Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

जैसे एक 'परिवार' का मुखिया, अपने 'परिवार' का ख्याल रखता है. दिल्ली वासियों.. मैं 'परिवार' की तरह आपका ख्याल रखूंगा. - नरेंद्र मोदी की बात सुनकर दिल्ली वालों ने ताली बजाई

51,966 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 0

Нет доступных комментариев

Здесь появятся комментарии из оригинального поста

Похожие видео

दिल्ली के शकूरपुर इलाके में एक मामूली विवाद के बाद एक मुस्लिम परिवार पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब उन्होंने अपनी दुकान के दरवाजे के सामने खड़े एक रिक्शे को हटाने के लिए कहा। आरोप है कि इस बात को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में बढ़कर हिंसक झड़प में बदल गई। परिवार का कहना है कि कुछ लोग उनके घर तक पहुंच गए और वहां मारपीट की घटना को अंजाम दिया। परिवार ने आरोप लगाया है कि बीच-बचाव करने आए बुजुर्ग पिता और एक गर्भवती महिला के साथ भी मारपीट की गई। पीड़ित परिवार का दावा है कि हमलावरों में कुछ लोग कथित तौर पर बजरंग दल से जुड़े हुए थे। हालांकि, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Millat Times

11,156 просмотров • 4 месяцев назад

बजरंग दल के गुंडों ने किया मुस्लिम परिवार पर हमला , प्रेग्नेंट महिला को भी नहीं छोड़ा और दी बलात्कार की धमकी ,, 01-06-2026 दिल्ली के शकूरपुर में एक मुस्लिम परिवार पर हमला हुआ। बताया जाता है कि रिक्शा का रास्ता रोकने जैसी मामूली बात पर झगड़ा शुरू हो गया। युवक ने दुकानदार को गाली दी और उसका सामान उलट दिया। पीड़ित ऊपर की मंजिल पर भागा, लेकिन भीड़ ने उसका पीछा किया, उसे नीचे घसीटा और बुरी तरह पीटा। जब उसके पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो उन्हें भी पीटा गया। एक गर्भवती महिला पर भी हमला किया गया। आरोप है कि हमलावर बजरंग दल से जुड़े थे। परिवार का आरोप है कि 15-20 लोगों ने गर्भवती महिला पर हमला किया और उन पर हमला करने के साथ-साथ बलात्कार की धमकी भी दी।

TANVIR RANGREZ

39,384 просмотров • 4 месяцев назад

"रकवा तुम्हारे बाग का मीलों हुआ तो क्या, रकवा तुम्हारे दिल का दो इंच भी नही" #अलीगढ़ में रत्ननेशपुरम् अरबपतियों की कालोनी है. इसी में एक परिवार के 4 भाईयों के हिस्सेदारी वाली एक आलीशान कोठी है. सबसे बड़े भाई रविन्द्र सचदेवा बाकी 3 भाईयों के साथ एक्सपोर्ट बिजनैस में थे. दो भाई NCR में और एक मुरादाबाद में सैटल है. 2012 तक रविन्द्र जिस पैतृक घर में रहते थे, भाईयों ने उसे बेच दिया. 40 लाख देना था, नही दिया. रविन्द्र दिल्ली चले गये, बेटे की नौकरी से गुजारा चल रहा था. 2022 से एक्सपोर्ट बिजनेस से मिलने वाला खर्च बंद कर दिया. बेटे की नौकरी छूट गयी. परिवार के पास इतना पैसा नही कि सचदेवा दम्पत्ति बेटा और एक जवान बेटी का खर्च उठा सके. परिवार दिल्ली से लौटकर अलीगढ़ में एक किराये के मकान में रहने लगा. अब किराये का घर खाली हो गया तो इस कोठी में रहने के लिए आये. मगर भाईयों ने कोठी पर ताला डाल दिया. 5 दिन से परिवार खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है. पड़ौसी सुबह-शाम का खाना दे रहे है.

Narendra Pratap

162,490 просмотров • 7 месяцев назад