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जब आप अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए वोट ही नहीं दे रहे हैं तो शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी कैसे?

14,489 просмотров • 3 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 4

Фото профиля बिहार है कि, सुधरता ही नहीं।
बिहार है कि, सुधरता ही नहीं।3 лет назад

सबसे जरूरी है की हम काम से चर्चा तो करे की हम चाहिए क्या। बिहार के नेताओं ने दशकों से जातिवाद और धर्म के नाम पर लोगों को जंजाल में फशा रखा है।लोग जाति के सिवा कुछ और बात ही नही करना चाहते । समय है की हम आवाज बुलंद करे,इस बार खुद के और आगे की पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए।

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DAVSEC14FBD_PARENTS3 лет назад

हम इस बात से पूर्णतया सहमत हैं विकास और शिक्षा के नाम पर हमने कभी वोट दिये ही नहीं.... जाति और धर्म हमारे लोकतंत्र में हमेशा से अहम मुद्दा रहा है और उसी का नतीजा के शिक्षा क्षेत्र में बड़ी रही लूट में दिखता है

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Anil Kumar Chaudhary3 лет назад

बहुत अच्छा

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Niraj Patel3 лет назад

Sahi bolen sir ye galti janta ki hi hai wo neta ko nahi pesa ko dekhte hai , sabse bada bhrast to hamari janta hi hai

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अब आप समझ लीजिए शिक्षा का सिस्टम क्यों नहीं सुधरता है? ये अनिल स्वरूप साहब हैं। भारत सरकार के कोयला और शिक्षा सचिव रह चुके हैं। यह खुद बता रहे हैं कि जब यह कोयला सचिव थे तब प्रधानमंत्री से हर महीने एक बार जरूर मिलते थे। जरूर कोयले से जुड़ी बातें ही होती होगी। कोयला भी देश के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जब ये शिक्षा सचिव थे तो प्रधानमंत्री से सिर्फ एक बार मिले। और वह भी शिक्षा से जुड़े काम के लिए नहीं बल्कि हेल्थ इंश्योरेंस समझाने के लिए मिलना हुआ। हालांकि ये कितने समय शिक्षा सचिव रहे, यह नहीं बताया है। फिर ये बता रहे हैं कि शिक्षा का बजट कैसे हर साल कम होता गया। अब आप ही बताइए कि जब कोई सब्जेक्ट सरकार की प्राथमिकता में ही नहीं होगा तो उसमें सुधार होगा कैसे? जिस विषय पर बात ही नहीं होगी, उसमें सुधार की उम्मीद आप कर कैसे सकते हैं? यह बहुत अच्छा हुआ कि शिक्षा में सुधार को लेकर एक बड़ा अनशन और बड़ा आंदोलन हुआ। शिक्षा व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता में आई। प्रधानमंत्री खुद प्रतिदिन इस पर वीडियो बनाकर देश को अपडेट दे रहे हैं। जरूर अब देश के शिक्षा सचिव प्रधानमंत्री से फ्रिक्वेंटली मिलेंगे और शिक्षा सुधार पर बातें होंगी।

Arvind Chotia

64,780 просмотров • 1 месяц назад

दिल्ली के स्कूल जाते बच्चे दिल्ली की BJP सरकार और उनके मंत्री से कुछ कह रहे हैं. क्या उनकी आवाज़ उन तक जाएगी? क्या इन बच्चों को नहीं पता कि मौजूदा वक्त में अब क़लम और किताब की बजाए हर हाथ में हथियार देने की सियासत हावी है. जब आप वोट शिक्षा के नाम पर नहीं, धार्मिक उन्माद और नफ़रत के नाम पर दें. तो इसकी सज़ा नेता के बच्चों को नहीं, गरीब कमज़ोरों के बच्चों को ही मिलेगी. कुर्सी पाकर ये किसी की झुग्गी तोड़ते हैं, तो किसी का स्कूल. चुनना आपको था, आप चूक गये. हमारा क्या है जी! हम तो कल भी शिक्षक, शिक्षा और क़लम किताब की बात कर रहे थे, आज भी कर रहे हैं और कल भी करते रहेंगे. #SaveEducationSaveNation

Dr. Laxman Yadav

52,905 просмотров • 1 год назад