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जब अपने ही भाषण पढ़ने का सहारा विदेशी टेलीप्रॉम्प्टर हो, तो स्वदेशी का पाठ पढ़ाना सिर्फ़ ढोंग है। प्रधानमंत्री और मंत्री विदेशी गाड़ियों का प्रचार करें, और जनता को स्वदेशी का ज्ञान दें, इसे कहते हैं दोहरा चरित्र।
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