Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

जब लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ढाल बन कर खड़े हो गए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव🔥 अखिलेश यादव— अगर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो बतायें किसके ऑर्डर से पुलिस ने बच्चों, छात्रों और नौजवानों के...

32,146 просмотров • 20 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 0

Нет доступных комментариев

Здесь появятся комментарии из оригинального поста

Похожие видео

गजब का दोगलापन है भाई एक पुलिस वाला अपने बचाव में अगर हवाई फायरिंग कर रहा है तब वह अखिलेश यादव की नजर में गलत है लेकिन अखिलेश यादव का प्यारा दुलारा मुख्तार अंसारी अगर मऊ दंगे के दौरान जिप्सी की छत पर बैठकर खुलेआम AK-56 लेकर 17 हिंदुओं को मारा तब वह गलत नहीं है तब अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के लिए आंसू बहाते हैं और यह दंगा मुख्तार अंसारी ने सिर्फ इसलिए भड़काया था ताकि हिंदू रामलीला और भारत मिलाप का त्यौहार का आयोजन न कर सके और इस तरह से खुलेआम जिप्सी पर AK-56 लेकर घूमता था सबसे पहले हत्या राम प्रकाश यादव नामक एक युवक की की थी और इस दंगे में 17 हिंदू मारे गए थे जिसमें से 14 तो यादव समुदाय के थे लेकिन फिर भी मुलायम सिंह ने और समाजवादी पार्टी ने यादवों का साथ इसलिए नहीं दिया कि कहीं मुसलमान नाराज ना हो जाए और मुख्तार अंसारी को हिंदुओं को और यादव लोगों का कत्ल करने का खुली छूट दे दिया था और यह सत्य है कि वैसे तो समाजवादी पार्टी कहती है कि हम यादव जी लोगों की पार्टी हैं लेकिन जब भी किसी दंगे में या झगड़े में या विवाद में दूसरा पक्ष मुस्लिम होता है तब समाजवादी पार्टी यादव जी लोगों से कहती है कौन है आप ? हम तो आपको पहचानते नहीं और फिर समाजवादी पार्टी मुसलमानो के साथ खड़ी हो जाती है मथुरा में लस्सी विक्रेता भारत यादव का हत्या इसका उदाहरण है मात्र ₹20 मांगने पर मुसलमानो ने भरत लाल यादव की पीट-पीटकर हत्या कर दिया था अखिलेश यादव न तो भरत लाल की विधवा पत्नी और दो प्रमोद बच्चियों से मिलने गए ना कोई मदद किया और ना ही अपने पार्टी के किसी सदस्य को भेजा क्योंकि अखिलेश यादव डर रहे थे कि कहीं मुस्लिम नाराज ना हो जाए

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

52,180 просмотров • 1 месяц назад

#WATCH दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, "आज जिस प्रकार से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कृत्य किया है वो पूरी तरह से अशोभनीय है निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं ये उनके व्यवहार में दिखा। मेरा मानना है कि लोकतंत्र में विरोध और अराजकता दोनों अलग-अलग शब्द है। विरोध जब मर्यादा की हदों को पार कर जाती है वो अराजकता बन जाती है। राहुल गांधी अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय जीवन में हमारे कुछ ऐसे पद होते हैं जो पार्टी विशेष के नहीं होते। प्रधानमंत्री केवल एक पार्टी के नेता नहीं है 140 करोड़ देशवासियों के चुने हुए जन प्रतिनिधि हैं। जिनको पूरे देश की जनता आस्था और विश्वास का केंद्र मानती है। आज उनके आवास पर जिस प्रकार का अराजकता फैलाने का प्रयास राहुल गांधी ने किया है। ये स्पष्ट संदेश देता है कि ये विरोध की राजनीति नहीं अराजकता वादी राजनीति के परिचायक बनते जा रहे हैं।"

ANI_HindiNews

21,957 просмотров • 2 месяцев назад