी हो जाता है कि घटनाओं को ग़लत मानकर भी परिवारों का समर्थन पंचायत को चला जाता है और पंचायत के निर्णय पीड़ितों के ख़िलाफ़। इसलिए जातीय दंभ से बाहर निकलिए और जब तक जरूरत ना पड़े या कोई पूछे ना तब तक ये बोलने का कोई औचित्य नहीं है-मैं जाट हूं। सिनेमा वालों के चक्कर में मत पड़ें-कहीं कैसा भी मुनाफा देखेगा, लपक लेंगे पैसे पर। नहीं बोलेंगे कि उसूलों से समझौता नहीं-मैं जाट हूं।

Samar Raj

214,297 次观看 • 1 年前