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जब तक सूरज चाँद रहेगा, तब तक ठाकुरों का भीमटों पर अहसान रहेगा।
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29 Comments

ए लड़के, अब पहले पूरी बात सुन ले। तूने उदाहरण दिया राजपूत राजाओं का। वो राजा थे। राजा के अंदर पूरी प्रजा थी। तुम्हारे बाप-दादा भी उसी राजा की प्रजा थे। तुम उनके कोई रिश्तेदार या कुछ नहीं होते थे, ठीक है? जिस तरह उस समय उनकी प्रजा में तुम लोग थे, उसी तरह उस समय SC समाज भी उनकी प्रजा था। तो उनकी खुद की प्रजा उनसे खुश नहीं थी और अंग्रेजों के टाइम पर आकर उन्होंने मदद की। मुगल टाइम में राजा-महाराजा हार गए थे। इतने सारे मुगलों ने अटैक किए। सबसे पहले मुगल आए, जितने भी बाहर के लोगों ने इंडिया पर अटैक किया, यही वो राजा-महाराजा थे जो हथियार डाल चुके थे, हार चुके थे, अपनी बहू-बेटियों को भी हार चुके थे और अपनी इज्जत भी हार चुके थे। उनके हरम का पार्ट रानियाँ बन चुकी थीं, ठीक है? और उसमें से कोई भी रानी नहीं बची, जिस जगह पर पूरा अधिकार मुगलों का रहा है। वहाँ की औरतें उनके हरम का पार्ट बनी थीं, ठीक है? ये हिस्ट्री में लिखा हुआ है। किसी की बोली हुई चीज़ नहीं है, इसलिए गलत बोली हुई चीज़ नहीं है। जो-जो एरिया में मुगलों ने आक्रमण किया, वहाँ से हमारी बहू-बेटियों को उठा लिया। दूसरा, मुगलों के बाद अंग्रेज आए। अंग्रेजों ने यही देखकर मुगलों के साथ यही किया और हिंदुओं के साथ भी यही किया। ये तो हमारे मुगल इतने ज़्यादा तगड़े थे, जो हिंदुओं के साथ मिलकर हमें आज़ादी दिला सके, है ना? अंबेडकर जी जिस समय पैदा हुए थे ना, उस समय अंग्रेजों का राज था। और अंग्रेजों से कैसे आज़ादी दिलाई जाए, जिस तरह से महात्मा गांधी ने साउथ अफ्रीका में जाकर उन लोगों, काले लोगों को आज़ादी दिलाई थी, वो आज भी उनकी चीज़ें मानते हैं और रिस्पेक्ट करते हैं, ठीक है? और यहाँ पर आपके समय—अंग्रेजों के समय, मुगलों के समय—इतना होने के बावजूद भी एक इंसान, जो SC कैटेगरी में बना रखा था उस समय से भी, तुम इतनी बुरी हालत में थे। उसमें से एक राजा को अकल आई कि जिस तरह हम अंग्रेजों के गुलाम हैं, तुम हमारे गुलाम हो। मैं तुम्हारे लिए इस चीज़ में सपोर्ट करूँगा। तुम पढ़ने में अच्छे हो, तुम अपने समाज को कम से कम आगे कर लो, आगे बढ़ा लो। हमारे जितने भी पूर्वज रहे, जो अंग्रेजों और इन सब से हार गए हैं, वो इस लायक नहीं हैं कि अब इस देश को आज़ाद करा सकें। तुम आज़ाद करा सकोगे। यही भावना थी उन राजाओं की। इसलिए वो हमारे अंबेडकर साहब को सपोर्ट करते थे। दूसरी इंपॉर्टेंट चीज़—अंबेडकर जी ने हिंदू धर्म को छोड़कर Buddhism अपनाया। Buddhism के जो मेन व्यक्ति हैं, गौतम बुद्ध, वो एक राजा थे। अपनी राजगद्दी, अपने साम्राज्य को छोड़कर यहाँ सारी मोह-माया थी, जहाँ पर सारी बुरी चीज़ें, अच्छी चीज़ें, जो भी होती थीं, जैसा भी होता था, उनको वो चीज़ें अच्छी नहीं लगीं। उन्होंने उसे त्याग दिया। उन्होंने नए धर्म का मेंशन किया और उस धर्म को फॉलो करने वाले सारे SC हैं, सारे SC हैं, जो उनकी सारी चीज़ों को समझते हुए उन्हें समझ में आया कि हिंदुत्व में कितना सही है और कितना नहीं है। उन्होंने Buddhism अपनाया और उसमें शांति पाई और उसी चीज़ को अंबेडकर जी ने फॉलो किया है। और तुम पर धिक्कार है कि तुम Buddhism का अपमान करते हो और बोलते हो कि Buddhism में ये है, वो है। चाइना, कोरिया, नेपाल, न जाने इंडोनेशिया और न जाने कितने देशों में Buddhism फैल गया, लेकिन तुम हिंदुस्तान में रहकर भी गड्ढा खोदते हो और तुम किसकी औलाद हो, ये पहले प्रूफ कर दो। तुम पहले प्रूफ कर दो कि तुम किसकी औलाद हो। तुमने अपनी बेटियाँ दे दीं। जो अटैक के टाइम पर थीं, वो चली गईं। अपने राज्य को बचाने के लिए तुम अपनी बेटियों को नहीं बचा पाए। अकबर के समय की इतनी सारी लिस्ट है। सारी लिस्ट ऑनलाइन है, ChatGPT भी यूज़ कर लो, पता लग जाएगा। तो तुमने तो दे दीं, राज लेने के लिए। रानी लक्ष्मीबाई के भी टाइम पर तुम्हारे ही राजा-महाराजाओं के भाई ने रानी लक्ष्मीबाई के बच्चे को मरवा दिया, जिससे उनकी संतान न हो। राजा को ज़हर देकर मरवा दिया, जिससे कि उसको अंग्रेजों के साथ मिलकर हथियाया जा सके। तो तुम लोगों ने जितना मुगलों के साथ मिलकर अपनी सत्ता के लिए किया, तुम्हारे खुद के अंदर के भाई-बहन सत्ता लेने के चक्कर में एक-दूसरे को मार देते हैं। ये कैरेक्टरिस्टिक तुम्हारा होता है। बेटियों को तुम लोग दान में देते रहते हो। ये तुम लोग हमें सिखाने आ रहे हो बैठकर कि कैसे SC की महिलाओं के स्तन तक काट दिए गए। तुमने काटे हैं, अंग्रेजों ने काटे हैं। इन लोगों ने बर्बरता के एग्जांपल लेकर टैक्स के नाम पर काटे हैं। ये सारे एग्जांपल हैं भाई, हिस्ट्री के एग्जांपल हैं। तो यहाँ सिखाने की ज़रूरत नहीं है कि जो भी राजा हैं, उन्होंने किया। तो तुमने क्या किया, दो कौड़ी के आदमी? तुमने क्या किया है?

जियो शेर

आपके समाज का अगर 1% भी हमारे समाज पर अहसान है तो अत्याचार करने में भी 90% से ज्यादा हमारे समाज के ऊपर आपका ही हाथ है यह भी मत भूलना

इसीलिए राजपूतों को पढ़ने की जरूरत है ये व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी वाला ज्ञान पर रील बना रहे हैं इनको पता नहीं क्या हो गया है भाई पढ़ लिख लो गायकवाड सिंधिया सब एक जाति के थे इनमे कोई राजपूत नहीं था

Funny 😂🤣😂😂🤣🤣😂🤣 Tum kiske bete ho pehle proof karo option 1. Mugal 2. British 3. Mix bread Raja to mar gae . Jo Zinda hai vahi Raja hai . Aur unke paas hawali hai . Aur unko zarurat kyu hai Rajneeti ki. Khud vo log apne behan bhai se ladh rahe mahal ke batwara court case me

To tum yaha kursi pr baithkr kya l@,,, c@@@t rha hai.।। ehsaan na ginva rha hai।।। 😜😜😜

अपना इतिहास नहीं भुलना चाहिए

Tu Rajput nahi hai aur sun ladhke .Ab Constitution hai aur kuch nahi Janta hi Raja hai .

गायकवाड मराठा थे, राजपूत नही।

वाहियात भाषा नहीं?

Are bula inko jitna pesa diya payment kr denge yesan nhi kra

Aachha tum to is desh ke bhi nhi the yha to tribe rahti thik jake padle kuch nhi jaati to yhi rhegi sabki karm hi dilayega sab tumko.

bat to sahi kaha hai bhai but bramanbad se aap logo ka to use kiya karte hai Lekin rajput logo kiyu bhull jate hai apne purwajo or mahapurush ka upkar ke bhuk kar ke brahmano ke bahakawe me na aaya karo bhai

Sahi baat hai

ए लड़के, अब पहले पूरी बात सुन ले। तूने राजपूत राजाओं का उदाहरण दिया। वो राजा थे और उनके राज्य में अलग-अलग जातियों और समुदायों की पूरी प्रजा रहती थी। तुम्हारे बाप-दादा भी उस समय उनकी प्रजा रहे होंगे। इसका मतलब यह नहीं कि तुम उनके रिश्तेदार या उनके व्यक्तिगत वंशज हो। जिस तरह उस समय राजपूत राजाओं की प्रजा में अलग-अलग समाज थे, उसी तरह SC समाज के लोग भी उनकी प्रजा थे। इसलिए किसी राजा के नाम पर आज पूरी जाति को श्रेय देना या पूरी जाति को महान बताना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है। इतिहास का दूसरा पहलू भी देखो। मुगल काल में कई राजाओं ने मुगलों के खिलाफ युद्ध किया, कई हार गए, और कई ने राजनीतिक परिस्थितियों में मुगलों के साथ संधियाँ और वैवाहिक संबंध भी बनाए। हर राजा का फैसला एक जैसा नहीं था। इसलिए न तो हर राजपूत को मुगलों का सहयोगी कहना सही है और न हर राजपूत को मुगलों का सबसे बड़ा विरोधी। फिर अंग्रेजों का दौर आया। उस समय भी भारतीय शासकों और समाजों के अलग-अलग लोगों ने अंग्रेजों के साथ कभी संघर्ष किया, कभी सहयोग किया और कभी राजनीतिक समझौते किए। इसी इतिहास के बीच डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे लोगों ने शिक्षा और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने का काम किया। कुछ राजाओं और सामाजिक नेताओं ने उन्हें शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए सहायता दी। ऐसे सहयोग को याद रखना चाहिए और उससे सीखना चाहिए। और गौतम बुद्ध को भी याद करो। वे शाक्य क्षत्रिय राजपरिवार से थे। उन्होंने राजसी जीवन का त्याग किया और अपने विचारों तथा शिक्षाओं के माध्यम से बौद्ध परंपरा की नींव रखी। बाद में बौद्ध धर्म भारत से बाहर भी व्यापक रूप से फैला। डॉ. आंबेडकर ने भी जीवन के अंतिम चरण में बौद्ध धर्म अपनाया और लाखों लोगों को बौद्ध धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसलिए अगर कोई बुद्ध या बौद्ध धर्म का अपमान करता है, तो उससे मेरा सवाल है— जिस विचार ने दुनिया के इतने बड़े हिस्से को प्रभावित किया, उसके बारे में बोलने से पहले क्या आपने उसका इतिहास पढ़ा है? और सबसे महत्वपूर्ण बात— तुम किसी राजा का उदाहरण देकर SC समाज को यह मत सिखाओ कि किसने किसके लिए क्या किया। आज तुम्हारी जेब में कितने पैसे हैं? तुमने कितने गरीब SC बच्चों की फीस भरी? कितने बच्चों को पढ़ाया? कितनों को स्कॉलरशिप दिलवाई? कितनों को आगे बढ़ाया? सिर्फ इतिहास के नाम पर भाषण देने से समाज आगे नहीं बढ़ता। अगर किसी राजा ने डॉ. आंबेडकर की शिक्षा में सहायता की, तो उससे सीखो—आज तुम भी किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का जिम्मा उठाओ। ज़ुबान खोलने से ताकत साबित नहीं होती। काम करके दिखाओ। किसी बच्चे को पढ़ाओ। किसी गरीब को आगे बढ़ाओ। तभी इतिहास पर बोलने का नैतिक अधिकार मजबूत होगा।

😂😂 ठाकुर साहब जिंदाबाद 🔥

Right

सही बात कही है जी

जब जब तुम जाटव समाज के खिलाफ गए हु,तुम्हारा अच्छे से इलाज किया है पुलिस ने,कार्रवाई लेट करती है लेकिन तुम्हारा इलाज होगा है अच्छे से

😂😂😂😂raaz poot

तेरे पास जेब में कितने पैसे हैं, जो तुमने किसी गरीब SC के बच्चे को पढ़ाया हो? तो अगर राजा ने एक अंबेडकर को पढ़ाया, तो उन्होंने उनसे सीख ली। तो उन्होंने कितने SC के बच्चों को आज पढ़ाकर स्कॉलरशिप दिलवाई या पढ़ाया है? इनमें इतनी ताकत है? ज़ुबान खोलने से नहीं होता है, काम करने से होता है। करके बता अपना

British sasan se Congress ne azadi dilai tumne kya Kiya BJP Chuna, Samrat Ashok ne bhi Hindu dharam chodhke Buddhism ko accept Kiya tha.

#कलयुगमें_सतयुगकी_शुरुआत_भाग8

But vo Rajput tu nahi hai

यह ठाकुर की भाषा है ?

Tu Jodha Akbar ki aulad hai ..... Humko. Na bata. Angrez and mugal sab loot gae tumhara hahaha

राजपूत साहब आप बताईये क्या गलियां एक तरफा दी जा रहीं हैं? नहीं ना, गालियाँ दोनों तरफ से दी जाती हैं। और आप बाबा साहब पर हुए एहसान गिना कर सवर्णों का हौसला बुलंद करना चाहते हो। इतने समझदार हो तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके भाईचारा स्थापित करने की कोशिश कर सकते थे

ब्राह्मण का अहसान👇

Usme teri bhi ma bahen rahi hongi
