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Ana Sayfaya Dön

दीक्षांत समारोह, भारत की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली के समावर्तन समारोह का ही परिवर्तित रूप है...

22,481 görüntüleme • 9 ay önce •via X (Twitter)

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नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है। शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है। ये वाद-संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है। मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया। इस प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है। - पीएम श्री Narendra Modi #MannKiBaat पूरा वीडियो देखें:

BJP

13,033 görüntüleme • 2 ay önce

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रचिंतक, महान शिक्षाविद् एवं राष्ट्र की अखंडता के अमर प्रहरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती पर उन्हें सादर नमन। राष्ट्रहित, एकात्मता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनका अद्वितीय समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा, ऊर्जा और पथप्रदर्शक बना रहेगा। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने BA Honours English में करने के बाद MA बांग्ला भाषा में किया। वे न सिर्फ़ भारतीय इतिहास के सब से कम आयु के भारत के किसी भी विश्वविद्यालय के कुलपति बने अपितु उन्हीं के कार्यकाल में 1937 में कोलकाता विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह बांग्ला भाषा में संचालित हुआ। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर समारोह के मुख्य अतिथि थे। यह अंग्रेज़ों के समय अंग्रेज़ी के स्थान पर किसी भारतीय भाषा में किसी भी विश्वविद्यालय का संभवतः पहला दीक्षांत समारोह था। यह मातृभूमि, मातृभाषा, भारतीयता और भारतीय भाषाओं के प्रति डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिबद्धता, निष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में उस पर अमल करने के साहस का प्रमाण है। भारत और भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता के इन्हीं मूल्यों को प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी ने नये सोपान तक पहुंचाया है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

14,355 görüntüleme • 1 ay önce