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जब किनारे पर जन्मदिन के जश्न में पटना दियों में रोशन रहा, तब पूरा बिहार पानी में अपना घर ढूँढता रहा। #Bihar #SOSSevadal

11,376 просмотров • 14 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 5

Фото профиля MODIfied भड़ास!!!
MODIfied भड़ास!!!14 дней назад

बाढ़ आई तो खाना न खाओ, बिजली मत इस्तेमाल करो, नशा पत्ता करना बंद कर दो, पानी न पिये कोई

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Amjad Ansari14 дней назад

मुस्लिम क़ो टाइट करने का दिखावा कर के हिन्दू भाईओ क़ो हो सबक सिखाना था भाजपा क़ो

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Usman Adeel14 дней назад

और दो अनपढ़ो को वोट। क्या मिला? रोज़गार खोया, बेटी खोयी, घर खोया, जान खोयी अब देश भी नहीं बचेगा।

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Ashok14 дней назад

Why you are wasting your money when Government there is not taking any care ?

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shashikant Gosavi14 дней назад

Shameless, Coward Careless Modi

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इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔 आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं… और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा? जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा? और बिहार को देखिए… एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं। सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है। सवाल प्राथमिकताओं का है। जब जनता महंगाई से परेशान हो, जब बाढ़ में घर डूब रहे हों, जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों- तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे? एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही… लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है। जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए- लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।

Abhinay Maths

107,461 просмотров • 15 дней назад

शिक्षक लोग बहुत... कष्ट में ड्यूटी करते हैं, ओर लोगों को लगता है वो मज़े में है। देख रहा है, विनोद बिहार के बच्चे कितने मेहनती हैं तब जाके IAS -IPS बनते हैं , बिहार के अररिया जिले के जोगबनी खजूर बाड़ी वार्ड -10 के एक स्कूल में पानी जम गया है , ओर मैडम जी के पैर में जूते है, तो पानी में चल के कैसे आएगी ? शायद बाढ़ के आपदा में कैसे सुरक्षित बाहर निकले इसका ट्रेनिंग दे रहीं हैं बच्चों को स्कूल के बैंच बच्चे उठाकर लगा रहे ताकि मैडम उसपर चल कर स्कूल में पहुंचे। सवाल है बच्चे जब पानी में से आ रहे तो आपको उस पानी से आने में कौन रोक रहा है,क्या डर है? बिहार सरकार थोड़ा सरकारी स्कूलों की इस दुर्दशा को भी धयान दे कि थोड़ा बरसात में पूरा स्कूल का ग्राउंड में पानी लग जाता है। इसमें गलती किसकी है सरकार या मैडम जी ? आपकी राय क्या है विचार रखें 👇

Ramanand

26,049 просмотров • 2 месяцев назад