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तुम्हारे बिना सब अधूरे हैं जानाँ सबा फूल ख़ुश-बू चमन रौशनी रंग - इंदिरा वर्मा

32,450 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 8

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Chaste Monk1 год назад

💫🖤

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Sohail Khan1 год назад

❤️‍🩹🥺

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Raushan Kumar1 год назад

🌹🌹👌👌

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ahsaan majid esaf1 год назад

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शून्य1 год назад

जिंदगी से तंग आकर खुदकुशी को सोचते - उबैद नजीबाबादी 🌻

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Sejal_Voice1 год назад

गिद्ध का काम है, मरे जानवरों पर टूट पड़ना, बाज तो अपना शिकार खुद ही चुना करते हैं !! ~ सेजल

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≛ज़ख़्मी ͥ ͣ ͫशायर♛1 год назад

खुद से मिलने का मन करे,,,🖋️ तो अकेले जीना सीखो,,,🖋️

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BBC News Hindi1 год назад

होटल या चेंजिंग रूम में छिपे हुए कैमरों का पता कैसे लगाएं? प्रेज़ेंटर: भूमिका राय शूट, एडिट: निमित वत्स

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राहुल गांधी कल Leadership पर भाषण दे रहे थे..... कोंग्रेसी C को.. अब गाज़े का प्रभाव हो ... और मज़ा ना आये... ऐसे थोड़ी हो सकता है.. उन्होंने अपनी दादी जी.... यानी Iron Lady की कहानी सुनाई. एक बार इंदिरा गांधी अमेरिका गयीं..... Official Visit पर पूरे परिवार को ले कर गयीं थी इंदिरा जी.. दोनों बच्चे.. यानी राहुल और प्रियंका को घर छोड़ दिया. बाद में इंदिरा जी State डिनर से वापस आयीं.... तो बोली कि यह अमेरिकी लोग हमें बेवकूफ समझते हैं.. सोनिया गाँधी ने पूछा.... Why? इंदिरा जी ने कहा.... कि मेरी साड़ी का यह रंग था.... नैंसी रीगन के ड्रेस का रंग मिलता जुलता था.... अमेरिकियो को लगा कि ड्रेस का रंग मिलता जुलता करने से वो हमें अपने पाले में कर लेंगे.. फिर थोड़ा हीहीही हाहाहा हुआ.... और इसे Leadership का lesson बताया गया... कि भारत के प्रधानमंत्री देश की सुरक्षा की बात करता है.. राहुल गाँधी का कहना था कि प्रधानमंत्री color मैचिंग में ध्यान नहीं देता.... काम करता है..... यह Leadership है 🤣🤣 जबकि सच्चाई है कि इंदिरा गाँधी ने Pink color की साड़ी पहनी थी... और नैंसी रीगन ने peach color की ड्रेस पहनी थी..... दोनों की फोटो आप देख सकते हैं.... दूर दूर तक कोई मैचिंग नहीं है… राहुल गाँधी के Leadership lesson की मानें.... तो दुनिया भर के PM और अन्य Leaders... जो अमूमन काले या नीले कोट पेंट्स या ड्रेस पहनते हैं.... वो Leaders नहीं हैं... वो Compromised हैं… मुझे समझ नहीं आता.... पप्पू की script लिखता कौन है...और सबसे मजेदार पार्ट इसका की 12 साल के पप्पू को तो ये सब बातें याद नहीं होगी इसके घर ने कौन इस बात को बार बार याद दिलाता रहा की इंद्रा जी बेवक़ूफ़ थी 🥲

Dr. Richa Rajpoot (Lodhi)

46,176 просмотров • 13 дней назад

ये कौन से देवर-भाभी हैं जिनके बीच में अवैध संबंध हैं? अखबारों में न्यूज़ पर यू ट्यूब पर इंस्टाग्राम पर किन देवरों और भाभियों की वीडियोज़ हैं? जिन्हें चटखारे लेकर देखते हैं हमारे घरों के छोटे-छोटे बच्चे स्खलित हो जाते हैं आयु से पहले ही इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि टूट पड़ते हैं सगी बहनों पर! --- कितनी रंगीन थीं हमारी होलियाँ देवर रंग लेकर भागते थे भाभियों के पीछे भाभियाँ छुप जाती थीं नहानघरों में कमरों में रसोइयों में हम खिड़की की जाली के भीतर से फेंक देते थे पानी में घुला हुआ कोढ़िया रंग घर के बुजुर्ग डांटते थे हमें वही रंगी हुई भाभियाँ परोसती थीं हमें गुझिया, भुजिया, चाय और शरबत कहाँ गए वे देवर? क्या वे देवर आज भी कहीं-कहीं मौजूद हैं? --- भाभियाँ जानती थीं देवरों ने शराब पी रखी है या गांजा या भांग या अफीम या डोडा या अमल लेकिन भाभियों को भरोसा था देवरों पर देवर गाल रंग देते थे पीठ रंग देते थे पेट रंग देते थे लेकिन स्तनों पर हाथ न जाता था देवरों का हालांकि भाभियों की रंगीन चोलियाँ होली के पानी में भीग कर इतनी पारदर्शी हो जाती थी कि भैयाओं का मन होता था अकेले में भाभियों के साथ होली खेलने का! --- कौन देखता है इतनी अश्लील वीडियोज़ कौनसे कारखाने हैं जिनमें वीडियोज़ के कैप्शन बनते हैं : "देवर ने भाभी को चूसा" "देवर ने लिए भाभी के मज़े" "देवर ने उठाया भाई के फ़ौज में होने का फ़ायदा" "देवर भाभी होट वीडियो" "देवर और भाभी रात को रंगे हाथ पकड़े गए" कौन हैं यह नए दर्शक कहाँ गए वे बूढ़े-बूढियां जो सेंसर बोर्ड की तरह घर की दहलीज़ पर बैठे हमारी निगरानी करते रहते थे क्या वे सब वृद्धाश्रम चले गए? --- उम्र में बराबर के होकर भी देवर खाते थे भाभियों के धोक देवर-भाभी के लिए कहा जाता था यह तो माँ-बेटे जैसा रिश्ता है इन दिनों तो अगर देवर-भाभी घर पर अकेले हों तो धड़कन बढ़ जाती है बड़े भाई की : किसी के भीतर नहीं बची निर्दोषिता एक कलुष चढ़ आया है सभ्यता के चेचक भरे गेहुँए चेहरे पर --- पास में है होली मैं रहूंगा ही किसी नशे में पड़ोस की भाभियाँ तक आएँगी रंग लगाने लेकिन पहले उनके पैरों पर डालूंगा रंग देह को बीच में नहीं आने दूंगा हालांकि रंग देह पर ही चढ़ेगा सब कुछ रंग दूंगा भाभियों का बाल्टी से नहला दूंगा पारदर्शी भाभियों से मिलाऊँगा नज़र लेकिन उन्हें अपनी पलकों का पर्दा भी दूंगा --- मेरे बच्चो! हमेशा से लगता आया है पुराना ज़माना अच्छा हालांकि पहले कुंठाओं के रूप दूसरे थे संसाधन थे कम बहुत कम लेकिन मैं एक ऐसा कवि बनना चाहता हूँ जो देवरों और भाभियों को आपस जोड़ दे भाभियों के गालों पर रंग लगाना एक कला है मेरे बच्चो बिना हाथ लगाए लगाना होता है हाथ बिना छुए भिगोनी होती है चोलियां उनके साथ नाचना होता है बिना उनपर हावी हुए भाभियों के साथ जब भी नाचो तो मेरे बच्चो भैयाओं को आगे कर दो - उन्हीं का पहला हक़ है भीगी हुई अजंता ऐलौरा की मूरत को सर से पाँव तक रंगने और निहारने का! --- इस अखबार को इस न्यूज़ चैनल को इस यू ट्यूब को इस इंस्टाग्राम को होलिका दहन के हवाले कर दो बच्चो - उस प्रह्लाद को बचा लो जिसके पास अब नहीं जलने का वरदान नहीं रह गया है! --- प्रातःस्मरणीय भाभियो! हम देवरों से डरो मत हम आपको वहीं रंग लगाएंगे जहाँ आप लगवाएंगी हम आपको ज़बरदस्ती रंग नहीं लगाएंगे!!! _________________________ कविता : "होली और देवर और भाभी"
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ये कौन से देवर-भाभी हैं जिनके बीच में अवैध संबंध हैं? अखबारों में न्यूज़ पर यू ट्यूब पर इंस्टाग्राम पर किन देवरों और भाभियों की वीडियोज़ हैं? जिन्हें चटखारे लेकर देखते हैं हमारे घरों के छोटे-छोटे बच्चे स्खलित हो जाते हैं आयु से पहले ही इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि टूट पड़ते हैं सगी बहनों पर! --- कितनी रंगीन थीं हमारी होलियाँ देवर रंग लेकर भागते थे भाभियों के पीछे भाभियाँ छुप जाती थीं नहानघरों में कमरों में रसोइयों में हम खिड़की की जाली के भीतर से फेंक देते थे पानी में घुला हुआ कोढ़िया रंग घर के बुजुर्ग डांटते थे हमें वही रंगी हुई भाभियाँ परोसती थीं हमें गुझिया, भुजिया, चाय और शरबत कहाँ गए वे देवर? क्या वे देवर आज भी कहीं-कहीं मौजूद हैं? --- भाभियाँ जानती थीं देवरों ने शराब पी रखी है या गांजा या भांग या अफीम या डोडा या अमल लेकिन भाभियों को भरोसा था देवरों पर देवर गाल रंग देते थे पीठ रंग देते थे पेट रंग देते थे लेकिन स्तनों पर हाथ न जाता था देवरों का हालांकि भाभियों की रंगीन चोलियाँ होली के पानी में भीग कर इतनी पारदर्शी हो जाती थी कि भैयाओं का मन होता था अकेले में भाभियों के साथ होली खेलने का! --- कौन देखता है इतनी अश्लील वीडियोज़ कौनसे कारखाने हैं जिनमें वीडियोज़ के कैप्शन बनते हैं : "देवर ने भाभी को चूसा" "देवर ने लिए भाभी के मज़े" "देवर ने उठाया भाई के फ़ौज में होने का फ़ायदा" "देवर भाभी होट वीडियो" "देवर और भाभी रात को रंगे हाथ पकड़े गए" कौन हैं यह नए दर्शक कहाँ गए वे बूढ़े-बूढियां जो सेंसर बोर्ड की तरह घर की दहलीज़ पर बैठे हमारी निगरानी करते रहते थे क्या वे सब वृद्धाश्रम चले गए? --- उम्र में बराबर के होकर भी देवर खाते थे भाभियों के धोक देवर-भाभी के लिए कहा जाता था यह तो माँ-बेटे जैसा रिश्ता है इन दिनों तो अगर देवर-भाभी घर पर अकेले हों तो धड़कन बढ़ जाती है बड़े भाई की : किसी के भीतर नहीं बची निर्दोषिता एक कलुष चढ़ आया है सभ्यता के चेचक भरे गेहुँए चेहरे पर --- पास में है होली मैं रहूंगा ही किसी नशे में पड़ोस की भाभियाँ तक आएँगी रंग लगाने लेकिन पहले उनके पैरों पर डालूंगा रंग देह को बीच में नहीं आने दूंगा हालांकि रंग देह पर ही चढ़ेगा सब कुछ रंग दूंगा भाभियों का बाल्टी से नहला दूंगा पारदर्शी भाभियों से मिलाऊँगा नज़र लेकिन उन्हें अपनी पलकों का पर्दा भी दूंगा --- मेरे बच्चो! हमेशा से लगता आया है पुराना ज़माना अच्छा हालांकि पहले कुंठाओं के रूप दूसरे थे संसाधन थे कम बहुत कम लेकिन मैं एक ऐसा कवि बनना चाहता हूँ जो देवरों और भाभियों को आपस जोड़ दे भाभियों के गालों पर रंग लगाना एक कला है मेरे बच्चो बिना हाथ लगाए लगाना होता है हाथ बिना छुए भिगोनी होती है चोलियां उनके साथ नाचना होता है बिना उनपर हावी हुए भाभियों के साथ जब भी नाचो तो मेरे बच्चो भैयाओं को आगे कर दो - उन्हीं का पहला हक़ है भीगी हुई अजंता ऐलौरा की मूरत को सर से पाँव तक रंगने और निहारने का! --- इस अखबार को इस न्यूज़ चैनल को इस यू ट्यूब को इस इंस्टाग्राम को होलिका दहन के हवाले कर दो बच्चो - उस प्रह्लाद को बचा लो जिसके पास अब नहीं जलने का वरदान नहीं रह गया है! --- प्रातःस्मरणीय भाभियो! हम देवरों से डरो मत हम आपको वहीं रंग लगाएंगे जहाँ आप लगवाएंगी हम आपको ज़बरदस्ती रंग नहीं लगाएंगे!!! _________________________ कविता : "होली और देवर और भाभी"

तृप्त ...🖤

32,104 просмотров • 6 месяцев назад

भाइयो-बहनों... आज गांव-गांव घूमकर मै बहुत भावुक हो गयी। लोग भावनात्मक रूप से अखिलेश भैया को याद कर रहे हैं। हर समाज के लोग परेशान हैं उनकी अपनी अपनी समस्याएं हैं । गरीबी बेरोजगारी शिक्षा स्वास्थ्य व कानून व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया अब पूरी तरीके से चरमरा चुकी है मुलाकात के दौरान मुझे एहसास हुआ कि लोगों को अब हमारी पुरानी सरकार याद आ रही है और लोग कह रहे हैं “अखिलेश भैया... वापस आ जाओ ना, हम तुम्हारे बिना अधूरे हैं।” अखिलेश भैया का दूरदर्शी विजन क्या था? 15 लाख से ज्यादा युवाओं को मुफ्त लैपटॉप 13 नए मेडिकल कॉलेज 108 एम्बुलेंस हर गाँव तक और सबसे ताकतवर हथियार — पीडीए नीति... PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और आधी आबादी (महिलाएँ) को एकजुट करने की क्रांतिकारी नीति। यह कोई साधारण फॉर्मूला नहीं — यह सामाजिक न्याय की आग है, जो हर वंचित, शोषित और पिछड़े वर्ग को सम्मान, हिस्सेदारी और अधिकार दिलाती है। पीडीए ने समाज के हर कोने को जोड़ा है और यही पीडीए 2027 में अखिलेश भैया को भारी जीत दिलाएगी...भाजपा के राज में महंगाई, बेरोजगारी, अव्यवस्था और जंगल राज ने जनता को तोड़ दिया है। लोगों ने फिजूल के मुद्दों में उलझ कर और भाजपा को अपना वोट देकर अपना अपनी जिंदगी का कीमती समय खो दिया है लेकिन अब जनता जाग चुकी है! *मेरी भविष्यवाणी —को आप सभी आज के दिन तारीख और समय के हिसाब से सेव कर ले* 2027 में समाजवादी पार्टी 300+ सीटें जीतकर अखिलेश भैया की सरकार बनाएगी...समाजवादी योद्धाओं, अब उठो, पीडीए की ताकत से घर-घर जाओ, हर वंचित को जगाओ। अखिलेश भैया की याद आज हर दिल में आग बना रही है। अखिलेश भैया, आपकी PDA नीति हमें नई ऊर्जा दे रही है। Akhilesh Yadav आपके नेतृत्व में हम न्याय, सम्मान और विकास का नया उत्तर प्रदेश बनाएंगे। जय अखिलेश यादव! जय समाजवाद! जय PDA! 300+ सीटें तय हैं! #SP300Plus #AkhileshYadav #PDA #2027KaBadlaav #DilSeAkhilesh Kamal Akhtar Faheem Irfaan Samajwadi Party Samajwadi Party Media Cell Aashish Yadav

Ekta kaushik

79,171 просмотров • 4 месяцев назад

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥ पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥ अर्थ : ऋक्षपति जाम्बवान ने कहा कि हनुमान् ! सुनो । हे बलवान् ! तुमने चुप्पी क्यों साध रक्खी है ? हे पवन के पुत्र ! तुम्हें पवन के समान बल है। तुम बल विवेक और विज्ञान के निधान हो । व्याख्या : हनुमानजी को आज्ञा देने में अङ्गदजी को भी सङ्कोच है। अतः वयोवृद्ध जाम्बवानजी ने कहा कि वस्तुतः जो बलवान है वह तो चुप्पी साधे हुए है । चुप्पी साधने का करण क्या है ? हनुमान् जो ! तुम पवन के पुत्र हो । अतः तुम में पवन सा ही बल है । पवनदेव तो दिन रात समुद्र के आर पार जाया करते हैं । अतः तुम्हारे लिए समुद्रोल्लङ्घन खेल है और बुद्धि तुम्हारी संसार पारदर्शी है उभय लोकावगाहिनी है । तुम बुद्धि, विवेक और विज्ञान के निधान हो । कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥ अर्थ : संसार में कौन ऐसा कार्य कठिन है जो तुमसे न हो सके । तुम्हारा तो अवतार रामकार्य के लिए है। यह सुनते ही हनुमानजी पर्वताकार हो गये । व्याख्या : जितने कार्य हैं उनकी सिद्धि तो बल और बुद्धि से ही होती है । सो परमेश्वर ने तुमको सबसे अधिक दिया है। तुम्हारे बल बुद्धि का पारावार नहीं है। अतः संसार में कोई ऐसा कार्य नहीं है जिसे तुम न कर सको। किं पुनः रामकार्य जिसके लिए तुम्हारा अवतार है । ऐसी कथा है कि भगवान् ने शङ्कर की आराधना करके उनसे वरदान मांगा था कि आप मेरे सेवक होकर मेरा कार्य साधन करें। तदनुसार साक्षात् रुद्र भगवान् हो हनुमान् रूप से अवतीर्णं हुए । अतः कहते हैं कि हम लोग तो कौतुक के लिए साथ हैं। रामकाज के लिए अवतार तो तुम्हारा ही है । सुनते हो हनुमानजी का आकार पर्वत सा हो गया । कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुँ अपर गिरिन्ह कर राजा॥ सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउँ जलनिधि खारा॥ अर्थ : सोने के रंग के शरीर में तेज शोभायमान हुआ । मानो पर्वत के दूसरे राजा हैं। बार बार सिंहनाद करके कहा कि इस लवर्णासिंधु को तो खेल में ही डाक जाऊँगा । व्याख्या: हनुमान् जी का शरीर स्वभाव से ही सोने के रंग का है। सो जाम्बवानजी के कथन ने मानो मन्त्र का काम किया। उनके वचन से ऐसा उत्साह बढ़ा कि शरीर तेज से चमकने लगा । विशाल शरीर था ही। ऐसे मालूम होने लगे जैसे दूसरे सुमेरु हैं । जाम्बवानजी के इस कहने का कि चुप्पी क्यों साधे हो ? बार बार सिंहनाद करके उत्तर दिया। "कौन सो काज कठिन जगमाहीं । जो नहि होय तात तुम पाहीं" का उत्तर देते हैं कि इस खारे समुद्र को तो खेल में डाक जाऊँगा । खारे समुद्र से उत्तरोत्तर छः समुद्र एक से एक आयाम में दुगुने हैं। कहिये तो उन्हें डाक जाऊँ । इस खारे समुद्र में रक्खा ही क्या है ? सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी॥ जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥ अर्थ : सहाय के सहित रावण को मारकर यहाँ त्रिकूट पर्वत उखाड़ लाऊँ । जाम्बवान ! मैं तुमसे पूछता हूँ। मुझे उचित शिक्षा दीजिये । व्याख्या : यहाँ संशय को स्थान नहीं है । समुद्र पार करके सेना सहित रावण को मारकर यहाँ त्रिकूटाचल को जिस पर लङ्कापुरी वसी है उखाड़ लाऊँ । राम का कार्य ही पूरा कर दूँ । इस भांति : "राम काज लगि तव अवतारा" का उत्तर दिया । त्रिकूट उखाड़ लाने का भाव यह कि तब आप लोग खोज लें कि सीता कहाँ हैं ? अब हनुमान् जी जाम्बवान से पूछते हैं कि आप सबसे वयोवृद्ध हैं । आप मुझे बतलाइये कि मैं क्या करूं ? रामजी का सब कार्य हो पूरा कर दूँ कि केवल आज्ञा मात्र का पालन करूँ । मेरे लिए क्या उचित होगा ? #रामचरितमानस #किष्किंधाकाण्ड #ramcharitmanas #hinduism #ramayana #sanatana #SanatanaDharma

रामचरितमानस-काशी

78,159 просмотров • 3 лет назад

एक पुरुष यह कैसे जान सकता है कि एक महिला पुरुष के प्रति सेक्सुअल आकर्षण महसूस कर रही है?.. यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य है। यह महिला की शारीरिक भाषा है। इसमें सभी महिलाएं शामिल होंगी, यह शरीर की भाषा के मनोवैज्ञानिक कहते हैं। पहले, एक पुरुष की तरह, एक महिला अपनी सेक्सुअल भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं करती, वह इन्हें अपनी गहरी मन में दबाकर रखती है।लेकिन, अगर वह महिला अपनी सेक्सुअल भावनाओं को छुपा भी ले, तो उसके शरीर के अंग उन्हें उजागर कर देंगे। जैसे, जब एक पुरुष सेक्सुअल उत्तेजना महसूस करता है या उत्तेजक दृश्य देखता है, तब उसके शारीरिक अंगों में बदलाव आते हैं, और वह खुद भी इसे रोक नहीं सकता। ठीक वैसे ही, जब एक महिला एक पुरुष के प्रति आकर्षित होती है, तो उसके शरीर में कुछ बदलाव होते हैं, लेकिन एक पुरुष को इसके कारणों की तलाश करने की जरूरत नहीं है, अगर वह महिला उसे सुंदर लगता है, तो यह काफी है। महिला का सेक्सुअल आकर्षण तुरंत नहीं होता, यह एक फूल की तरह है, जो धीरे-धीरे खिलता है। महिला का एक पुरुष के प्रति आकर्षण भी धीरे-धीरे होता है, यह प्रकृति का महिला का स्वभाव है, जिसे महिला खुद भी सोचकर बदल नहीं सकती। एक महिला को एक पुरुष के प्रति आकर्षित होने के लिए, उसके गहरे मन में उस पुरुष की जगह होनी चाहिए। जब एक महिला सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो पहले उसकी होंठों में बदलाव आता है। जब एक महिला उस पुरुष को देखती है, जिसे वह आकर्षक पाती है, उसके मस्तिष्क में "लव हॉर्मोन" स्रावित होते हैं, और उसके होंठों में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। तब उसके होंठ सूजे हुए होते हैं, और वह अपने होंठों को दांतों से काट लेती है, या होंठों को एक साथ घुमाती है, या अपनी जीभ से होंठों को नम करती है। ये सारी चीजें वह बिना जाने करती है, लेकिन शारीरिक भाषा के मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह निश्चित रूप से होता है। वह अपने होंठों के माध्यम से ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन यह सब सेक्सुअल आकर्षण का संकेत है। लेकिन वह खुद नहीं जानती कि यह सब अवचेतन स्तर पर हो रहा है। यह घटना महिला खुद रोक नहीं सकती, अगर वह इसे रोकने की कोशिश करती है, तो इसका मतलब है कि वह सेक्सुअल आकर्षण महसूस नहीं कर रही है। इसलिए, जब वह अपने प्रेमी से मिलने जाती है, तो वह पास में मौजूद बच्चों को चुम ले सकती है; ये उसके होंठों की आदतें हैं। दूसरी बात, शारीरिक भाषा विशेषज्ञ महिला की कमर की बात करते हैं, महिला की कमर हजारों वर्षों से कवियों द्वारा एक अविस्मरणीय प्रतीक के रूप में वर्णित की जाती रही है। महिला की कमर प्रजनन का एक प्रतीक मानी जाती है। जब महिला सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो उसकी कमर स्वाभाविक रूप से झूलने लगती है, यह शारीरिक भाषा के विशेषज्ञ कहते हैं। महिला सामान्य रूप से चलती है और जब वह एक पुरुष के प्रति सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो उसकी कमर एक नृत्य की तरह मोड़ खाती है, और इसे महिला के स्वभाव के रूप में माना जाता है। तीसरी बात, महिला की आंखें प्रेम और सेक्सुअल आकर्षण के मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब महिला सेक्सुअल आकर्षण या प्रेम के विचारों में होती है, तो उसकी आंखें फैल जाती हैं और वह पुरुष को और भी अधिक आकर्षक तरीके से देखती है। इस पर भी महिला का कोई नियंत्रण नहीं होता। अगर आप अपनी प्रेमिका या पत्नी में ऐसे बदलावों को देखेंगे, तो इसका मतलब है कि आपको अगले रोमांस की दिशा में बढ़ना चाहिए।
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एक पुरुष यह कैसे जान सकता है कि एक महिला पुरुष के प्रति सेक्सुअल आकर्षण महसूस कर रही है?.. यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य है। यह महिला की शारीरिक भाषा है। इसमें सभी महिलाएं शामिल होंगी, यह शरीर की भाषा के मनोवैज्ञानिक कहते हैं। पहले, एक पुरुष की तरह, एक महिला अपनी सेक्सुअल भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं करती, वह इन्हें अपनी गहरी मन में दबाकर रखती है।लेकिन, अगर वह महिला अपनी सेक्सुअल भावनाओं को छुपा भी ले, तो उसके शरीर के अंग उन्हें उजागर कर देंगे। जैसे, जब एक पुरुष सेक्सुअल उत्तेजना महसूस करता है या उत्तेजक दृश्य देखता है, तब उसके शारीरिक अंगों में बदलाव आते हैं, और वह खुद भी इसे रोक नहीं सकता। ठीक वैसे ही, जब एक महिला एक पुरुष के प्रति आकर्षित होती है, तो उसके शरीर में कुछ बदलाव होते हैं, लेकिन एक पुरुष को इसके कारणों की तलाश करने की जरूरत नहीं है, अगर वह महिला उसे सुंदर लगता है, तो यह काफी है। महिला का सेक्सुअल आकर्षण तुरंत नहीं होता, यह एक फूल की तरह है, जो धीरे-धीरे खिलता है। महिला का एक पुरुष के प्रति आकर्षण भी धीरे-धीरे होता है, यह प्रकृति का महिला का स्वभाव है, जिसे महिला खुद भी सोचकर बदल नहीं सकती। एक महिला को एक पुरुष के प्रति आकर्षित होने के लिए, उसके गहरे मन में उस पुरुष की जगह होनी चाहिए। जब एक महिला सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो पहले उसकी होंठों में बदलाव आता है। जब एक महिला उस पुरुष को देखती है, जिसे वह आकर्षक पाती है, उसके मस्तिष्क में "लव हॉर्मोन" स्रावित होते हैं, और उसके होंठों में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। तब उसके होंठ सूजे हुए होते हैं, और वह अपने होंठों को दांतों से काट लेती है, या होंठों को एक साथ घुमाती है, या अपनी जीभ से होंठों को नम करती है। ये सारी चीजें वह बिना जाने करती है, लेकिन शारीरिक भाषा के मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह निश्चित रूप से होता है। वह अपने होंठों के माध्यम से ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन यह सब सेक्सुअल आकर्षण का संकेत है। लेकिन वह खुद नहीं जानती कि यह सब अवचेतन स्तर पर हो रहा है। यह घटना महिला खुद रोक नहीं सकती, अगर वह इसे रोकने की कोशिश करती है, तो इसका मतलब है कि वह सेक्सुअल आकर्षण महसूस नहीं कर रही है। इसलिए, जब वह अपने प्रेमी से मिलने जाती है, तो वह पास में मौजूद बच्चों को चुम ले सकती है; ये उसके होंठों की आदतें हैं। दूसरी बात, शारीरिक भाषा विशेषज्ञ महिला की कमर की बात करते हैं, महिला की कमर हजारों वर्षों से कवियों द्वारा एक अविस्मरणीय प्रतीक के रूप में वर्णित की जाती रही है। महिला की कमर प्रजनन का एक प्रतीक मानी जाती है। जब महिला सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो उसकी कमर स्वाभाविक रूप से झूलने लगती है, यह शारीरिक भाषा के विशेषज्ञ कहते हैं। महिला सामान्य रूप से चलती है और जब वह एक पुरुष के प्रति सेक्सुअल आकर्षण महसूस करती है, तो उसकी कमर एक नृत्य की तरह मोड़ खाती है, और इसे महिला के स्वभाव के रूप में माना जाता है। तीसरी बात, महिला की आंखें प्रेम और सेक्सुअल आकर्षण के मामले में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब महिला सेक्सुअल आकर्षण या प्रेम के विचारों में होती है, तो उसकी आंखें फैल जाती हैं और वह पुरुष को और भी अधिक आकर्षक तरीके से देखती है। इस पर भी महिला का कोई नियंत्रण नहीं होता। अगर आप अपनी प्रेमिका या पत्नी में ऐसे बदलावों को देखेंगे, तो इसका मतलब है कि आपको अगले रोमांस की दिशा में बढ़ना चाहिए।

तृप्त ...🖤

450,219 просмотров • 1 год назад

हूबनाथ पांडेय की कविता- “गिरो” - राजेंद्र गुप्ता जी की ज़ुबानी गिरो गिरो कि अभी और गिरने की संभावनाएं भरपूर हैं इतना गिरो कि गुरुत्वाकर्षण बल भी शर्म के मारे गिर पड़े अभी तो गिरने की शुरुआत है गिरने के अपने सामर्थ्य पर भरोसा गिरने मत दो सारा विश्व तुम्हारा गिरना देख रहा है और ख़ुद न गिर पाने पर अफ़सोस कर रहा है गिरो ! पर अकेले मत गिरो रुपए के साथ गिरो चरित्र के साथ गिरो गर्व के साथ गिरो कि एक तुम्हीं हो जिसमें गिरने का इतना साहस है उस साहस के साथ गिरो बेशर्मी के साथ गिरो बेदर्दी के साथ गिरो कि दुनिया तुमसे गिरना सीख रही है किसी एक ही मामले में सही तुम्हें विश्वगुरु होने से कोई रोक नहीं सकता आनेवाली पीढ़ियां तुम्हारे गिरने में अपने गिरने की संभावनाएं तलाशेंगी वे तुमसे भी ज़्यादा गिरने का पराक्रम करेंगी उनके पराक्रम पर यकीन करते हुए ज़रा और ज़ोर से गिरो थोड़े शोर से गिरो चारों ओर से गिरो निपट भोर से गिरो और गिरते रहो, गिरते रहो यह सच है कि इससे पहले तुम्हारी तरह कोई नहीं गिरा इसका कोई नहीं गिला बल्कि तुम्हें तो ख़ुश होना चाहिए कि सदियों से खड़े समाज को तुम गिरना सिखा रहे हो एक ही जगह खड़े खड़े लोग जड़ हो गए थे उन्हें जड़ से तुम्हीं हटा रहे हो यह कोई आसान काम नहीं जो तुम ज़माने को बता रहे हो कि जो गिरने में असमर्थ हैं वे तुम्हारी आलोचना करेंगे तुम्हारी निंदा करेंगे इन सबसे घबराना नहीं गिरने से डगमगाना नहीं आज तक जो कुछ न गिरने के लिए प्रतिबद्ध था वह सब लेकर गिरो धर्म लेकर गिरो कर्म लेकर गिरो देश लेकर गिरो भेस लेकर गिरो पेड़ लेकर गिरो रेंड़ लेकर गिरो पानी लेकर गिरो पहाड़ लेकर गिरो सावन लेकर गिरो अषाढ़ लेकर गिरो प्रकृति लेकर गिरो संस्कृति लेकर गिरो विकृति लेकर गिरो ओ वर्तमान सदी के महानतम महापुरुष पूरी कायनात को दिखा दो कि तुम और कितना गिर सकते हो कल हो सकता है कि तुम्हारा गिरना देखकर ही लोगों में उठने की कामना जाग उठे आनेवाली पीढ़ियों को उठने का अर्थ बताने के लिए कम और ज़्यादा गिरने का फ़र्क बताने के लिए गिरो! बिना किसी की फ़िक्र सिर्फ़ और सिर्फ़ गिरो! गिरते रहो! जब तक गिरने की प्रक्रिया निष्क्रिय न हो जाय !!! गिरो! गिरो! गिरो!

Supriya Shrinate

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जोधपुर एयरपोर्ट पर आज मीडिया से बातचीत - बजट में जोधपुर और मारवाड़ की उपेक्षा होने तथा जोधपुर के जनहित के प्रोजेक्ट्स को नज़रअंदाज किए जाने पर: पंचायत चुनाव होने ही हैं, स्थानीय निकायों के पंचायत चुनाव भी होने ही हैं और कांग्रेस कामयाब होगी। समय पर चुनाव होना आवश्यक था। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार कह चुके हैं कि चुनाव समय पर कराए जाएं। संवैधानिक संशोधन के बाद समय पर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, लेकिन इन्हें बिना वजह लंबा खींचा जा रहा था। अब कोर्ट के आदेश के बाद मुझे उम्मीद है कि चुनाव कराना पड़ेगा। मुख्य बात यह है कि जो बजट आया, उसमें जोधपुर और पूरे मारवाड़ की उपेक्षा हुई है। मारवाड़ की स्थिति अलग है-जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जालौर, सिरोही और पाली-इन क्षेत्रों में अकाल और सूखे की स्थिति रही है। कई ऐसी योजनाएं थीं जिन्हें हाथ में लिया जाना चाहिए था। हमने राजीव गांधी लिफ्ट योजना के थर्ड फेज पर राज्य सरकार के खर्च से लगभग चौदह सौ करोड़ रुपये लगाए। काम शुरू हुआ, लेकिन धीमा पड़ गया। यदि मैं केंद्र सरकार के भरोसे रहता कि तुरंत फंडिंग आएगी, तब शुरू करेंगे, तो आज तक वह काम शुरू भी नहीं हो पाता। पूरे जोधपुर जिले के गांवों और आसपास के इलाकों में पीने का पानी पहुंचाना है, लेकिन उपेक्षा की जा रही है। जो काम पूरे हो चुके हैं-अस्सी करोड़ रुपये का स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट बना हुआ है, पर बंद पड़ा है और खिलाड़ियों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी शानदार भवन बनने के बावजूद बंद पड़ी है। दिगाड़ी, प्रतापनगर, चैनपुरा और मगरा पूंजला में अच्छी इमारतें बन गई हैं, लेकिन अस्पतालों में न डॉक्टर लगाए गए हैं, न उपकरण पहुंचे हैं। सरकार को इतना उपेक्षापूर्ण रवैया नहीं रखना चाहिए था। फिनटेक यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग का काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है। इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद जोधपुर की उपेक्षा क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है। रिफाइनरी को लेकर बार-बार झांसा दिया जा रहा है। अगस्त में उद्घाटन की बात कही गई थी, फिर क्यों नहीं हुआ? गृह मंत्री कई बार जोधपुर आ चुके हैं। यहां स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, सुमेर लाइब्रेरी है-जो काम अधूरे पड़े हैं, उनका ही उद्घाटन करवा देते। रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री से क्यों नहीं करवा रहे? बार-बार तारीख बदल रहे हैं। आखिर राज क्या है? इस बजट ने राजस्थानवासियों को पूरी तरह निराश किया है। ऐसा निराशाजनक बजट पहले कभी नहीं आया। पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश है, हर क्षेत्र में असंतोष है। पेमेंट बकाया है। बुजुर्ग पेंशन हो, बच्चों की स्कॉलरशिप हो, छात्रों की स्कूटी हो-तमाम विभागों के बजट लंबित पड़े हैं। पीएचईडी हो, इरिगेशन हो, पीडब्ल्यूडी हो-कहीं काम नहीं हो रहे। भुगतान नहीं हो रहा और कहा जा रहा है कि रेवेन्यू बहुत बढ़ गया है। रेवेन्यू तो हर साल बढ़ता है, लेकिन वह बढ़कर जा कहां रहा है? भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा? ठेके के सारे काम बंद पड़े हैं। ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। समझ में नहीं आता कि ये लोग क्या कर रहे हैं। मीडिया द्वारा कहने कि राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा हो रही हैं : यदि सरकार का एजेंडा यही है, और केंद्र सरकार व यूपी सरकार का भी यही एजेंडा है, तो फिर हिंसा होगी ही होगी। फ्रीबीज़ और चुनाव से पहले कैश ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर जवाब : सुप्रीम कोर्ट की मंशा कुछ और थी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय आप पैसा बांटते हैं, जैसे बिहार में हुआ। परसों पोलिंग है और आज दस-दस हजार रुपये बांटे जा रहे हैं। हर फेज में पैसा बंटता रहा और इलेक्शन कमीशन ने रोक नहीं लगाई। कल्पना कीजिए, तमिलनाडु में एक बार वोटरों को कुछ कपड़े दिए गए थे। उस समय टी.एन. शेषन चुनाव आयुक्त थे। उन्होंने चुनाव से तीन दिन पहले मतदान स्थगित कर दिया था। लेकिन बिहार में पैसा बंटता रहा और सब चुप रहे। ऐसे में लोकतंत्र कैसे कायम रहेगा? यह लोकतंत्र की हत्या है। एआई में हम पीछे न रहें, यह हम सबका प्रयास होना चाहिए : एआई बहुत महत्वपूर्ण है। राजस्थानवासियों को उसमें पूरा रुचि लेनी चाहिए। यह पूरी दुनिया में एक क्रांति है। हम पीछे न रहें, यह हम सबका प्रयास होना चाहिए-युवा पीढ़ी का भी और सभी वर्गों का। किसान हो, मजदूर हो, उद्योग हो, मेडिकल व स्वास्थ्य क्षेत्र हो या शिक्षा-हर क्षेत्र में यह चमत्कार साबित हो सकता है। मैं स्वयं इसका बहुत उपयोग करता हूं और अपने हर काम में इसे शामिल करता हूं।

Ashok Gehlot

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पत्रकार का सवाल: अशोक गहलोत साहब अब राजस्थान में ही राजनीति करेंगे या दिल्ली जाएँगे? मेरा जवाब: देखिए, मैंने पहले भी कहा है और आज फिर दोहराता हूँ- 'मैं थांसू दूर नहीं' (मैं आपसे दूर नहीं हूँ)। अब मैं चाहे लंदन जाऊँ, दिल्ली जाऊँ, जयपुर रहूँ, जोधपुर जाऊँ या जालौर जाऊँ, मैं राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता। मैं कहीं भी रहूँ, राजस्थान वासियों की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य और धर्म है। राजस्थान की जनता ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, छह बार विधायक बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया और तीन-तीन बार मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी दी। तीन बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी बात नहीं होती! श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी ने मुझ पर भरोसा जताकर न सिर्फ मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पाँच-पाँच साल तक काम करने का अवसर दिया। पूरे हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहाँ अक्सर मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं। मुझे इस पार्टी और जनता से सब कुछ मिला है। अब मेरा यह फ़र्ज़ बनता है कि मैं अपने लिए किसी पद की माँग न करूँ। पार्टी मुझे जो भी ज़िम्मेदारी देगी, चाहे वह जोधपुर की हो, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की हो, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूँगा, लेकिन खुद से कोई माँग नहीं करूँगा। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, मुझे मंज़ूर है। मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ (Politician) हूँ। जब मुझे पार्टी से बिना माँगे सब कुछ मिला है, मैं इंदिरा गांधी जी के समय ही केंद्रीय मंत्री बन गया था तो फिर अब मैं किसी पद की लालसा क्यों रखूँ? आज देश और पार्टी के सामने बहुत बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिन्हें हमें गहराई से समझना होगा। हमारा एकमात्र लक्ष्य पार्टी को हर स्तर पर मज़बूत करना है। राहुल गांधी जी ने स्पष्ट रूप से आह्वान किया है कि दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों (Minorities) पर कहीं भी कोई अन्याय या अत्याचार हो, तो कांग्रेस कार्यकर्ता तुरंत उनके पास पहुँचे, उनके सुख-दुख का साथी बने और ज़रूरत पड़ने पर उनके हक के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करे। राहुल जी की इस बात में हमारी भविष्य की पूरी राजनीति और सेवा का मर्म आ जाता है।

Ashok Gehlot

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कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस महासचिव Sachin Pilot जी ने 'न्याय पथ' प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए रखा। आज से ठीक 100 साल पहले महात्मा गांधी जी ने कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष पद संभाला था, उसी के साथ ये सरदार पटेल की 150वीं जयंती है। देश में जो हालात बने हैं, वो सबके सामने हैं। पिछले दस साल में महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और धार्मिक ध्रुवीकरण ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। इसलिए कांग्रेस अब नफरत, नकारात्मकता और निराशा के वातावरण को बदलकर न्याय और संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। जो लोग राष्ट्रवाद का चोला ओढ़कर वोट बटोरने का काम करते हैं, मैं उन्हें बता दूंं कि कांग्रेस पार्टी का जन्म देश की आजादी के लिए हुआ था। कांग्रेस पार्टी के इतिहास में हमारे नेताओं ने जो कुर्बानियां दी हैं, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण पूरी दुनिया में नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने देश को अखंड रखने के लिए छाती पर गोलियां खाई हैं- ये कांग्रेस का राष्ट्रवाद है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश को जोड़ने का है, BJP का का राष्ट्रवाद देश को तोड़ने का है। कांग्रेस का राष्ट्रवाद देश की अनेकता को एकता में मिलाने का है और BJP का राष्ट्रवाद अनेकता को खत्म करने का है। अब समय आ गया है कि धर्म-जाति, भाषा, क्षेत्रवाद, पहनावा और खानपान की दुहाई देकर सत्ता को हथियाने वालों को कड़ा जवाब दिया जाए, आईना दिखाया जाए। जो लोग आज कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की बात करते हैं, मैं उन्हें बता दूं कि राजीव गांधी जी जब प्रधानमंत्री बने थे, तब कांग्रेस के पास 400 से ज्यादा सांसद थे.. लेकिन हमने उन्हें ये बोलते हुए कभी नहीं सुना कि वे विपक्ष मुक्त देश बनाना चाहते हैं। कांग्रेस की जड़ें गुजरात के साथ ही पूरे देश में बहुत गहरी हैं। वे याद रखें कि 400 पार का नारा देने वालों को देश ने आईना दिखा दिया। देश का सद्भाव सर्व धर्म समभाव सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने 1948 में जयपुर के अधिवेशन में कहा था कि कांग्रेस और कांग्रेस की सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि भारत एक सच्चा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हो। हमारी अलग-अलग पृष्ठभूमि है, संस्कृति एवं वेशभूषा है, लेकिन जो लोग उत्तर-दक्षिण के राग में धर्म, जाति, गोत्र के नाम पर बांटना चाहते हैं उन लोगों से हमें सावधान रहना पडे़गा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रतिबद्ध है कि धार्मिक, भाषाई और जातिगत व क्षेत्रीय बंटबारे को आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे। हमारा नारा है- नफरत छोड़ो- भारत जोड़ो आधी आबादी और पूरा हक काग्रेस का हक है, एनीबेसेंट जी, सरोजनी नायडू जी, नेली सेन गुप्ता जी, इंदिरा गांधी जी एवं सोनिया गांधी जी ने महिलाओं के अधिकारों को पहली पंक्ति में लाने का काम किया है। पिछले एक दशक में भारत में अपराध इतने बढ़ गए हैं कि भारत मां की आत्मा छलनी हो गई है। केंद्र की भाजपा सरकार के आदेश पर महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटा गया, मणिपुर में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर निर्वस्त्र कर घुमाया गया, हाथरस से लेकर उन्नाव तक भारत मां के सीने पर ऐसे हजारों घाव हैं। देश की बेटियों के बारे में BJP के मुख्यमंत्री, सांसद और नेता जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसका हमें विरोध करना पड़ेगा। हमने संकल्प लिया है कि किसानों को MSP पर उनका कानूनी अधिकार देंगे और 50% से ऊपर समर्थन मूल्य किसानों को मिलेगा। श्वेत क्रांति, हरित क्रांति, MSP ये सब कांग्रेस सरकार की देन है। किसान विरोधी BJP सरकार तो तीन काले कानून लेकर आई जिसके बाद किसानों ने लंबा आंदोलन किया, 700 किसान शहीद हुए, इसके बाद इस BJP सरकार ने तीन कानून वापस लिए। जमीन अधिग्रहण को लेकर राहुल गांधी जी ने भट्टा पारसौल में आंदोलन किया जिसके बाद जमीन अधिग्रहण का कानून बना। डॉ. मनमोहन सिंह जी की सरकार में 10 साल में 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया, 8% की GDP ग्रोथ हुई। आज 1% अमीर लोगों के पास देश की 40% संपत्ति है, जो निचले 50% लोग हैं उनके पास मात्र 6.5% संपत्ति है। आज का संकल्प है- इस अधिवेशन की आवाज पूरे देश के हर गांव में पहुंचे। जिस मजबूती के साथ राहुल गांधी जी मोदी सरकार को चुनौती देने के लिए बढ़ रहे हैं, उनके साथ कंधे से कंधे मिलाकर हमें राजनीतिक विजय प्राप्त करनी पड़ेगी जिसके लिए हमें संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है। न्याय का संकल्प संघर्ष का पथ हम सभी कार्यकर्ता मजबूती के साथ कांग्रेस की असीम संगठनात्मक क्षमता, दक्षता और कार्यकुशला के आधार पर अधिक से अधिक विस्तार करें और भारतवासियों के लिए न्याय के संकल्प को साकार करें। ये संघर्ष रंग लाएगा और विजय दिलाएगा। चले संघर्ष आठों याम तुमसे, करेंगे अन्त तक संग्राम तुमसे। हमारे न्याय की संकल्पना साकार होगी कांग्रेस की फिर जय-जयकार होगी

Congress

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