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दाएम आबाद रहेगी दुनिया हम न होंगे कोई हम सा होगा
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MANOJ KUMAR BALI (मन)9 days ago
दाएम आबाद रहेगी दुनिया हम न होंगे कोई हम सा होगा शहर-ए-दिल में जो तेरा 'क़ब्ज़ा' हुआ देख तो हर तरफ़ ही 'कब्ज़ा' होगा ज़िंदगी इक खुला हुआ 'दर' है देखना है कि कौन 'दर' सा होगा रात के हाथ में जो 'साया' था उस पे अपना ही कुछ 'साया' होगा तूने जिस गुल को जो भी 'रंग' दिया मेरे दामन में भी वही 'रंग' होगा कौन जाने कि इस 'नज़र' के तले किसने क्या-क्या नया 'नज़र' होगा ऐ "मन" इस दौर-ए-बे-वफ़ा में भी तेरी आँखों में कोई 'मन' सा होगा :: मन ::
