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डिंपल भौजी से बेशक बेइज्जती मिली हो 😌 लेकिन डीपी पर फोटो लगाकर ये जनाब युवा नेता बनेंगे 👇🤣

534,358 次观看 • 3 个月前 •via X (Twitter)

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दाऊदवुड को लग रहा है कि रणवीर सिंह पर बैन लगाकर उन्होंने बहुत बड़ा तीर मार लिया है.. लेकिन होगा उल्टा ही.. क्योंकि ये पब्लिक है सब जानती है.. वो सब देख, सुन और समझ रही है.. कि कैसे इन ब्रोकली वालों से धुरंधर की सक्सेस पच नहीं रही है.. खानों का दौर अब खत्म हो चुका है.. सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद से वैसे भी फिल्म इंडस्ट्री की धज्जियां उड़ी हुई थी.. फिर धुरंधर आई और लोग सिनेमा हॉल में फिर लौटे.. और आदित्य धर ने इनके चहेते पाकिस्तान की बख्तियाँ उधेड़ के रख दी.. लगा लो बैन, कर लो जो कर सको.. अभी तो धुरंधर 2 OTT पर भी रिलीज होना बाकी है.. लोग फिर से टीवी पर दस दस बार देखेंगे.. और फिर से खानों की इज्जत उतरेगी..

Aakanksha🇮🇳

89,704 次观看 • 4 个月前

ओरण परिक्रमा, देशनोक….. बेहद खूबसूरत एवं विहंगम दृष्य…. ओरण बचाओ मुद्दा पिछले कुछ समय से काफ़ी चर्चाओं में रहा है… हमारे बाड़मेर जैसलमेर के हज़ारों सामाजिक कार्यकर्ता इस मुद्दे को उठाते रहे हैं… रविंद्र सिंह भाटी ने भी इस मुद्दे पर हर समय आवाज़ बुलंद की…. बहुत लोग आलोचना करते हैं कि भाटी अपने मतलब के लिए ये मुद्दा उठाते है… इस मुद्दे से किस नेता को क्या फ़ायदा हो रहा है ये ज़रूरी नहीं है…. ज़रूरी ये है कि मुद्दा लाइमलाइट में आ रहा है या नहीं… आज हमारे शहरों की आँधी आबादी को ये भी नहीं पता होगा कि ओरण किसे कहते हैं… चाहे किसी भी तरह से पहुँचे, लेकिन ये मुद्दा जन जन तक पहुँचाना चाहिए…. क्योंकि ओरण हमारे ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है… और हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम आने वाली पीढ़ी को ये ओरण उसी हालात में सौंप कर जाएँ… जिस हालत में हमारे पूर्वजों ने हमें सौंपा था… हो सके तो कुछ बेहतरी करके जाएँ… नहीं तो कम से कम बिगाड़ कर ना जाएँ….

kapil bishnoi

12,314 次观看 • 10 个月前

पारिवारिक कलह किस तरह से लोगों को मार रहा है आप सोचिए बनारस के बड़े यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभंकर गौतम जिन्होंने एम्स दिल्ली से एमबीबीएस एमएस किया और एम्स दिल्ली से ही यूरोलॉजी में MCH किया और वह बनारस में एक बड़े अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट थे वह पत्नी से विवाद के बाद खुद को कोई जहरीला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर लिए उन्होंने यह कदम तीज के दिन उठाया जब शादीशुदा महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है डॉक्टर साहब पिछले कई वर्षों से बनारस में अकेले रहते थे और उनकी पत्नी पटना में रहती थी लेकिन लगातार कई मामलों में फंसने की धमकी दहेज विवाद इत्यादि की वजह से अंत में शुभंकर गौतम ने इस दुनिया से चले जाना ही बेहतर समझा वह अपने कमरे में बैठकर ही खुद को इंजेक्शन लगाए और जब काफी देर तक दरवाजा उन्होंने नहीं खोला तब जब दरवाजा तोड़कर अंदर लोग गए तब बिस्तर पर बैठे हुए ही उनकी डेड बॉडी मिली मेरा हमेशा से मानना है कि अगर वैवाहिक रिश्ता निभा ना सको तो शांति से अलग हो जाना ज्यादा बेहतर रास्ता है चाहे पत्नी हो या पति हो दोनों को जब यह लगे कि अब यह रिश्ता नहीं आगे बढ़ाया जा सकता तब बेवजह लड़ाई झगड़ा कोर्ट कचहरी में पड़ने से अच्छा है कि आप लोग अपने रास्ते अलग कर दो

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

39,181 次观看 • 17 天前

Bro का नाम अभिजीत दीपके है। Bro CJP का फाउंडर है। Bro अमेरिका में रहता था। Bro इंडिया आकर प्रोटेस्ट करने लगा। Bro को हीरो बनने की ऐसी चूल मची कि अपने तो अपने बेचारे सोनम वांगचुक को भी अपने जाल में फंसा लिया। Bro को भले कोई भाव ना दे लेकिन सोनम वांगचुक के वजह से नेताओं का आना जाना शुरू हो गया है प्रोटेस्ट में। Bro की आज की वीडियो देखोगे तो Bro की नियत समझ जाओगे Bro के प्रोटेस्ट में आज समाजवादी पार्टी की नेता प्रिया सरोज आई थीं। Bro ने मास्क पहना था Bro ने मास्क उतार कर बाल सही किए Bro ने मस्त फोटो खिचाई 😂 Bro के चक्कर में बेचारे सोनम वांगचुक दम तोड़ रहे हैं। Bro को हीरो बनने से फुर्सत नहीं है। सोनम वांगचुक जी अब भी आंखे खोलो और निकल लो वहां से, ना सरकार को आपकी कोई फिक्र है ना इन लौंडो को कोई फिक्र है। ये तो ऐसा लगता है आपको बलि का बकरा बनाकर फोटो खिंचाने आए हैं हीरो बनने आए हैं।

Ansari Gulamhusain

365,337 次观看 • 2 个月前

"सपा के बागी विधायकों को माया मिली न राम" "विधायकों का सपना टूटा तो ढूंढ रहे वापसी का जुगाड़.." सुना है अंतरात्मा की आवाज के नाम पर समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले विधायकों को सत्ता का मलाई-मक्खन तो दूर पार्टी में तवज्जो भी नहीं मिल रही. इंतजार इतना लंबा हो चुका है कि मन कसमसाने लगा है.. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, बगावती तेवर वाले विधायकों की छटपटाहट बढ़ती जा रही है.. मन में शायद यही बात गूंज रही है.. "माया मिली न राम" चलो भाई, राम तो मिले नहीं बाकी की कोशिश कर ली जाए!! इसी तर्ज पर सपा में वापसी का रास्ता तलाशा जा रहा है.. इसे विधायकों की व्यथा कहें, मजबूरी मानें, गुहार बताएं.. लेकिन सपा मुखिया तक बागी साथियों का संदेश पहुंच ही गया.. अखिलेश यादव बड़े दिल के नेता हैं.. उन्होंने भी साफ कह दिया.. "जैसे गए थे, वैसे ही लौट आएं.." सपा मुखिया के कहने का मतलब समझिए.. फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव हुए थे जिसमें सपा के विधायक मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, राकेश पांडे, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्या ने क्रॉस वोटिंग करके भाजपा के प्रत्याशी को जिता दिया था. सपा ने बाद में मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया. उस वक्त अखिलेश यादव ने कहा भी था कि मंत्री बनने गए हैं.. मैंने उनका रास्ता साफ कर दिया.. बागी विधायकों को भी यही उम्मीद थी.. भाजपा में सत्ता की मलाई मिलेगी.. मंत्री बनेंगे.. भोकाल काटेंगे.. लेकिन दिन, महीने, साल गुजर गए.. कुछ हाथ न आया.. सुनने में आ रहा है कि अब निष्कासित विधायकों में से कुछ ने अपने करीबियों के माध्यम से अखिलेश यादव से संपर्क किया है.. संदेश पहुंचाया है कि पार्टी में लौटना चाहते हैं.. सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव के जवाबी संदेश में विधायकों को अपनी लॉयल्टी साबित करने के लिए कहा गया है.. और ये लॉयल्टी साबित होगी राज्यसभा चुनाव में.. राज्यसभा की यूपी कोटे की 10 सीटें इसी साल 25 नवंबर को खाली हो रही हैं.. बागी और निष्कासित विधायकों से कहा गया है कि सपा के कैंडिडेट के पक्ष में वोट करें तो वापसी संभव है.. बागियों के खेमे में इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है.. #SamajwadiParty #AkhileshYadav #loyality #Politics #UttarPradesh

Vivek K. Tripathi

42,957 次观看 • 7 个月前