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जय लंकेश कटे कलेश।
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9 Comments

दश सिर वाला रावण बुद्ध, राम की गपोड कहानी में जोड़ा गया है बल्कि बुद्ध की जातक कथाओं में बुद्ध का ही एक नाम व रूप दशबल है जिसके दस सिर हैं, तो किसी को अगर रावण के किरदार से दिक्कत है तो वह राम के काल्पनिक नाम से जुड़ा रहे हमे उसकी कल्पनाओं की कथाओं से क्या लेना,

भीमटो रावण किन शास्त्रों में विद्वान था ?

मूर्ख अंबेडकरवादी आज रावण को अपना बाप बनाए घूम रहे है। लेकिन किस आधार पर मूर्खों का बाप हुआ। 1- रावण श्री लंका का मूलनिवासी था भारत का भी नहीं 2- ना ही भीमटो के उत्थान में कोई कार्य किया 3- सविधान का विद्वान भी नहीं बल्कि वेदों का विद्वान था 4 - रावण का सविधान की रचना में कोई योगदान नहीं था बल्कि अरुण संहिता, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर और रावणीयम आदि पुस्तकों की रचना की थी

ये क्या है? पाखंडवाद!!

चलो तुम लोगों ने ब्राह्मण को अपना आदर्श तो माना.!! सच्चाई भी यही है कि ब्राह्मण श्रेष्ठ ही होता है..!! अब तुम्हारे जैसे लोगों को जय ब्राह्मण का नारा भी लगाना चाहिए, तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जायेंगे..!! भीमटों...तो बोलो जय ब्राह्मण देवता की..!!

रावण तो ब्राह्मण था मनुवाद का घोर समर्थक था , अच्छा है रावण से ही कुछ सिख लो ।

@AnkitaP79003861 ये सब क्या है 😂

Manana hi hai to samrat ashok Vijaya Dashami manao. Dhammachakra Pravartan Din manao. Ye kya hi chutiyapa hai. Mere to samajh se pare hai ye sab pakhand

लंकेश दलित नहीं ब्राह्मण थे, आज ये सारा दलित समाज ब्राह्मण के कदमो को क्यों चूम रहा है...?
