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दो ही रास्ते हैं, क्षमा याचना या दंड, #शंकराचार्य

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करीब 38 घंटे बीत चुके हैं। शंकराचार्य ने अभी तक शिविर प्रवेश नहीं किया है। वे अब भी इसी बात पर अड़े हुए हैं कि प्रशासन क्षमा याचना करे और ससम्मान संगम स्नान कराए, तभी वे शिविर प्रवेश करेंगे। सतुआ बाबा के दरबार में रोटियां पलटने वाले प्रयागराज प्रशासन को चाहिए, कि कुछ देर के लिए सही, पद-मोह-अहंकार की अपनी इस जड़ मन:स्थिति को पलट दे और शंकराचार्य के आगे क्षमा प्रार्थना करे। कबीर दास क्षमा को सबसे बड़ा तप बता गए हैं। प्रयागराज प्रशासन को इस माघ मेले में अपने अहंकार के त्याग का कल्पवास करते हुए कबीर दास की इन पंक्तियों का स्मरण करना चाहिए- "क्षमा समान न तप, सुख नही संतोष समान। तृष्णा समान नही व्याधी कोई, धर्म न दया समान।"

abhishek upadhyay

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