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थाना निज़ामाबाद के फरिहा मे निज़ामाबाद पुलिस का रौद्र रूप देखिए.... पहली आवाज मे दरोगा जी कह रहे है - खोल रे... फिर उसके बाद दया की तरह दरवाजा तोड़ने चले थे वो भी नहीं कर पाए.... फिर बाहर से दरवाजा बंद कर दिए.... जरूरी थोड़ी है की जो...

128,954 次观看 • 5 个月前 •via X (Twitter)

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सीसीटीवी फुटेज के अलावा देवेंद्र जी बुढ़िया का एक वीडियो सामने में आ रहा है.जिसमें वो अपनी थार को लेकर निकल रहे है और आगे जल्दबाजी में एक व्यक्ति द्वारा दरवाजा बंद किया जा रहा है और फिर दरवाजे बंद करने वाले के ऊपर गाड़ी चढ़ते चढ़ते रुक गई हो सकता है कि एक दम से दरवाजा बंद करने के कारण यह गलती हो सकती है .. और जिसके बारे में बोला जा रहा है कि बच्चे के दोनों पैर टूट गए गाड़ी को ऊपर चढ़ाने से लेकिन वीडियो में साफ दिख रहा है कि पैर टूटे होते तो वह खड़ा होकर कैसे जा रहा है..?? फिर आप वीडियो में देख पा रहे है बुढ़िया जी को कैसे मारा जा रहा है..? हा बुढ़िया जी की गलती सीसीटीवी में साफ दिख रही है कि उन्होंने हॉस्पिटल स्टाफ को थप्पड़ मारा ..? इस वीडियो को सही से देख के एक बार सारी चीजों पर गहन चिंतन की जरूरत है..!

संगीता माँझु बिश्नोई

16,551 次观看 • 6 个月前

राजस्थान में राज RSS वाले कर रहे, ये खाली मुखौटे हैं जोधपुर में आज मीडिया से बातचीत की: अशोक गहलोत का जवाब: देखिए राजनीति में जो है, झूठे आरोप नहीं लगाए जाते हैं। अगर आपके पास तथ्य है, तो उस पर बात करो। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब भी वो लगातार आरोप लगाते थे। उनकी जो प्रकृति में है कि वो, आंदोलन करते रहते हैं लगातार, आप देखते हो उनको 15-20 साल से। तो एक अलग किस्म का प्राणी हैं वो। वो पहले भी आरोप लगाते थे अब भी लगा रहे हैं, अनावश्यक है। पार्टी के जो अध्यक्ष होते हैं उनकी एक अलग प्रतिष्ठा होती है। उस पे आप बार-बार चोट कर रहे हो। आरोप लगा रहे हो बिना तथ्यों के। तो आप बताइए कि पार्टी में रिएक्शन होगा? हमारी पार्टी में रिएक्शन है। डोटासरा जी को खुद को लगता है भाई ये क्या आरोप लगा रहा है वो भी बिना तथ्यों के। हम सब को लगता है। ये किरोड़ी मीणा जी को खुद को सोचना चाहिए, वो क्या किस प्रकार की उनकी अप्रोच है काम करने की है। छापे डाल रहे हैं और छापे के साथ जो जाते हैं लोग उनके, वसूली करते हैं वो। ये तो प्रूव हो गया है। जब प्रूव हो गया है तो कहते हैं कि एसीबी भी दबाव में काम कर रही है। तो भाई एसीबी तो दबाव में जब से डीजी साहब आए हैं, पहले मैंने कहा ये आदमी तो भला है डीजी। वो पूरी तरह सीएमओ के और सीएम के दबाव में है ये। और इनके जो नीचे अधिकारी है, वो भी इनकी बात नहीं मानते हैं। वो इनको उल्टा दबाते हैं। तो मुझे लगता है कि एसीबी का जो डीजी है, वो खुद परेशान होगा, मेरे ख्याल से जहां तक मैं समझता हूँ या जहाँ तक मेरे पास वहां से रिपोर्ट आती है। वहाँ के जो काम करने वाले अधिकारी कहते हैं ना कि भाई क्या हो रहा है हमारे यहाँ? स्थिति एसीबी की बहुत भयानक खराब है। दबाव में काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को ऑबलाइज करने के लिए फैसले हो रहे हैं। आईओ कह रहा भाई ये मुल्जिम नहीं बनता हमारा। और ऊपर से कहते हैं डीजी साहब और जो दबाव आता है उनके ऊपर, नहीं आप इनको अरेस्ट करो। ऐसा मैंने आज तक कभी देखा नहीं। तीन-तीन बार हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। एसीबी में कोई पंचायत नहीं करनी चाहिए किसी को भी। यहाँ पंचायतें नहीं हो रही हैं। आईओ कह रहा भाई ये अरेस्ट नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें कोई केस नहीं बनता। आप इसको अरेस्ट कीजिए। अरेस्ट हुए भी हैं, जिनमें महेश जोशी भी हैं। आईओ ने मना किया। वो ऑलरेडी द्वारा वैसे ही केस में अरेस्ट हो चुके थे। यहाँ वापस अरेस्ट कर लिया, क्या मजाक बना रखी है? क्या मुख्यमंत्री को दिखता नहीं है कि ये क्या हो रहा है? उनका खुद का नाम आता है कि दबाव आता है। शायद आरएसएस वालों का आता होगा। आरएसएस के दबाव होने के बाद में मुख्यमंत्री हथियार डाल देते हैं। राज आरएसएस कर रहा है ये तो मुखौटे हैं खाली। मुझे लगता है कि राजस्थान के अंदर आजकल जो ये लोग राज करते हैं ये मुखौटे बने हुए हैं। राज आरएसएस वाले कर रहे हैं। ट्रांसफर, पोस्टिंग, करप्शन सब वहीं से डायरेक्शन आते हैं। हालात बड़े गंभीर हैं राजस्थान के। ऐसी इनकी स्थिति बनेगी इस बार राजस्थान की, जनता जो है वो जागरूक है। ये कुछ भी कर लें, ये मुख्यमंत्री बदल देंगे ना, तब भी कुछ नहीं होने वाला है, अगली बार सरकार बदल के रहेगी। थैंक यू।

Ashok Gehlot

56,840 次观看 • 3 个月前

प्रदेश के वर्तमान हालात पर मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर बातचीत की : दिक्कतें ही दिक्कतें हैं चारों ओर। सरकार बनते ही ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि दो चार महीने के अंदर ही लोग कहने लगे गवर्नेंस नहीं हो रही, शासन नहीं हो रहा। कुशासन चल रहा है और मैं बराबर आग्रह करता हूं मुख्यमंत्री जी से, वो इसे लेते आलोचना और हम चाहते हैं कि सुधार हो जिससे कि पब्लिक को फायदा मिले। अगर सरकार इन्हीं को रहनी है मान लीजिए इनकी मेजॉरिटी है तो शासन तो यही करेंगे। मगर कुशासन होगा तो पब्लिक में काम नहीं होंगे। आप कल्पना कीजिए कि क्या हालत बने, करप्शन की हदें पार हो गई। चाल, चेहरे, चरित्र एक्सपोज हो गए इनके पर उसके अलावा भी जिस प्रकार से पेमेंट नहीं हो रहे हैं कोई डिपार्टमेंट के अंदर तो फिर क्या हो रहा है? शिक्षा में, स्वास्थ्य सेवाएं तो चरमरा गई है। आप बताइए जिस प्रकार से शिक्षा की स्थिति बनी है, वो तो बड़ी अजीब सी बन गई है। स्कूलें बंद हो रही है, टीचर्स नहीं है और साथ में आपका यह स्वास्थ्य, RGHS का पता ही नहीं है। लोग खुद दुखी हो गए तो चारों ओर से आकर शिकायतें करते जो आप बात पूछ रहे थे हैं वही उसी बात। तो कहने का मतलब है कि हम बार बार कहते हैं मुख्यमंत्री जी को कि कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट, रेप अलग हो रहे हैं, डकैती अलग हो जाती है, फायरिंग करके मार देते हैं ज्वेलर्स को या किसी को। एक के बाद एक घटना, इतने सारे मुद्दे एक साथ हो गए हैं कि विपक्ष की पार्टी भी क्या क्या मुद्दा उठाए? सरकार जब तक खुद आगे नहीं आएगी, पूरा मंत्रिमंडल जब तक उस ढंग से बिहेव नहीं करेगा, जनता के साथ में डिपार्टमेंट की पकड़ नहीं करेंगे, मजबूती से डिपार्टमेंट को कसेंगे नहीं वो, तो नीचे तक जो हालात होते हैं वो बदलेंगे नहीं और नुकसान क्या होगा पब्लिक का। हमें चिंता पब्लिक की है। बाकी तो देखिए शासन तो आते जाते रहते हैं, उन्नीस बीस तो देखो हर शासन में होता है करप्शन तो यह मैं दावा नहीं कर सकता, लेकिन कांग्रेस शासन होते तब नहीं होता है, होता है, पूरे देश में होता है, सब जगह होता है। पर जो इस बार जो जिस रूप में हो रहा है ना तो आम जनता से पूछ लीजिए, मालूम पड़ेगा। स्थिति बड़ी नाजुक है। मैं चिंता कर रहा हूं कि वो ठीक होनी चाहिए।

Ashok Gehlot

43,716 次观看 • 1 个月前

आप ने देखा होगा की जब से रोशन यादव और खान सर के बीच विवाद हुआ है कुछ लोगों को फ्री मे कंटेंट मिल गया है News वालों का फिर भी समझ मे आता है, लेकिन टीचर्स को क्या वो भी बच्चों को इसी मसले मे घसीट लिए है बच्चों का अब पढ़ाई लिखाई से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है l वो या तो खान सर या रोशन सर या फिर प्रिंस यादव मे उलझ कर रह गये है l इस वीडियो मे जो भी बोल rhe है विपिन सर जो भी है जांच का विषय तो है ये सीधा - सीधा frod है l लेकिन इन लोगों से निवेदन है की esme बच्चों को बख्स दें अपने अपने वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा बच्चों को ना बनाएं उन्हें मोहरे की तरह use ना करें 🙏 निष्पक्ष जांच हो और जल्द से जल्द दोषियो को सजा मिले....!! Next वीडियो कमैंट्स बॉक्स मे 👇

Arohi Shukla

55,966 次观看 • 3 个月前

राजस्थान विश्वविद्यालय में NSUI कार्यकर्ताओं के साथ की गई हिंसा से संबंधित प्रश्न का जवाब : इनकी मैं घोर निंदा करता हूं भर्त्सना करता हूं ये देश को प्रदेश को किस दिशा में ले जाएंगे बहुत चिंता लग गई है हम लोगों को कि आप शस्त्र पूजा करवा रहे हो विश्विद्यालय के अंदर, शस्त्र पूजा विश्विद्यालय के अंदर शिक्षा के जो पावन जगह है वहां करवाने का क्या तुक है? क्या मैसेज देना चाहते हैं आप ? अनावश्यक वहां आपस में नइत्तफाकी हुई और जिस प्रकार उनके पास डंडे होते हैं आरएसएस के पास में क्या डंडे इसलिए काम आते हैं जो शांतिपूर्ण तरीके से अहिंसक तरीके से कोई आंदोलन करे जो डेमोक्रेसी में जायज है, धरना देना प्रदर्शन करना यह जायज है डेमोक्रेसी के अंदर और नॉन वॉयलेंस तरीके से अहिंसा के तरीके से उसको आप उन डंडों से पिटाई करो, पिटाई करो, कल मैं मिलके आया मरीज से जो मेघवाल है क्या उसकी पिटाई करी कोई सोच नहीं सकता, टांके आए हैं उसके सिर के ऊपर। बीस बाईस लोगों ने एक साथ उस पर हमला किया। ये आरएसएस का चरित्र कब से बन गया? चाल चरित्र चेहरा बीजेपी आरएसएस बोलते थे, हालात क्या बन गए, किस प्रकार बच्चों को पीटा गया ,151 में बंद किया गया और उसके बाद में और धाराएं जोड़ कर के नॉन बेलेबल बना दिया गैर जमानती बना दिया उनको भेज दिया J.C के अंदर, ये जो स्थिति बनती जा रही है ये बहुत खतरनाक है, विपक्षी पार्टियों के साथ में दुश्मनी की तरह व्यवहार करना डेमोक्रेसी में कहां तक उचित है ? डेमोक्रेसी में तो अगर आप विपक्ष आवाज नहीं उठाएगा तो डेमोक्रेसी किस बात की है ? विपक्ष आवाज उठाएगा आलोचना करेगा तब डेमोक्रेसी जिंदा रहेगी मजबूत रहेगी। जिस दिन आप आवाज बंद कर दोगे विपक्ष को हिंसा के माध्यम से डरा के धमका के, मुकदमे बना कर के, अगर विपक्ष की आवाज बंद हो जाएगी डेमोक्रेसी कहां रहेगी फिर ? ये क्यों नहीं सोचते ये लोग ? ये सोचेंगे भी नहीं कभी मुझे लगता है, पब्लिक को सोचना पड़ेगा ये किस दिशा में ले जाना चाहते हैं देश को मेरा मानना है, और पुलिस दबाव में काम कर रही है, पुलिस कमिश्नर से हम ने बात करी मिस्टर जूली ने बात करी, उन्होंने कहा ठीक है आज सुबह पकड़ा है पेश करेंगे कोर्ट के अंदर शाम तक पेश कर देंगे, पेश क्या करना है, पेश करने के बजाय आरएसएस के दबाव में सरकार के दबाव में और ज्यादा धाराएं जोड़ कर के उनकी ऐसी स्थिति कर दी कि कोर्ट जमानत देना चाहे तो नहीं दे सकता है। JC करवा दी उन लोगों को ये क्या तरीका है बताइए आप लोग। क्या तरीका है, ये NSUI के छात्र हैं उनका हक बनता है कि हम अपनी बात कहें, ये स्थिति कर दी इन्होंने, चुनाव करवा नहीं रहे ये लोग, चुनाव करवाएंगे तो नई लीडरशिप पैदा होगी इन्हीं में से, चाहे वो ABVP के हों चाहे NSUI के हों चाहे AISF के हों या SFI के हों, कोई हों वो चुनाव में तो उतरे मैदान में, रोक अलग लगा दी पिटाई अलग कर रहे हो आप, पिटाई भी कर रहे हो चुनाव नहीं करवा रहे हो ये कहां की समझदारी है बताइए आप ? तो ये स्थिति जो बन रही है वो अच्छी नहीं बन रही है राजस्थान के अंदर भी, माहौल अच्छा था राजस्थान के अंदर, आज स्थिति ऐसी बनती जा रही है। मैं तो घोर निंदा करता हूं जिस प्रकार का व्यवहार कर रही है पुलिस और जो जिस प्रकार से पिटाई की गई इन बच्चों की छात्रों की NSUI कार्यकर्ताओं की मैं इसकी निंदा करता हूं।

Ashok Gehlot

12,213 次观看 • 11 个月前

🚨 योगी जी, हमारी बेटी को बचा लीजिए🚨 पीजीआई थाना क्षेत्र से एक युवती के कथित अपहरण का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि इरशाद अली 20 दिन पहले उनकी बेटी को अगवा कर ले गया, लेकिन अब तक पुलिस उसे बरामद नहीं कर सकी। पिता का दावा है कि इरशाद ने पहले बेटी से राखी बंधवाई, फिर उसे शादी के लिए दबाव और धमकियां दीं। परिवार का आरोप है कि आरोपी बीच-बीच में फोटो भेजकर प्रेम संबंध की बात करता है और फिर मोबाइल बंद कर लेता है। अब बेटी के माता-पिता मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मदद की गुहार लगा रहे हैं। सवाल यह है कि 20 दिन बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है? ⚠️ मामला पीजीआई थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। आरोप परिजनों के हैं, पुलिस जांच जारी है। UP POLICE DGP UP ADG Zone Lucknow LUCKNOW POLICE CM Office, GoUP

Voice of Bharat

28,597 次观看 • 3 个月前

जिसकी शादी में मुख्यमंत्री जी प्रोटोकॉल तोड़कर गये हों, उसकी ही इतनी हिम्मत होगी कि वो किसी पुलिसवाले को सरेआम मारे। जबकि सब कुछ जनता के सामने बीच-बाज़ार हुआ फिर भी भाजपाई दबंगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना के बाद पूरे पुलिस विभाग का मनोबल गिरा है और अंदर-ही-अंदर आक्रोश पनप रहा है। भाजपाईयों द्वारा किये गये अपराधों के ख़िलाफ़ उप्र की भाजपा सरकार ज़ीरो कार्रवाई करती है। जो सरकार पुलिस का मनोबल तोड़ती है वो कहीं-न-कहीं अपराधियों के हौसले बुलंद करती है। भाजपा ये नहीं कह सकती है कि विपक्ष झूठे आरोप लगा रहा है क्योंकि ये तो दिनदहाड़े घटी घटना है, जिसके सैकड़ों गवाह हैं। जो सरकार अपनी पुलिस के मान-सम्मान की रक्षा नहीं कर सकती, वो भला ग़रीब, किसान, महिला व विरोध कर रहे बेरोज़गार युवाओं की हिफ़ाज़त क्या करेगी। #नहीं_चाहिए_भाजपा

Akhilesh Yadav

443,361 次观看 • 2 年前

पश्चिम बंगाल से लौटने के पश्चात आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत की : बंगाल चुनाव में माहौल को लेकर पूछे प्रश्न पर प्रतिक्रिया : चार तारीख का इंतजार कीजिए। ऐसा माहौल है, अच्छी फाइट हो रही है वहां पर और पहले कहना बड़ा आसान नहीं है। चुनाव इस प्रकार का हो रहा है कि अभी भविष्यवाणी नहीं हो सकती है। देखिए वो लोग धन का इतना दुरुपयोग कर रहे हैं,इतना इलेक्शन कमीशन का दुरुपयोग कर रहे हैं। आजादी के बाद में इस बार जो इलेक्शन कमीशन की भूमिका हुई है बंगाल में, मेरी समझ में इस प्रकार का आतंक कभी देखा नहीं। SIR का आतंक अलग है। नब्बे लाख वोट कट गए, उसमें इकत्तीस लाख वोट सही पाए गए और सुप्रीम कोर्ट ने कहा अब आपको बैठाइए ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को, न्यायाधीशों को, वो टीमें बनी। वो भी इकत्तीस लाख को जांच नहीं कर पाई। आप सोच सकते हो। मेरी दृष्टि में तो चुनाव पोस्टपोन क्यों नहीं किया इलेक्शन कमीशन ने ? उनकी पहली ड्यूटी है डेमोक्रेसी बचाने के लिए। चाहे कोई जीतो, चुनाव निष्पक्ष हो, सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसी की है तो है इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की है। उसमें कोई ज्यूडिशियरी हो,प्रशासनिक लोग हो, सरकार हो, कोई मायने नहीं रखती। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। डेमोक्रेसी तभी बचती है जब निष्पक्ष चुनाव हो और चुनाव में कोई पार्टी जीते अलग बात है। वहां पर जो सड़कों पर उतारे गए CISF के या CRPF के बंदूकें लगी बख्ताबंद गाड़ियां, तो क्या हो क्या रहा है देश के अंदर। इस रूप में वहां पर डराया गया, धमका गया और पैसे बांटे जा रहे हैं। मतलब कोई ऐसा साधन नहीं है जो उन्होंने नहीं लगाया हो। वो अलग बात है छह महीने पहले लोगों को बैठा दिया। भेज दिया पूरे देश से लोगों को,कोई छह महीने, कोई तीन महीने। उसमें हम लोग उनकी कुछ शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि वो तो एक तरीका है चुनाव लड़ने का अलग अलग। उन्होंने अपनाया तरीका एडवांस में कैनवसिंग करने का, घर घर जाने का, मैनेजमेंट करने का। उसमें मुझे कोई शिकायत नहीं है। पर शिकायत इस बात की है बाकी जो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, धन का दुरुपयोग हो रहा है और क्या सब काम क्या है वो, बख्तरबंद गाड़ी है, सड़कों पर घूम रही थी वहां पर। इसको हम क्या कहें। SIR के माध्यम से लोगों के वोट कट गए हैं कि लोग वोट दे नहीं पा रहे हैं। अगर वोट यहां पैदा हुआ व्यक्ति नहीं दे पाएगा तो इससे बड़ा क्राइम क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट भी यही कह रहा है। यह माहौल में हम क्या बताएं आपको कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है। कोई व्यक्ति मुझे नहीं मिला जो क्लियर कट अपनी बात कह रहा हो कि साहब ये होने जा रहा है। अगर बीजेपी माइंडेड व्यक्ति कोई मिल गया, पत्रकार भी, तो वो उस ढंग से बात कर रहा है। TMC का पत्रकार मिल गया, उस ढंग से बात कर रहा है और कांग्रेस ने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया कि भाई एक बार हमने जानबूझकर सभी सीटों पर चुनाव लड़वाए हैं क्योंकि पहले करीब तीस बत्तीस से राज किया CPM ने। पंद्रह साल से राज कर रही है आपका ममता जी। अब ये BJP घुस जाएगी वहां मान लो, जो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, चुनाव नाम की चीज तो है ही नहीं। हथकंडे वाला कैंपेन चल रहा है। हथकंडे वाला मैनेजमेंट है चुनाव का। हथकंडे से जीतने का वहां पर षड्यंत्र चल रहा है। अगर उसमें कामयाब हो गए तो सामने आ जाएगा चार तारीख को। फेल हो गए तो ममता जी वापस मुख्यमंत्री बन जाएगी। यह मेरा मानना है। पर चुनाव, जो है इलेक्शन कमीशन के खुद के हारने का जीतने का है। अगर वो जीतेगा तो बर्बाद करके जाएगा ये इलेक्शन कमीशन बंगाल को भी और देश को भी,बर्बादी के रास्ते पर धकेल रहा है चुनाव आयोग देश का। ये मेरा आरोप उनके ऊपर है। और चुनाव आयोग हार गया तो एक सबक मिलेगा चुनाव आयोग को भी। सब कुछ उन्होंने कर लिया तब भी हम जीत नहीं पाए। आप पार्टी के सातों सांसदों के भाजपा में विलय से संबंधित प्रश्न का जवाब : मैंने कहा आपको जो हथकंडे वाले कैंपेन हैं, षड्यंत्र वाले चुनाव हो रहा है तो सोच सकते हो कुछ भी हो सकता है।

Ashok Gehlot

14,501 次观看 • 5 个月前