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तुम्हारी हर कहानी में मैंने अपना पक्ष खोजा पर सच यह है कि मैं अक्सर ख़ुद को ही चुनता रहा मेरी चुप्पियाँ तुम्हारे सवालों से भारी थीं और मेरा ठहराव तुम्हारे इंतज़ार पर मैंने चाहा कि तुम समझो पर कभी यह नहीं सोचा कि समझाने की ज़िम्मेदारी मेरी भी...

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क्या मुझे कुए में डूब कर मर जाना चाहिए ? सार्वजनिक सभा में मेरे ही समाज के चुने हुए एक सांसद मेरे मरने की कामना कर रहे है । उन्हें बेहद अफ़सोस हो रहा है कि मैं ज़िंदा ही कैसे हूँ । मैं भी समाज की बेटी हूँ ,बहन बेटी सबकी सांझी होती है।इसलिए संपूर्ण किसान वर्ग से पूछना चाहती हूँ कि मैंने ऐसा क्या गुनाह किया कि मुझे कुए में गिरकर मर जाना चाहिए ? मैंने पूरी ईमानदारी व श्रद्धा से ओसियां व राजस्थान के किसान वर्ग की हमेशा आवाज़ बुलंद की,क्या यही मेरा गुनाह है? विकट पारिवारिक परिस्थिति में भी मैंने हार नहीं मानी,मैं घर नहीं बैठी, मैंने मेहनत की और जनता से संवाद व जुड़ाव रखा और कारवाँ बनता चला गया । मैंने संघर्ष किया और यह संदेश देने की कोशिश कि किसान वर्ग की बेटिया भी बखूबी राजनीतिक लड़ाइया लड़ सकती है । मैं राजस्थान के हर किसान से पूछना चाहती हूँ कि क्या मुझे मर जाना चाहिए ?

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500TH SHOW OF KUCH BHI HO SAKTA HAI! 😍😎🏆 आज जयपुर में मैं अपने autobiographical नाटक “कुछ भी हो सकता है” का 500वाँ शो #RajasthanInternationalCentre में करने जा रहा हूँ। यह सोचकर ही मन भावनाओं से भर जाता है कि 23 साल पहले शुरू हुआ यह सफ़र आज इस मुकाम तक पहुँच गया है।😍 यह नाटक मेरे जीवन की कहानी है। मेरे संघर्षों की, मेरी असफलताओं की, मेरे सपनों की और उन लोगों की जिन्होंने मेरी यात्रा को आकार दिया। इस नाटक में जिन-जिन लोगों का ज़िक्र है—मेरे माता-पिता, मेरे दोस्त, मेरे शिक्षक, मेरे साथी कलाकार, मेरे निर्देशक, निर्माता और जीवन में रास्ते में मिले अनगिनत लोग—मैं आप सभी का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। आप सबके बिना यह कहानी कभी पूरी नहीं हो सकती थी।🙏😍 मैं हमेशा कहता हूँ कि यह नाटक मेरी असफलताओं की कहानी है। लेकिन शायद मेरी सबसे बड़ी पहचान यही है कि मैं अपनी असफलताओं की ही एक सफलता की कहानी हूँ। सबसे बड़ा धन्यवाद मैं दुनिया भर के उन दर्शकों और प्रशंसकों को देना चाहता हूँ जिन्होंने पिछले 23 वर्षों में इस नाटक को इतना प्यार दिया कि मैं आज 500 शो तक पहुँच पाया। आपकी तालियाँ, आपकी हँसी, आपकी भावनाएँ और आपका प्यार ही इस नाटक की असली ताकत है। आज मंच पर खड़े होकर मैं एक ही बात सोचूँगा कि अगर दर्शकों का साथ यूँ ही मिलता रहा, तो शायद एक दिन हम 1000 शो का जश्न भी मनाएँगे। क्योंकि आखिरकार…“कुछ भी हो सकता है।”🎭#500ThShow #Gratitude #ThankYou

Anupam Kher

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प्रिय मुंबई, 3 जून 1981 को मैं सपनों से भरी आँखों और उम्मीदों से भरे दिल के साथ तुम्हारे पास आया था। आज तुम्हारे साथ 45 साल पूरे कर रहा हूँ। क्या ही उदार शहर हो तुम! तुमने शिमला के एक साधारण लड़के को अपनी बाँहों में जगह दी, उसे संघर्ष भी दिए, सफलताएँ भी दीं, ठोकरें भी दीं और उनसे सीखने की ताकत भी दी।🙏🕉 तुमने मुझे सिखाया कि मुश्किल समय में हिम्मत कैसे रखी जाती है, सफलता मिलने पर विनम्र कैसे रहा जाता है, और जीवन को उसके हर रंग में कैसे जिया जाता है। तुम्हारी लोकल ट्रेनों से लेकर तुम्हारी भागती-दौड़ती सड़कों तक, हर जगह ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है।😍🥹 तुम्हारा दिल दुनिया के किसी भी शहर से बड़ा है। तुम हर किसी को अपनाती हो, और हर किसी को यह एहसास कराती हो कि वह तुम्हारा अपना है। आज, जब मैं तुम्हारे साथ अपने 45 वर्ष पूरे कर रहा हूँ, तो मैं तुम्हारा और माँ मुंबा देवी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके नाम पर तुम्हारा नाम पड़ा।🙏🙏 तुम्हारे प्यार, तुम्हारी गर्मजोशी, तुम्हारी सीखों और तुम्हारी उदारता के लिए जितना धन्यवाद करूँ, उतना कम है।🥹🥹 तुमने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज़्यादा दिया है। धन्यवाद मुंबई! तुम्हारा आशीर्वाद यूँ ही बना रहे। जय मुंबई!❤️🥹❤️ #45YearsInMumbai #Gratitude #ThankYou #Mumbai

Anupam Kher

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प्रिय बेटा बड़कू नवरात्रि का अवसर है । घर घर में आरती हो रही है “पूत कपूत सुने हैं पर न माता सुनी कुमाता “ । मुझे यह भरोसा नहीं हो रहा है कि वाकई में मेरा कोई बेटा “कपूत” भी हो सकता है। मुझे मजबूरी में वह वीडियो जारी करना पड़ रहा है जिसमें मुझे पीटने का सच तुम्हारे नाना और मेरे पिता जी बयान कर रहे हैं। मेरी वही बहन जिसके साथ तुम्हारे पिता जी और मेरे पति रघुराज सिंह ने अवैध संबंध बनाये और उसका जीवन बर्बाद किया और मेरा भी जीवन बर्बाद किया। वही बहन मुझे जब पीट रही थी तो मैंने उसका प्रतिकार किया। खैर सभी को पता चल जाएगा यह सच भी । अभी कई और वीडियो हैं जिसमे तुम्हारे पिता श्री के बारे में तुम्हारे बाबा बड़े महाराज और दादी जी बहुत कुछ कह रही हैं। उन्होंने इनके कृत्यों से ही आजिज आकर यहाँ तक कहा कि वे उनकी मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भी नहीं करें। यह सब कुछ मैं पब्लिक डोमेन में एक के बाद एक जरूर डालूँगी । मुझे पता है बेटा तुम्हारी मजबूरी। तुम्हें सारा सच पता है। तुम भी मेरे साथ सड़क पर जाने को मजबूर किए गए थे। रात में मुझे तुम सभी बच्चों के साथ घर से बाहर सोना पड़ा था। मुझे उम्मीद है तुम्हें सद्बुद्धि भी आएगी और सोचोगे कि तुम्हारी माँ के साथ क्या किया गया था और माँ ने कितनी प्रताड़ना एक व्यक्ति की अय्याशी और आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से झेली है। किस मजबूरी में माँ ने मुँह खोला। फिर भी तुम बेटा अपने करियर के लिए और सुख सुविधाओं के लिए जो भी कर रहे हो उससे मुझे एतराज नहीं। मैं चाहती हूँ दुनिया की सारी ख़ुशी तुम्हें मिले। बस तुम्हें दुनिया मेरा नालायक बेटा न कहे। सारे साक्ष्य एक के बाद एक मिलेंगे। फ़िलहाल वह सच जो तुमने किसी दबाव में आधा बताया , आधा छिपाया और जितना बताया वह भी झूठ । एक बार देखो और फिर हो सके तो एक बार और लिखना । बेटा मैं मजबूर हूँ ! जवाब तो देना ही पड़ेगा। और हाँ अंत में फिर दोहरा रही हूँ मेरे चरित्र हनन से कुछ नहीं होगा यह जाँच एजेंसियों को बताना ही होगा कि इतने अवैध हथियारों का जखीरा कहाँ से आया और क्या कोई इसके पीछे आपराधिक गठजोड़ है। क्या कोई बड़ा अंतर्राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह से इसका संबंध है। मार पिटाई के मैनिपुलेटेड वीडियो तुम्हारे पापा की मदद नहीं कर पायेंगे। क्योंकि उनका अपराध बहुत बड़ा है और लोगों की सुरक्षा के लिए उनका कृत्य बहुत खतरनाक भी है। तुम्हारी माँ

Bhanvi Kumari Singh Bhadri

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4 फ़रवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान दिए गए अपने भाषण के दौरान अपनी तरफ से आरंभ में ही इस बात को स्पष्ट रूप से कहा था कि राष्ट्रपति का अभिभाषण, राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाने का एक बेहतरीन अवसर था, पर वे बातें अभिभाषण में प्रलिखित नहीं होती, इसी भाव के साथ मैंने सामाजिक न्याय से लेकर संसदीय तंत्र पर पर तथ्यों पर मैं अपने बातें रखी थी। लेकिन राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलोड किए गए भाषण को शब्दशः पाठ की समीक्षा करने पर मैंने पाया कि मेरे भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी उचित औचित्य के या तो expunge दिया है या बिना किसी उचित justification से हटाया गया है। मैंने जो समीक्षा की है, उसमें पाया है कि मेरे भाषण के अन recorded portions वे हैं, जिसमें मैंने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज पर तथ्यों के साथ टिप्पणियां की है और प्रधानमंत्री जी की चंद नीतियों की आलोचना की है, जो कि नेता प्रतिपक्ष होने के कारण मेरा यह दायित्व भी है, क्योंकि मुझे लगता है कि वे नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। मेरा संसदीय जीवन पांच दशक से अधिक अधिक का है। लंबे समय तक विधायक और सांसद के रूप में मैंने काम किया है और हमेशा मैंने सदन की गरिमा, नियम, परंपराओं और पीठासीन अधिकारी के कर्तव्य की जानकारी के साथ हमेशा भाषा की मर्यादा के प्रति सजग और सचेत रहा हूँ। कहाँ किन बातों को निकाला जा सकता है, इसमें पूरी तरह मैं वाकिफ हूं और कुछ जानता हूँ। इसीलिए मैं आपसे विनती करना चाहता हूँ कि मेरी टिप्पणियां हटाई गई है, उनमें कुछ भी असंसदीय या defamatory words नहीं है और न ही इसमें नियम 261 का कहीं उल्लंघन भी मैंने नहीं किया है। मेरी कही गई बातें स्पष्ट रूप से चर्चा के अधीन विषय से संबंधित थी। वे पूरी तरह से धन्यवाद प्रस्ताव के दायरे में आते थे और इसलिए मुझे लगता है कि मेरे भाषण का इतना बड़ा हिस्सा काटना, हटाना ये democracy के खिलाफ है और Freedom of Speech के खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद 105 (1) के तहत सांसदों को मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र के अधिकार को लेकर भी चिंता प्रकट करता है। इसीलिए मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि हटाए गए अंशों पर पुनर्विचार करते हुए बहाल किया जाए। आप मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं आप जनता के बीच अन recorded version को साझा करने को बाध्य होगा। उस वक्त मुझे आप यह नहीं कहना, आपने Rules of Procedures का उल्लंघन किया है।

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#WATCH कोलकाता: कथा वाचक जया किशोरी ने कहा, "वह बैग कस्टमाइज्ड बैग है और उसमें कहीं भी लेदर नहीं है... कस्टमाइज्ड का मतलब होता है कि आप इसे अपनी मर्जी से बनवा सकते हैं। इसलिए इस पर मेरा नाम भी लिखा है। मैंने कभी लेदर इस्तेमाल नहीं किया और ना ही कभी करूंगी। जो लोग मेरी कथा में आए हैं, वे अच्छी तरह जानते हैं कि मैं कभी नहीं कहती कि सब कुछ मोह माया है, पैसा मत कमाओ या सब कुछ त्यागो। मैंने कुछ त्यागा नहीं है, तो मैं आपको ऐसा करने के लिए कैसे कह सकती हूं? मैं पहले दिन से ही स्पष्ट हूं कि मैं कोई संत, साधु या साध्वी नहीं हूं। मैं एक सामान्य लड़की हूं, मैं एक सामान्य घर में रहती हूं, मैं अपने परिवार के साथ रहती हूं...मैं युवाओं से भी यही कहती हूं कि आप मेहनत करें, पैसा कमाएं, खुद को एक अच्छी जिंदगी दें और अपने सपने पूरे करें..."

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Umashankar Singh उमाशंकर सिंह

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सच से लोगों को सबसे ज़्यादा डर तब लगता है, जब वह उनके एजेंडे के अनुकूल नहीं होता। कुछ दिन पहले मैंने राम मंदिर में हुई चोरी के बारे में जो कहा, पूरी ईमानदारी और ज़िम्मेदारी से कहा। आज भी अपने हर शब्द पर कायम हूँ। लेकिन कुछ लोगों को सच से ज़्यादा एक मुद्दा चाहिए होता है। उन्हें बहस चाहिए, विवाद चाहिए, शोर चाहिए। इसलिए बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ मैं न पहले कभी डरा हूँ, न आज डरता हूँ, और न आगे डरूँगा। ट्रोल्स हों, तथाकथित इन्फ्लुएंसर्स हों या नेता! किसी के शोर से मेरी बात नहीं बदलेगी। जो मुझे सही लगेगा, मैं वही कहूँगा। आप सहमत हों या असहमत, यह आपका अधिकार है। लेकिन सच बोलना मेरा अधिकार भी है और मेरा कर्तव्य भी। बाक़ी… जिसे जो करना है, वह करे। मैं जैसा हूँ, वैसा ही रहूँगा। जय श्री राम! 😍🕉🙏

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