Video wird geladen...

Video konnte nicht geladen werden

Zur Startseite

जिस बिल्डिंग पर प्लेन हुआ क्रैश, देखिये वहां की ताजा स्थिति ◆ देखिये न्यूज 24 संवाददाता भूपेंद्र सिंह ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट #AirIndia | #Ahemdabad | Boeing विमान टेक | #AhemdabadPlaneCrash

11 Kommentare

Profilbild von GABBAR🇮🇳
GABBAR🇮🇳vor 1 Jahr

news24 ke reporter ki tabiyat thik nhi lg rhi plz innhe hospital lejaya jay ...

Profilbild von Bluntdeep
Bluntdeepvor 1 Jahr

पत्रकार की सांस फूल रही है सीढ़ियां चढ़ने से, फिटनेस पे ध्यान दें, कही ऐसा न हो जहां विमान यात्री गए आप भी वहीं पहुंच जाएं। धन्यवाद। कल सुबह खाली पेट लिपिड प्रोफाइल का टेस्ट करवा लें। धन्यवाद।

Profilbild von Rohan Gholap 📈 🇮🇳
Rohan Gholap 📈 🇮🇳vor 1 Jahr

Bhai, pahile tu tera khayal rakh.. tu hi bimar lag raha hai.

Profilbild von sanjay kr
sanjay krvor 1 Jahr

अच्छे ख़ासे आराम से खड़े हो- साँसें सुनाकर सेंसेशन पैदा करने से समाचार प्रभावित होता है- बरक्स इसके साफ़ संकुल गंभीर सधी रिपोर्टिंग संवेदनशील होती? पाँच मिनट के लिए पट्ठा खोल लेते दर्द बढ़ जाता क्या इसके सामने?

Profilbild von Seven Eleven Records
Seven Eleven Recordsvor 1 Jahr

🌟 New Album Alert! 🌟 Dive into the dreamy vibes of Lost in Bedroom Pop. Let the melodies wrap around your soul. 🎶✨⬇️ #NowPlaying ⬇️

Profilbild von Anup
Anupvor 1 Jahr

Reporter is not at all have pity on such reporters plz news chnnel dhyan rkhe grmi bhut h

Profilbild von GeeBee's
GeeBee'svor 1 Jahr

इसको कोई हस्पताल में भर्ती करवाओ, इसकी सांसे अटक रही है, सांस फूल रही हैं

Profilbild von Ashok Shekhawat 🇮🇳
Ashok Shekhawat 🇮🇳vor 1 Jahr

यह प्लेन क्रेश में हवाई यात्रीयों के अलावा और लोग भी मारे गए है। यह गंभीर हादसे की जांच होनी चाहिए। यह घटना की जबावदेही तय होनी चाहिए।

Profilbild von Ankit Sharma
Ankit Sharmavor 1 Jahr

This is good reporting, alteast he is bringing fresh aspect of the incident to the table not like other foolish channels running same non sense commentary…

Profilbild von Shahrukh Qureshi
Shahrukh Qureshivor 1 Jahr

आग लग रही है तो बुझा ना जाकर चादरमोड , न्यूज़ के लिए आग के नहीं बुझा रहा

Profilbild von Raju sarswat
Raju sarswatvor 1 Jahr

चैनल ने साँसो के उतार चढ़ाव का बेकग्राउंड म्यूजिक दिया है या रिपोर्टर को लाइव एक्टिंग भी करनी होती है क्योंकि मेहनत का काम तो नज़र नहीं आ रहा जो साँसो की आवाज भी आ रही है 🙏

Ähnliche Videos

Brazil के पम्पुलहा हवाई अड्डे से उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद एक हवाई जहाज के भीतर धमाका हुआ और आग लग गई. विमान को एक 29 वर्षीय पायलट उड़ा रहा था. एक मेंटेनेंस यात्रा के लिए पायलट ने अकेले ही उड़ान भरी थी. प्लेन क्रैश होने की स्थिति में था लेकिन पायलट ने घबराने की बजाय विमान में मौजूद आपातकालीन CAPS सिस्टम की डोरी खींच दी. इस सिस्टम ने एक छोटे रॉकेट की मदद से विमान की छत से सीधे पूरा पैराशूट बाहर की तरफ खोल दिया. पैराशूट की वजह से विमान तेज रफ्तार से नीचे गिरने के बजाय धीमी और नियंत्रित गति से ज़मीन की तरफ आने लगा. ज़मीन से टकराने के बाद विमान पूरी तरह जल गया, लेकिन धीमी स्पीड से लैंड होने के कारण केबिन सुरक्षित रहा और पायलट मामूली चोटों के साथ ज़िंदा बच गया. CAPS तकनीक की खासियत ये होती है कि यह सिस्टम सैनिटरी या मिलिट्री इजेक्शन सीट की तरह काम नहीं करता, जहाँ पायलट प्लेन से बाहर कूदता है. बल्कि इसमें एक रॉकेट की मदद से पूरे हवाई जहाज़ का ही बड़ा पैराशूट खुल जाता है. इससे यात्री केबिन के भीतर ही पूरी तरह सुरक्षित रहते हुए विमान के साथ धीरे-धीरे ज़मीन पर आ जाते हैं.

Ruby Arun रूबी अरुण

333,881 Aufrufe • vor 19 Tagen

अजीत दादा जिस एयरक्राफ्ट के क्रैश होने की वजह से मरे हैं मैं उसी को इनवेस्टिगेट कर रहा था। जिस विमान LEARJET 45XR ने उनकी जान ली वो तो मुंबई एयरपोर्ट पर महज दो साल पहले सितंबर 2023 में बुरी तरह से दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। जिसमें तीन लोग घायल हुए थे। उसकी रिपोर्ट नीचे है। तमाम खामियों के शिकार इस सीरीज के विमान को फिर से उड़ान की अनुमति कैसे दी गई? किसने दी? डीजीसीए क्या कर रहा था? जो जानकारी मिल रही है कि जिस ऑपरेटर VSR VENTURES का यह जहाज है वह पुराने रद्दी किस्म के विमानों को वीवीआईपी ड्यूटी में लगवाती रही हैं। दिल्ली के महिपालपुर में इसका ऑफिस है। कई बार फोन कर चुका है न इसका मालिक कैप्टन रोहित सिंह अपना मोबाइल उठा रहा न इसके ऑफिस का कोई बंदा फोन उठा रहा। अजीत दादा के मौत की सही जांच बहुत जरूरी है।

Awesh Tiwari

402,578 Aufrufe • vor 7 Monaten

बड़ी ख़बर- पंकज चौधरी के चयन से योगी आदित्यनाथ के इकोसिस्टम में हाहाकार! योगी आदित्यनाथ के प्रचंड समर्थक पत्रकार प्रदीप सिंह को सुनिए। चेहरा इस कदर उतरा हुआ है जैसे दूध और पत्ती की कमी से चाय का रंग फीका नज़र आए। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पंकज चौधरी के चुनाव को लेकर इतना आक्रोशित हैं, जितना कि नेपाल की ज़ेन जी भी केपी शर्मा ओली की सरकार से नहीं रही होगी। सुनिए क्या कह रहे हैं- "कह रहे हैं कि पंकज चौधरी सिर्फ योगी विरोधी होने के नाते प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। कह रहे हैं कि कुएं के मेढ़क को समंदर के पानी में उतार दिया गया है।” संभवत:प्रदीप सिंह ने पिछले 24 घंटों के भीतर ही देश के सारे रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों के रजिस्टर भी चेक कर लिए हैं। “बता रहे हैं कि पंकज चौधरी सिदार्थ नगर के आगे कहीं जाते नहीं हैं।" प्रदीप सिंह योगी आदित्यनाथ के भूतपूर्व मीडिया एडवाइजर मृत्युंजय सिंह के गुरु भी हैं। वे योगी आदित्यनाथ को लेकर इस कदर कमिटेड हैं कि उनके समर्थन में ब्रजेश पाठक, केशव मौर्या और भूपेंद्र चौधरी से लेकर जेपी नड्डा तक को धो पोछकर सुखा चुके हैं। अपने आक्रोश की अरगनी पर उल्टा फैला चुके हैं। ब्रजेश पाठक को आस्तीन का सांप, भूपेंद्र चौधरी को पंचायत चुनाव तक न जीत सकने वाला नेता, केशव मौर्या को विघ्नसंतोषी, और जेपी नड्डा को गढ्ढा तक करार दे चुके हैं। वो तो गनीमत है कि डोनाल्ड ट्रंप ने योगी आदित्यनाथ के बारे में कभी कोई टिप्पणी नहीं की, वरना वे भी इस कदर रेले जाते कि अमेरिका में नेशनल इमरजेंसी की स्थिति आ सकती थी। अब वे पंकज चौधरी पर फायर हैं। केंद्र सरकार को तत्काल प्रभाव से पंकज चौधरी की सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए। Narendra Modi PMO India Amit Shah गृहमंत्री कार्यालय, HMO India Yogi Adityanath

abhishek upadhyay

71,315 Aufrufe • vor 9 Monaten

जिस प्रकार की बातें इंडी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी कर रही हैं, वह चोरी की बात नहीं, बल्कि पुरानी कहावत चोर मचाए शोर वाला काम कर रहे हैं। वास्तविक अर्थों में, भारत विरोधी शक्तियों के साथ मेलजोल के शक के दायरे में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के लोग पहले से ही रहे हैं। विदेश जाकर भारत विरोधी एनजीओ और भारत विरोधी नेताओं से मिलने के प्रमाण राहुल गांधी जी के खिलाफ पहले से मौजूद हैं। विदेशों में आप भारत के लोकतंत्र में हस्तक्षेप की बात करते हुए देखे जा चुके हैं। अब विदेशी घुसपैठियों के जरिए भारत के लोकतंत्र पर डाका डालने का प्रयास इंडी गठबंधन द्वारा किया जा रहा है। कितनी ही बार झूठ बोलते हुए राहुल गांधी देश की जनता के सामने एक्सपोज हो चुके हैं। एयर चीफ मार्शल ने कहा था कि हमने पाकिस्तान के 6 विमान गिराए थे, लेकिन ये पूछते थे कि भारत के कितने विमान गिराए गए थे? भारत–पाकिस्तान सीजफायर को लेकर इन्होंने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान सही है कि जो तथाकथित सीजफायर हुआ था, वह ट्रेड डील की वजह से था। लेकिन अब यह साबित हो चुका है कि कोई डील नहीं हुई थी। और जिस इकॉनमीको आप डेड इकोनॉमी कहने से नहीं हिचकते, वह आपकी मानसिक स्थिति को दर्शाती है। वहां महात्मा गांधी थे, जिनका सत्य के साथ प्रयोग था; और यहां राहुल गांधी जी हैं, जिन्हें असत्य का भयानक रोग है। नई दिल्ली में प्रेस संबोधन : -

Dr. Sudhanshu Trivedi

27,668 Aufrufe • vor 1 Jahr

कांग्रेस के बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति कथित प्रेम की असलियत जानने के लिए आप इंडिया टीवी की यह रिपोर्ट देख सकते हैं। यह रिपोर्ट 2013 और फिर जनवरी 2014 में दो बार नागपुर के चिंचोली में स्थित बाबा साहेब अंबेडकर संग्रहालय से की गई थी। इस संग्रहालय में माई साहेब, यानी बाबा साहेब की धर्मपत्नी सविता अंबेडकर द्वारा दी गईं 400 बहुमूल्य निशानियां जर्जर हालत में पड़ी थीं। वहां की स्थिति देख कोई भी दंग रह जाता। बाबा साहेब का वह कोट, जिसे आपने उनकी अधिकतर तस्वीरों में देखा होगा, दीमकों के हमले से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। उनकी टाई, वेस्टकोट, कमीज, पैंट और शेरवानी सभी कटे-फटे और चिथड़ों की हालत में थे। माई साहेब और बाबा साहेब की तस्वीरें भी पूरी तरह खराब हो चुकी थीं। जिस टाइपराइटर से उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया था, वह धूल खा रहा था। माई साहेब की इच्छा के अनुसार, बाबा साहेब के पीए नानक चंद रत्तू ने इस म्यूजियम की स्थापना की थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस बदहाल स्थिति की जानकारी कांग्रेस की तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार, दोनों को थी। बावजूद इसके, किसी ने कुछ नहीं किया। नेशनल म्यूजियम, जो केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आता था, हर सरकारी चिट्ठी में इस दुर्दशा का उल्लेख करता रहा और मरम्मत के लिए मदद मांगता रहा। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उनकी चिट्ठियों में स्पष्ट लिखा गया था कि संग्रहालय में रखी गईं निशानियां दीमक, कीड़े-मकोड़ों और फफूंदी से नष्ट हो रही हैं और उन्हें तत्काल केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। यहां तक कि संग्रहालय ने सिर्फ एक एसी की मांग की थी ताकि तापमान को नियंत्रित रखा जा सके, लेकिन वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी बीच, केंद्रीय समाज कल्याण मंत्रालय ने भी एक चिट्ठी लिखकर चिंता जताई थी कि इन बहुमूल्य वस्तुओं को संरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन यह चिंता केवल कागजों तक सीमित रही। हालात तब और बदतर हो गए जब 2 जनवरी 2014 को पुरातत्व विभाग की औरंगाबाद शाखा ने संग्रहालय के संचालकों को चिट्ठी लिखकर 6,73,165 रुपये जमा करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि के भुगतान के बाद ही इन वस्तुओं को बचाने का कोई प्रयास किया जाएगा। इस मुद्दे पर नागपुर के तत्कालीन कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने दोष महाराष्ट्र सरकार पर मढ़ा, लेकिन यह भूल गए कि उस समय महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। उनका बयान भी इस रिपोर्ट में दर्ज है। इस रिपोर्ट के बाद हंगामा मच गया। आखिरकार, छह महीने बाद पैसा रिलीज हुआ और संग्रहालय की मरम्मत शुरू हो सकी। यह है बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस की असलियत।

Amit Malviya

33,053 Aufrufe • vor 1 Jahr

मुरादाबाद के डीआईजी अशोक कुमार की मोब लिंचिंग के 16 आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई पुलिस छेड़छाड़ के आरोपी को पकड़ने गई थी, इसी बात से गुस्साए जिहादी तत्वों ने ना केवल थाने में आग लगा दी थी बल्कि जिले के पुलिस कप्तान को भी लगभग मार डाला था। आप समझते हैं एक जिले के पुलिस कप्तान का मतलब ? जिले के हजारों पुलिसकर्मियों का बॉस। जिसके कहने से जिले की पुलिस चलती है। लेकिन उसे भी दंगाइयों की भीड़ ने पीट पीटकर लगभग मार डाला था। छेड़छाड़ के आरोपी को छुड़ाने के लिए शातिर अपराधियों ने चिर परिचित दांव खेला। उन्होंने अफवाह फैलाई कि पुलिस ने आसमानी किताब को फाड़ दिया है। जॉम्बीज की भीड़ इकट्ठा करने का यह सबसे आसान तरीका है। हजारों हत्यारों की भीड़ इकट्ठा हुई और मैनाठोर थाने पर हमला कर दिया। वहाँ उपस्थित पुलिसकर्मियों को पीटा, फिर थाने में आग लगा दी। समझते हैं थाने में आग लगाने का मतलब ? आम हिन्दू चाहे शहरी या ग्रामीण, उसे अगर चौकी भी बुला लिया जाये तो टांगे कांप जाती हैं। यहाँ भीड़ ने थाने को फूंक दिया। इस खबर को सुनकर जिले के एसएसपी DIG और डीएम मौके पर पहुंचे। एसएसपी आग लगाने वाली जॉम्बीज की भीड़ से लाउडस्पीकर पर शांति की गुहार लगाने लगे। इतने में ही भीड़ ने पथराव कर दिया। यहां आप एक और बात सोचिए कि इतनी बड़ी भीड़ के पास इतनी ज्यादा संख्या में पत्थर कहाँ से आ जाते हैं ? खैर पथराव हुआ तो जिलाधिकारी राजशेखर ने गाड़ी घुमाई और मैदान छोड़कर भाग गये। पुलिस कप्तान के साथ आई टीम ने समझा कि एसएसपी और DIG अशोक सिंह भी डीएम के साथ निकल लिए तो वह टीम भी भाग निकली। फिर समझिये, 2 पुलिस वाले खाली डंडा लेकर भी आये तो हिन्दुओ की सैंकड़ो की भीड़ तितर बितर हो जाती है और यहाँ पुलिस को भागने को मजबूर होना पड़ा। खैर, जिहादियों की भीड़ ने DIG को पकड़कर पीटना शुरू किया। पुलिस कप्तान किसी तरह जान बचाकर पास के पेट्रोल पंप पर छिप गये। लेकिन जोम्बी भीड़ पर खून इस कदर सवार था कि पेट्रोल पंप की दीवार तोड़कर भीतर घुस गये। फिर DIG को पीटा, जिसके हाथ जो लगा उसी से पीटा। सरिये से मारा, डंडे से मारा, ईंट से कुचला हाथों से, लातों से मारा। आप यह देखिये कि DIG 2 घण्टे तक वहाँ फंसे थे। जब भीड़ को लगा कि DIG अशोक सिंह मर गये तो उन्हें और एक दरोगा रवि कुमार को मरा समझकर छोड़ा गया। 2 घण्टे के बाद पूर्व डीजीपी बृजलाल फोर्स लेकर पहुंचे तब जाकर कप्तान को निकाला गया। इसके बाद एक महीने तक मुरादाबाद के अस्पताल में अशोक सिंह भर्ती रहे, वहाँ से महीने के बाद दिल्ली एम्स में भेजना पड़ा। यहाँ भी महीनों इलाज चला। आज अशोक सिंह ADG हैं। इस घटना को 15 साल हो गये। 15 साल बाद कोर्ट ने 16 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी है। समझते हैं, 15 साल। किसको इंसाफ मिलने में 15 साल लगे ? एक आईपीएस अधिकारी को। क्यों ? कानून व्यवस्था अलग बात है, इसके अलावा दूसरा पक्ष है राजनीति। जिस तरह से सपा में दंगाइयों का गॉडफादर आजम खां हुआ करता था वैसे ही बसपा में दंगाइयों का गॉडफादर था नसीमुद्दीन सिद्दीकी । बसपा के शासन में हुई इस घटना के आरोपियों को भी कई साल तक राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा। पहले बसपा और फिर सपा। पुलिस में काम करने वाले लोगों के लिए यह सबक होना चाहिए कि राजनीति ने कैसे एक कप्तान को भी न्याय मिलने में इतना लंबा समय लगा दिया। आज भी अगर भाजपा की सरकार ना होती तो शायद मामला लटका रहता और जिहादियों को खुश करने के लिए सपा-बसपा मामले की लीपापोती करवा देती। इसलिए भाजपा जरूरी है। हर व्यक्ति के लिए। चाहे वह आम नागरिक है या पुलिस-प्रशासन का कोई व्यक्ति।

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

32,085 Aufrufe • vor 5 Monaten

आदरणीय CP Noida मैम, POLICE COMMISSIONERATE GAUTAM BUDDH NAGAR UP POLICE DCP Central Noida, निवेदन है कि चौकी इंचार्ज द्वारा इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई न करके मामले को दबाने अथवा लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है। हम सभी नागरिकों को CP Noida मैम, आप पर पूरा विश्वास है कि आप इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाकर सत्य के आधार पर उचित एवं सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश देंगी। पीड़ित की पीड़ा: “दिनांक 19 जुलाई 2026 को हुई मारपीट की घटना में गंभीर कान की चोट, पुलिस एवं चिकित्सीय लापरवाही तथा निष्पक्ष जांच एवं न्याय हेतु प्रार्थना। माननीय पुलिस आयुक्त महोदया, सविनय निवेदन है कि दिनांक 19 जुलाई 2026 को मेरे साथ गंभीर मारपीट की घटना हुई, जिसके परिणामस्वरूप मुझे गंभीर शारीरिक चोटें आईं, विशेषकर मेरे बाएं कान में गंभीर क्षति हुई। घटना के पश्चात पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, थाना पहुंचने पर मेरी चोटों की गंभीरता को समझे बिना दोनों पक्षों को लॉकअप में बंद कर दिया गया। मैंने बार-बार पुलिसकर्मियों को बताया कि मुझे अत्यधिक दर्द हो रहा है तथा मेरे बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा है, इसलिए तत्काल चिकित्सा सहायता और मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता है। काफी अनुरोध के बाद मुझे बिसरख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉ. अमित कुमार टोंक द्वारा प्राथमिक परीक्षण किया गया। मैंने डॉक्टर को स्पष्ट रूप से बताया कि मुझे बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा है तथा कान के अंदर लगातार सीटी जैसी आवाज आ रही है। मैंने ईएनटी विशेषज्ञ के पास रेफर करने का अनुरोध किया, किंतु अस्पताल में विशेषज्ञ एवं आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात कहकर मुझे जिला अस्पताल, सेक्टर-39, नोएडा जाने की सलाह दी गई। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मामले को MLC बताते हुए रेफरल लेटर की मांग की। जब मैंने इस संबंध में थाने के एसआई राहुल से सहायता मांगी, तो मेरी गंभीर स्थिति को संवेदनशीलता से लेने के बजाय उन्होंने मेरी शिकायत को हल्के में लेते हुए कहा कि मैं “राई का पहाड़ बना रहा हूं” और सामान्य ओपीडी में उपचार कराने की सलाह दी। इसके बाद भी मुझे रेफरल उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण मुझे अस्पताल और थाने के बीच बार-बार भटकना पड़ा। अंततः मैंने स्वयं ओपीडी पर्चा बनवाकर जिला अस्पताल में जांच कराई। जांच के दौरान चिकित्सक ने स्पष्ट रूप से बताया कि मेरे बाएं कान का पर्दा (Eardrum) फट चुका है तथा कान के अंदर रक्त जमा हुआ है। चिकित्सक ने भविष्य में ऑपरेशन की संभावना भी व्यक्त की तथा आगे की विस्तृत जांच के लिए मुझे अली यावर जंग अस्पताल, सेक्टर-12, नोएडा रेफर किया। अली यावर जंग अस्पताल में कराए गए सभी परीक्षणों में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि मेरे बाएं कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तथा मुझे Hearing Loss हुआ है। चिकित्सकों ने कान का पर्दा फटने और अंदर रक्त के पैच होने की पुष्टि भी की। सभी मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उन्हें थाने में जमा कर दिया गया। इसके पश्चात लगभग चार-पांच दिन बाद जांच अधिकारी श्री सुनील कुमार के साथ संबंधित अस्पताल में रिपोर्टों का सत्यापन भी कराया गया, जहां चिकित्सक ने जांच अधिकारी के समक्ष भी मेरे कान का पर्दा फटने तथा अंदर रक्त के पैच होने की पुष्टि की। इतने गंभीर एवं स्पष्ट चिकित्सीय प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद आज तक इस मामले में कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। घटना को कई दिन बीत जाने के बावजूद मुझे न्याय दिलाने के बजाय लगातार थाने और अस्पतालों के चक्कर लगाने के लिए विवश किया जा रहा है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय से वंचित करने का प्रयास प्रतीत होती है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब जिस अस्पताल में मेरी जांच हुई थी, वहां से मुझे पुनः जांच करवाने हेतु फोन किए जाने लगे। इससे मुझे आशंका है कि पहले से सत्यापित मेडिकल रिपोर्टों को प्रभावित करने, कमजोर करने अथवा संदेह के घेरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपियों की प्रभावशाली पहुंच के कारण पूरे मामले को दबाने एवं निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मेरे कान का पर्दा फट चुका है, मेरी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तथा भविष्य में ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा समय पर उचित धाराओं में कार्रवाई न करना, उपलब्ध मेडिकल प्रमाणों के बावजूद मामले को लंबित रखना तथा एक पीड़ित को लगातार भटकाना अत्यंत गंभीर विषय है।” CP Ma'amपर मुझे पूरा भरोसा हैं कि इस मामले मैं निष्पक्षता से कार्यवाही कर उचित न्याय दिलाएंगी। भवदीय, जयप्रकाश शर्मा मोबाइल: 9910693312

Abhishek Kumar

37,811 Aufrufe • vor 1 Monat

आज एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की- राज्य सरकार के गुजरात में प्रशिक्षण के लिए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में : ये देखिए पूरी सरकार तमाम मंत्रिमंडल ही नहीं मुख्यमंत्री सहित दोनों डिप्टी सीएम,तमाम विधायक सत्ता पक्ष के,पूरा खाली कर दिया राजस्थान को, वैसे राजस्थान की स्थिति ऐसी बन गई है यहां हत्याएं हो रही हैं लगातार एक के बाद एक, एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं आत्महत्याएं हो रही हैं ,इस माहौल में राजस्थान चल रहा है। गर्मी बढ़ने लग गई है तो पानी की किल्लत हो रही है, बिजली की मांग हो रही है, समस्याओं से घिरा हुआ राजस्थान है मेरे हिसाब से तो,और करप्शन की तो हदें पार हो गई हैं। करप्शन की हदें पार हो गई हैं अगर 10 करोड़ रुपए की कोई रिश्वत दे रहा है इसके मायने हैं कि वहां कितना अवैध खनन हो रहा होगा। अगर 10 करोड़ की ऑफर की हुई है, बारगेनिंग हुई है कम ज़्यादा की, सच्चाई क्या है वो तो एसीबी जाने, पर 10 करोड़ की रिश्वत का अगर लेन देन होने का अगर मान लीजिए वहां पर सौदा हुआ है इसका मतलब कितना बड़ा अवैध खनन हो रहा है, कितना नुकसान हो रहा है राजस्थान सरकार को रेवेन्यू को लेके। तो चारों ओर की स्थिति ऐसी बन गई है उस में आप जा रहे हो वहां पर प्रशिक्षण लेने के लिए देने के लिए, डेढ़ साल के बाद में ! डेढ़ साल तक इसका मतलब आपकी सरकार निकम्मी साबित हुई,नकारा रही, कुछ काम नहीं किया। इसलिए आप जो है डेढ़ साल के बाद में अब आप प्रशिक्षण लेंगे वहां पर। वो क्या तुक है वहां पर ? डेढ़ साल में बिल्कुल किए ही नहीं हैं आपने कुछ भी नहीं किए हैं तो अब प्रशिक्षण ले रहे हो आप इसलिए मैने कहा कि ये क्या हो रहा है। मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है : मेरी आलोचना जो है वो आलोचना के साथ साथ सलाह भी होती है। मेरा अपना अनुभव है तो मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं चाहे सत्ता पक्ष हो चाहे विपक्ष हो, अगर मैं बात कहूं खाली आलोचना करने के लिए नहीं कहूं बल्कि उसमें सलाह भी होती है। अब समझने वाला समझता है अलग बात है डिपेंड करता है कि वो क्या समझते हैं वो उनके ऊपर है पर मेरी इच्छा कि मैं कोई बात कहूं आलोचना करूं, तो साथ में कुछ सलाह भी दूं मैं। मैं कम से कम 100 साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए इसलिए मैंने कहा। अब मुख्यमंत्री जी ने शायद लिखा है कि मेरे मानसिक संतुलन बिगड़ गया है, मेरा कोई मानसिक संतुलन नहीं बिगड़ा है, मैं मुख्यमंत्री जी को,प्रधानमंत्री मोदी जी को, विश्वास दिलाता हूं मेरा मानसिक संतुलन बिल्कुल नहीं बिगड़ा है, बल्कि, गांधी जी ने तो कहा था कि मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं, गांधी जी ने कहा था मैं 125 साल जिंदा रहना चाहता हूं सेवा करने के लिए, और मैं कह रहा हूं मैं कम से कम सौ साल जिंदा रहना चाहता हूं राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करने के लिए। जिसकी भावना इतनी बड़ी हो कि मुझे सौ साल तक सेवा करनी है उसका मानसिक संतुलन हमेशा कायम रहेगा ये मेरा कहना है मुख्यमंत्री भजनलाल जी को। गृह मंत्रालय के 7 तारीख को मॉक ड्रिल को लेकर एडवाइजरी जारी करने तथा सरकार के गुजरात में होने के सवाल पर : उस पे मेरा कोई कमेंट नहीं हो सकता क्योंकि वो तो पहलगाम के बाद में जिस प्रकार से विचार आ रहे हैं रक्षा मंत्री जी के, प्रधानमंत्री जी के, और पूरा देश एकजुट है, विपक्ष कह चुका है कि हम आपके साथ में हैं। राहुल गांधी जी कह चुके हैं ,तो मेरा मानना है कि ऐसे मामले के अंदर एक बार जब विपक्ष भी एकजुट है सरकार के साथ में, अब किसी को भी कमेंट नहीं करना चाहिए उसके बारे में क्योंकि जो फैसला करना है सरकार को करना है और सरकार को भी फैसला सोच समझ कर करना है। ऐसे फैसले कोई जल्दबाजी में नहीं होते हैं ऐसे फैसले कोई अति उत्साह समझ लिए अति प्रतिक्रिया समझ लीजिए उसमें नहीं होता है , ये फैसले बहुत सोच समझ के देश हित में क्या है हमारे, हमारे मुल्क के हित में क्या है उसको देख कर करने पड़ेंगे, ये पूरी छूट प्रधानमंत्री मोदी जी को, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को होनी चाहिए। उसमें बार बार कमेंट नहीं करना चाहिए मेरा मानना है। हां ये बात जरूर है कि लोग पूछते हैं कि आप बड़ी बड़ी बातें तो करते हो, पर आपके बारह दिन हो गए हैं आप क्या जवाब दे रहे हो जनता को।

Ashok Gehlot

24,418 Aufrufe • vor 1 Jahr

49, सिविल लाइंस आवास पर प्रेस के साथियों से बातचीत- पत्रकार का सवाल: यमुना जल समझौते को लेकर सरकार और मंत्रियों द्वारा की जा रही बयानबाज़ी पर आपका क्या कहना है? मेरा जवाब: मैंने नीमकाथाना में स्पष्ट कहा था और अपने उस बयान पर मैं आज भी पूरी तरह कायम हूँ कि जिस दिन यमुना का पानी नीमकाथाना आ जाएगा, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर जाकर उनका स्वागत और अभिनंदन करूँगा। अब उस बयान को तोड़-मरोड़ कर इनके वर्तमान या पूर्व मंत्री जो कुछ भी बोल रहे हैं, वे सिर्फ अपनी झेंप मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। एमओयू (MoU) होना या एमओए (MoA) होना, इन सब कागज़ी बातों को आप छोड़िए; मेरा सीधा सा कहना है कि अगर राजस्थान में पानी आता है, तो मुझसे ज़्यादा पूरे प्रदेश को खुशी होगी। साल 1994 के उस ऐतिहासिक समझौते को अगर ये लोग धरातल पर लागू करवा देते हैं जो कि इतने सालों में नहीं हो पाया, क्योंकि इस बीच राजस्थान और हरियाणा दोनों जगह भाजपा की भी सरकारें रहीं और कांग्रेस की भी तो इससे बड़ी खुशी की बात और क्या होगी? यह पूरे प्रदेशवासियों के लिए और विशेष रूप से चूरू, सीकर और झुंझुनूं सहित पूरे शेखावाटी क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी सौगात होगी। मैंने तो सिर्फ इतनी सी सकारात्मक बात कही थी। अब इस पर जो राजनीतिक अखबारबाज़ी की जा रही है, मैं उसका जवाब नहीं देना चाहता, क्योंकि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों के लिए, केवल मुख्यमंत्री या अमित शाह जी को खुश करने के लिए ऐसी अनर्गल बयानबाज़ी करते हैं। इस मौके पर मैं एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहता हूँ। राजीव-लौंगोवाल समझौते के तहत हमारे हिस्से का जो 0.8 एमसीएम पानी है, उसे हम आज तक नहीं ला पा रहे हैं क्योंकि पंजाब उस पर कुंडली मारकर बैठा हुआ है। चाहे इस दौरान केंद्र और राज्यों में भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की। मैं कहना चाहूँगा कि अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह जी इस मामले में इतना इंटरेस्ट ले रहे हैं और राज्य सरकार को उनका पूरा सपोर्ट मिल रहा है, तो यह बेहद अच्छी बात है और हम इसका स्वागत करते हैं। लेकिन मैं इनके प्रयासों को असली मायने में सफल तब मानूँगा, जब पंजाब से हमारे समझौते के मुताबिक वह 0.8 एमसीएफ पानी राजस्थान को मिल जाए। वह पानी इंदिरा गांधी नहर (IGNP) के हिस्से का भी है, और अगर वह हमें मिल जाता है, तो श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर समेत पूरी नहरी पट्टी के किसानों को उसका बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही भाखड़ा नहर, गंग नहर और इंदिरा गांधी नहर से जो पीने का पानी हमें मिलता है, वह पूरा पानी जो राजस्थान का संवैधानिक हक बनता है, हमें समय पर मिलना चाहिए। आज स्थिति यह है कि इस वर्तमान सरकार की घोर लापरवाही के कारण नहरी तंत्र में पानी को रोका गया। हर साल मरम्मत (Repair) के नाम पर जो क्लोजर लिया जाता है, उसके खत्म होने और पानी छोड़े जाने के बाद भी आज तक जोधपुर जैसे बड़े शहर में पीने का पानी सुचारू रूप से नहीं पहुँच पा रहा है। अभी तीन दिन पहले ही मैं खुद जोधपुर का दौरा करके आया हूँ, वहाँ आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। यह सरकार की प्रशासनिक नाकामी और लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है। हमारे कार्यकाल के दौरान पंजाब में चाहे प्रकाश सिंह बादल जी की सरकार रही हो या कैप्टन अमरिंदर सिंह जी की, हमने हमेशा समय रहते उनसे बात की। बादल साहब तो हमारे राजनीतिक रूप से विपक्ष में थे, इसके बावजूद हमने बेहतर समन्वय बनाकर राजस्थान के किसानों के लिए पानी की कभी कमी नहीं होने दी। लेकिन आज हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के इलाकों में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। रोज़ाना वहां के किसान मुझसे मिलने जयपुर आ रहे हैं। वे लोग सिंचाई और पीने के पानी, दोनों को लेकर बेहद तकलीफ में हैं, और इस संकट पर वर्तमान सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। इसलिए मेरा सरकार से स्पष्ट कहना है कि आप अपनी यह घोर लापरवाही और केवल कागज़ी राजनीति करना छोड़िए। ज़मीन पर काम करके किसानों को हक का पानी दिलाइए, क्योंकि पानी न मिलने के कारण श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और आगे के क्षेत्रों का बेचारा किसान पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। सरकार को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर किसानों को खेती और आमजन को पीने के लिए समय पर पानी उपलब्ध करवाए।

Ashok Gehlot

39,867 Aufrufe • vor 2 Monaten

कानूनों से खतरनाक खिलवाड़.. अजीत भारती नाम के भक्त को राहुल गांधी के खिलाफ अफवाह फैलाने के लिए कर्नाटक में केस हुआ। यह कांग्रेस सरकार ने किया है। इसके पहले श्याम मीरा सिंह पर असम में केस हुआ था। यह भाजपा सरकार ने किया। अभी लेखक अरुंधति रॉय पर 12-14 साल पहले के किसी बयान पर UAPA लगाने की बात चल रही है। PMLA कानून तो किसी से कुछ भी बयान लेकर, बड़े बड़े लोगो को जेल डालने के कुख्यात हो ही चुका है। पर इन सबका बाप, भारतीय न्याय संहिता, 15 दिन में लागू होने को है। जिसके कण कण में UAPA, TADA, PMLA रचा बसा है। ●● न्याय संहिता में पुलिस को इतने अधिकार है, की जब जिसे चाहे, मिनटों में फ्रेम करके गिरफ्तार कर सकती है। गिरफ्तारी आयरन क्लैड है, और जमानत को, यदि पुलिस न चाहे, तो एकदम अलभ्य कर दिया है। याने कोर्ट भी, पुलिस के सामने अशक्त है। ●● आजाद समाज का बेसिक फलसफा, राइट टू फ्रीडम है। याने पुराने जमाने के राजा की तरह सरकार जिसे मन आये, काल कोठरी में बन्द नही करवा सकती। ऐसा करने का उचित कारण हो, और वह कानून में डिफाइन हो। फिर कानून, अभियुक्त को बचाव का पूरा मौका दे। 100 गुनहगार छूट जाए, एक निर्दोष को सजा नही होनी चाहिए। जमानत नॉर्म होना चाहिए, जेल एक्सेप्शन। अपराध, क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को साबित करना है, न कि आरोपी को अपनी निर्दोषता साबित करनी है। जब तक अपराध, बियॉन्ड रीजनेबल डाउट, सिद्ध न हो, सजा नही होनी चाहिए। ●● लेकिन मौजूदा दौर में, निचली अदालतों ने बेल देना लगभग बन्द कर दिया है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट "बेल पर" फैसले दे रही हैं। इंतजार में हवालात, या पुलिस कस्टडी में 50-60 दिन गुजारने वाले शख्स को मिली जमानत भी बेकार है।बिना दोषसिद्धि के सजा है। नई न्याय संहिता, इन एबरेशन को नार्म बनाती है। इसमे आतंकवाद की परिभाषा में जोड़े गए प्रावधान- सड़क पर एक मामूली प्रदर्शन, वहां लगाए नारे, किसी धरने को भी आतंकवाद के दायरे में रखने की सुविधा देते हैं। वो पुलिस को यह अधिकार देते हैं कि "उचित न समझे" तो केस की सूचना पर रिपोर्ट दर्ज न करे। याने न्याय के लिए आप थाने की आशा छोड़ दीजिए। हां, पहले भी यह चोरी-छुपे होता था, पर अब अधिकार में है। आगे, पुलिस को गिरफ्तारी के बाद 24 घण्टे में कोर्ट में पेश करने की जरूरत नहीं। डॉक्टरी मुलाहिजे की जरूरत नही। 7 दिन बाद वह एसडीएम से रिमांड बढ़वा सकता है। असल कोर्ट तो 14 दिन में पेश करे। बिना चार्जशीट के 6 माह तक हवालात एक्सटेंन की जा सकती है। ●● दमन का खजाना है यह अन्याय संहिता। देशभक्त खुश होंगे। अब आएगा मजा। चमचों को जमकर पकड़ा जाएगा, उल्टा लटकाकर पीटेंगे। गद्दारों की खाल में भूसा भरा जायेगा। यस, श्योर। लेकिन याद रखें। ये पावर्स पुलिस को है। याने उन जगहों की पुलिस को भी जहां भाजपा की सरकार नही है। और आज की डेट में आधे देश मे नही है। इधर वाले, उधर वालो की जिंदगियां तबाह करेंगे, उधर वाले इधर की। सुरक्षित कोई नही। ●● ये कानून, क़ानून व्यवस्था की बेहतरी के लिए नही बने। राजनीतिक वजहो से बने हैं। विपक्ष की आवाज बन्द करने, और आम नागरिक को टेरराइज करने को बने हैं। बात व्यवस्था की है, तो कानून व्यवस्था और शांति के लिए, अंग्रेजो की बनाई व्यवस्था से बढ़िया कुछ नही। क्योकि वह हमारे बीच, 150 साल पुरानी हो चुकी। वह बार बार माँज कर, चमका कर, कतरब्योंत और सुधार के लंबे कालक्रम से गुजर चुकी है। अंग्रेजो की नही , यह हमारी व्यवस्था हो चुकी है। आजाद हिंदुस्तान की 15 संसदों, सरकारों, और हजारों जजों ने लाखों मामलों के फैसलों से, हर सिचुएशन के लिए एक गाइडलाइन बना दी है। इस कानून को सब लोग समझते हैं, स्वीकार करते हों, फॉलो करते हैं। वकील, पुलिस, अदालतें, समझती हैं। ●● तो IPC हमारे शरीर मे फिट, और शरीर कानून में फिट हो चुका है। टेलर फिट। अब नए चोले को फिर उतना ही समय लगेगा, परफेक्ट, टेलर फिट होने में। यदि इसका आधा ही समय लगा, या चलो, कि चौथाई या दसवां हिस्सा ही लगा परफेक्ट होने, सेट होने में- तो भी.. पहले 20 साल तो आम लोगो, वकीलों, कोर्ट्स को इससे जूझते, रास्ते और राहतें खोजते लग गए न.. ●● और यह बड़ा वीभत्स दौर होने वाला है। राजनीतिक कटुता, और शुचिता के अभाव में कानूनन बेलगाम पुलिस, किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के कन्ट्रोल में नही रहेगी, लिख लीजिए। वह दोनो तरफ को दबाएगी। ताक कर रखेगी, इसकी सरकार में उसको, उसकी सरकार में इसको निपटायेगी। यह पुलिस राज, व्यवस्था में अंसतोष और विद्रोह को जन्म देगा। और सरकारों को इसका नजला भुगतना पड़ेगा। और फाइनली लोकतन्त्र को गहरा डेंट लगेगा। ●● कानूनों से खिलवाड़ बन्द हो। न्याय संहिता का इमिडीएट रिवीजन होना चाहिए।

Manish Singh

59,938 Aufrufe • vor 2 Jahren