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तेज आंधी में खुद के बजाय वृक्ष को बचाने का संघर्ष.. यही है सत्य सनातन, जो पशु पक्षी ही नही, वनस्पति में भी जीव देखता है.. कभी स्वाद तो कभी दूसरों को अपमानित करने के लिए गौहत्या करने वाले इन संस्कारों से कोसों दूर.. #Hindu #Hindutva

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18 सेकण्ड के इस वीडियो को देखिए। ये भाई रायबरेली से प्रयागराज परीक्षा देने पहुंचा है। रात में मां ने रोटी बनाकर दे दी थी। सुबह 7 बजे वही खाने के लिए निकाला लेकिन रोटी खराब हो गई है। यह किसी एक के साथ नहीं बल्कि लाखों विद्यार्थियों के साथ होता है। संघर्ष फेज में कभी सूखी रोटी मिलती है तो कभी साथ में अचार मिल जाता है। कई बार तो कुछ खाने का मन भी किया लेकिन जेब गवाही नहीं देता। भूखे ही रहना होता है। इसके लिए किसी की सीधी जिम्मेदारी नहीं होती। यह जीवन के संघर्ष का हिस्सा है। यही इंसान को मजबूत बनाता है। जिसने इस फेज को पार कर लिया, मेहनत करने से पीछे नहीं हटा वही आगे चमक जाता है। शुभकामनाएं दोस्त। सूखी रोटी खाकर तुम कामयाबी लिख दो। मां के सपनों को पूरा कर दो।

Rajesh Sahu

135,855 Aufrufe • vor 2 Jahren

ये उत्तर प्रदेश का #प्रयागराज है, यहाँ लाखों बच्चें IAS PCS से लेकर तमाम भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। योगी सरकार के RO/ARO के दो शिफ़्ट में परीक्षा कराने के फ़ैसले को ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। अगले महीने यहाँ महाकुंभ का आयोजन है। आयोग कोई भी भर्ती सुचारु रूप से नहीं करा पा रहा लेकिन परेशान कौन है ?? वो युवा जो अपने घरों से दूर एक कमरें में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, उम्र निकलती जा रही है मगर अंधी और बहरी सरकार को ना दिखता है ना ही कुछ सुनाई पड़ता है। सरकार चलाने के लिए “परिवार वाले” व्यक्ति को ही सत्ता में बैठना चाहिए वरना वो कभी भी दर्द नहीं समझ पाएगा… चमचागिरी करने वाले अफ़सरों को भी छात्रों के बारे में एक बार सोचना चाहिए #UPPSC_ROARO_ONESHIFT

Mamta Tripathi

37,173 Aufrufe • vor 1 Jahr

झारखंड में छात्रों के मशाल जुलूस के दौरान एक दिलचस्प और भावुक दृश्य देखने को मिला। रास्ते में एक मंदिर से भजन की धुन सुनाई दी। सावन का पवित्र महीना है। हजारों छात्र कुछ पल के लिए रुक गए और भोलेनाथ की भक्ति में झूम उठे। यह दृश्य बताता है कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष और अपनी आस्था, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। शायद यही वजह है कि हिंदू विरोधी राजनीति करने वाले, देश को तोड़ने का सपना देखने वाले, गाली-गलौज और अराजकता की राजनीति करने वाले विपक्ष के नेता और उनके गुर्गे आज तक झारखंड के छात्रों के हित की बात करने से बच रहे हैं। जब आंदोलन उनकी राजनीतिक पटकथा के मुताबिक नहीं होता, जब उसमें भारत विरोधी नारे नहीं लगते, जब उसमें अपनी आस्था पर गर्व करने वाले छात्र होते हैं, तब उनके लिए छात्रों का संघर्ष भी महत्वहीन हो जाता है। झारखंड के छात्रों का आंदोलन उनकी इस दोहरी मानसिकता को बेनकाब कर रहा है.

Amit Malviya

72,735 Aufrufe • vor 1 Monat

दलित दूल्हे की सुरक्षा में 200 पुलिसकर्मियों को गांव में तैनात किया गया हैं , ना तो इस गांव में मुग़ल हैं , ना पाकिस्तानी और ना ही चीनी ना तो बांग्लादेशी , इस गांव में रहने वाले सभी लोग HINDU होने का दावा करते हैं , लेकिन बात घोड़ी पर चढ़ने की आती है तब HINDU EKTA फुस हो जाती है , AJMER के लवेड़ा गांव में अगड़ी जाति के लोगों ने धमकी दी कि दलित दूल्हा घोड़ी नही चढ़ना चाहिए , परिवार ने पुलिस में शिकायत की और सुरक्षा की मांग की , HINDU जाति के नाम पर दूसरे HINDU पर हमला ना करे , इसलिए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर बारात को सुरक्षित निकाला गया , कौन है वो लोग जो बोलते है देश में जातिवाद नही है जातिवाद एक बीमारी है जो कभी खत्म ही नहीं होगी। अभी भी लोगों को लगता है कि दलितों का आरक्षण नहीं मिलना चाहिए ? जब तक जातिवाद है तब तक आरक्षण रहना चाहिए।।

Ravi Gahlot 🇮🇳

120,904 Aufrufe • vor 1 Jahr