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तुम मुझे वहां पर ढुंढ रहे हो... और मैं तुम्हारा यहाँ पर इंतजार कर रहा हूं...😛👻👻

186,529 Aufrufe • vor 8 Monaten •via X (Twitter)

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पिछले 1 साल से मेरी X पर एक लड़की से मैसेज के द्वारा बात हो रही थी, कोई दिन ऐसा नहीं गया जिस दिन हमने एक दूसरे से बात नहीं की हो... धीरे धीरे हमारी बातें फोन पर भी घंटों तक होने लगी, उसकी बातों से मुझे लगने लगा कि उसे भी मुझसे प्यार हो गया है... इसलिए मैं मैने कल शाम उसे फोन करके कहा कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूं... वो भी शायद मुझसे मिलने को बेताब थी, इसलिए उसने भी तुरंत हां बोलते हुए गाजियाबाद में एक जगह पर मिलने के लिए बोल दिया... आज सुबह 10 बजे जब मैं उसकी बताई हुई जगह पर पहुंचा तो मुझे वहां कोई नहीं मिला, मैंने उदास मन से उसे कॉल किया तो उसने बताया कि वो जाम में फंसी हुई हूं, 30 मिनट में वहीं पर पहुंच जाएगी... अब मैं वहीं अपनी गाड़ी में बैठा उसका इंतजार कर रहा था, कि मुझे एक ट्रक के पीछे काले कपड़े पहने खड़ी एक बहुत खूबसूरत लड़की दिखाई देती है, जिसको देखकर मैं समझ गया कि ये वहीं लड़की है जिसका मैं इंतजार कर रहा हूं... फिर भी मैने कन्फर्म करने के लिए उसे कॉल मिलाया तो उसने कॉल उठाया और बोली मैं उसी जगह पर एक ट्रक के पीछे खड़ी हुई हूं... अब मैंने उसे गाड़ी की तरफ आने के लिए बोला तो वो तुरंत मुझसे फोन पर बातें करती हुई मेरी तरफ आने लगती है... उसकी मुस्कान, और चाल ढाल देखकर कुछ देर के लिए तो मैं अपना होश खो बैठा... मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी किस्मत में इतनी सुंदर लड़की होगी... इसके लिए मै X को धन्यवाद देता हूं... और हां ये लड़की आपके साथ भी X पर जुड़ी हुई है, क्या आपने इसे पहचाना या नहीं...

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यह वीडियो देखने के बाद मेरे एक जानने वाले का मैसेज आया है उन्होंने कहा कि "भैया अब आपको रिपोर्टिंग छोड़ देनी चाहिए" इस वीडियो में जो लोग दिखाई दे रहे हैं सबको मैं जानता हूं और सब मुझे जानते हैं सवाल इन रिपोर्टर्स पर नहीं है बल्कि व्यवस्था पर है क्या इन रिपोर्टर्स के संस्थान अगर इन पर दबाव बनाने की बजाय इनके विवेक से काम करने देंगे तो क्या ये ऐसे करेंगे? आज मीडिया के हालात क्या हो गए हैं ये सोचने की बात है मैं इस बात का शुक्र मना रहा हूं कि अच्छा हुआ मैं इस मौके पर नहीं था वरना क्या पता मुझे भी इस सर्कस का हिस्सा मजबूरन बन जाना पड़ता? लेकिन ऐसी परिस्थितियां कुछ-कुछ समय पर हर रिपोर्टर के सामने आती हैं सोच कर देखिए कि यह किस तरह का दबाव है जिसमें इतने सीरियस मुद्दे पर भी कॉमेडी हो गई संसद की सुरक्षा में चूक जैसे गंभीर मुद्दे पर रिपोर्टिंग हो रही है, लेकिन जिस तरह रिपोर्टिंग हो रही है उसको देखकर कपिल शर्मा का कॉमेडी शो भी फेल है यह सब देखकर कभी-कभी मन में आता है कि आखिर हम कर क्या रहे हैं? क्यों कर रहे हैं? किसके लिए कर रहे हैं?

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