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जब बारिश होती है, तो किसान को तो खेत में भीगना ही पड़ता है। मैं भी अपने खेत को देखने आया हूँ। खेत में मैंने मल्चिंग की है और अब हम यहाँ आधे हिस्से में टमाटर तथा आधे हिस्से में शिमला मिर्च लगाने वाले हैं। उसकी तैयारी चल रही...

50,283 次观看 • 1 个月前 •via X (Twitter)

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लुधियाना का नूरपुर बेट गांव एक मिसाल है। यहां वर्षों से पराली नहीं जलाई जाती है। यहां के किसान भाइयों द्वारा स्मार्ट सीडर और एसएमएस सिस्टम युक्त कम्बाइन की मदद से पराली का प्रबंधन किया जाता है। जब यह चलता है तो पराली को जलाने की बजाय उसे खेत में ही समान रूप से फैला देता है। इससे खेत तुरंत बोनी के लिए तैयार हो जाता है। ना पराली जलाने की जरूरत, ना बखरनी करने की। फिर जब स्मार्ट सीडर से बोनी की जाती है तो वह मिट्टी और दाने को कॉम्पेक्ट कर देता है। पराली मिट्टी पर ढक जाती है, जिससे नमी बनी रहती है और जड़ों को मजबूती मिलती है। मैंने ये सब अपनी आंखों से देखा और किसान भाई-बहनों से चर्चा भी की। किसान भाइयों ने बताया कि जहां पहले खेत की तैयारी, पलेवा और बोनी में लगभग पांच हजार रुपये तक का खर्च आता था, वहीं अब केवल पंद्रह सौ रुपये में काम पूरा हो जाता है। पहले पराली जलाकर खेत तैयार किया जाता था, फिर बखरनी, फिर पलेवा। लेकिन अब इस तकनीक से पलेवा की आवश्यकता ही नहीं है। खेत की नमी बनी रहती है, और गेहूं की फसल की जड़ें गहरी और मजबूत होती हैं। ऐसे में न तो फसल आड़ी होती है, न ही दाना पतला पड़ता है। किसान भाइयों ने बताया कि उत्पादन में कोई कमी नहीं आई, बल्कि वृद्धि हुई है। अगर दो साल लगातार इस पद्धति से पराली का प्रबंधन किया जाए तो पराली खुद मिट्टी में मिलकर नाइट्रोजन बन जाती है। इससे यूरिया की आवश्यकता घटती है, मिट्टी की सेहत सुधरती है, और खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इसलिए किसान भाइयों और बहनों से मेरी अपील है कि पराली मत जलाइए। पराली का प्रबंधन कीजिए। मैं भी नूरपुर से प्रेरणा लेकर अपने खेत में डायरेक्ट सीडिंग का यह प्रयोग करूंगा।

Shivraj Singh Chouhan

22,027 次观看 • 10 个月前

मैं अपने पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती कर रहा हूँ। जरबेरा फूल की डिमांड शादी-विवाह और बाकी कार्यक्रमों में बहुत होती है। जरबेरा की अलग-अलग वैरायटी यहाँ लगी हुई है। फूलों की खेती में किसानों से एक निवेदन मैं जरूर करना चाहूंगा कि बहुत ध्यान देने की जरूरत है, रोज ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही पौधे को खराब कर देती है। इधर आप देख रहे हैं पूरे पौधे स्वस्थ हैं, लेकिन इस तरफ आप देखेंगे तो कुछ पौधे उतने स्वस्थ नहीं हैं, इनके पत्ते पीले पड़ गए हैं। आज मैंने खुद देखभाल की है। जिनमें पीले पत्ते हैं, उनको ठीक करेंगे। पौधों को बच्चों की तरह पालना पड़ता है, तब कहीं स्वस्थ और अच्छे पौधे होते हैं। खेती करना, पौधे लगाना यानी जीवन रोपना है। तो उनकी देखभाल भी वैसे ही करनी पड़ती है।

Shivraj Singh Chouhan

37,000 次观看 • 1 个月前

'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के अंतर्गत आज कर्नाटक आया हूं। यहां बेंगलुरु ग्रामीण जिले के हेसरगट्टा में ड्रेगन फ्रूट की खेती देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। इस दौरान मैं मुनिराज जी के खेत भी पहुंचा। वे अपने परिवार सहित ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं। कई युवा प्रोफेशनल्स खेती में बेहतर भविष्य देख रहे हैं और ड्रेगन फ्रूट सहित अन्य गैर-परंपरागत फसलों की खेती से लाभ कमा रहे हैं। IT जॉब छोड़ने वाली नीरजा वालिया जी ने बताया कि खेती से जुड़ना अपनी जड़ों की ओर लौटना है। अत्यंत प्रसन्नता है कि खेती को लेकर युवाओं में रुझान बढ़ रहा है और वे नई तकनीकों के माध्यम से जबरदस्त लाभ भी कमा रहे हैं। #ViksitKrishiAbhiyan

Shivraj Singh Chouhan

188,015 次观看 • 1 年前

मैंने अभी मुख्यमंत्री जी का बयान सुना, मुझे हँसी आ रही है कि मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि जो किसान है वह साल में 20-25 दिन ही काम करता है, बाकी वह फ्री रहता है। बड़े कमाल की बात है अपने आप को किसान का बेटा बताते हैं, किसान परिवार से बताते हैं। एक-एक बात आपको पता है, तो आप यह कैसे कह सकते हैं? वो किसान जो अपनी फसल के लिए पूरा समय लगाता है, आपने कह दिया बुवाई करता है और चार दिन पानी देने जाता है, फिर कटाई कर लेता है। मुख्यमंत्री जी, क्या आपने कभी यह देखा कि वह किसान जो बुवाई करता है, उससे पहले उसे अपने खेत को तैयार करने में कितना समय लगता है? आपने कह दिया कि वह फसल बोने जाता है, तो बोने के बाद उसकी निराई-गुड़ाई कौन करता है? उसके लिए समय कौन देता है? फिर आपने कह दिया कि वह चार दिन पानी देने जाता है। मुख्यमंत्री जी, पानी ऐसे नहीं लगता कि प्रदेश में किसानों को आप रात को बिजली दे रहे हैं इस किसान को रात में पानी देने के लिए ठंड में खड़ा रहना पड़ता है। और आपने कह दिया "कटाई" मुख्यमंत्री जी, कटाई एक ही दिन में हो जाती है क्या ? कटी कटाई हुई फसल अभी खेतों में पड़ी है गेहूं की, और ओलावृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद हो गई। वो आपको नहीं दिख रही l मुख्यमंत्री जी, आप यह समझ रहे हैं कि किसान के एक खेत का काम एक दिन में सारा काम हो जाता है l वह जुताई भी करेगा, बोवाई भी करेगा, निराई-गुड़ाई भी करेगा, पानी भी देगा, कटाई भी करेगा, फसल को इकट्ठा भी करेगा, उसे निकालकर घर भी लाएगा, मंडी में भी लेकर जाएगा, और तुड़े को भी घर में इकट्ठा करेगा l इसमें केवल किसान नहीं, इसमें उसका पूरा परिवार लगता है। छोटे-छोटे बच्चे खेतों में जाकर अपने माता-पिता की मदद करते हैं। और उसके बाद पूरी फसल किसके लिए छोड़ देगा, उसकी रखवाली नहीं करेगा ? रात को वहां सोता है, उसकी रखवाली करता है, फसल का ध्यान रखता है l मुख्यमंत्री जी, ऐसा लग रहा है आप किसान किसान ऐसे ही कर रहे हैं आपको किसानी की पूरी बात ही नहीं पता l

Tika Ram Jully

33,392 次观看 • 4 个月前