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मेरा बेटा पूछ रहा है पापा ! सावन क्या होता है ? मेरी आँखें नम होती हैं उतर रहे दिन बिसरे भूले कुछ कुछ उसको बतलाता हूँ बागों के आँगन के झूले मेरा बेटा पूछ रहा है पापा ! आँगन क्या होता है ? वहीं फ्लैट में लेटे लेटे आतीं याद पुरानी बातें ऑंगन का सामूहिक सोना गरमी की अदहन सी रातें मेरा बेटा पूछ रहा है पापा ! अदहन क्या होता है ? सुनते ही यादों में महकी माटी के चूल्हे की रोटी छौंके हुये चने की खुशबू बिन परथन की रोटी मोटी मेरा बेटा पूछ रहा है पापा परथन क्या होता है ? यह कुछ भोले से सवाल है मगर जवाब कहाँ से लाऊँ महानगर में बँटते खटते उसको मैं कैसे समझाऊँ ? मेरा बेटा पूछ रहा है पापा सावन क्या होता है ? (रचना- ज्ञान प्रकाश आकुल )

बहुत प्यार वीडियो है सर सर आपसे विनती है कभी कभार ऐसे हल्के-फुल्के वीडियो भी आप डालिए जिससे थोड़ा सा मां प्रसन्न हो अच्छा लगे बाकी तो आप अच्छा लिखते ही हैं आशा करता हूं मेरा प्रश्न आप तक जरूर पहुंचेगी धन्यवाद नमस्कार सर

जी बिल्कुल , जीवन के हर पल को जीना ही जीवन है ,मुर्दों की तरह नहीं जीना चाहिए,मैं 20 का हु पर 4 स्टेट्स घूम आया हु,

वाकई जिन्दगी जितने कि नहीं जीने की चीज़ है I

❤️

शानदार तरीके से बयान की जिंदगी की असलियत 👍🏻

Ask her to catch a train from Bandra to Vasai during Peak Hours....! Sab shayaari nikal jayengi..!

Waw.. प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले बॉसेज और सेठों को देखना चाहिए।

सच मैं ज़िंदगी जीतने की नहीं जीने की चीज है 🙏👌

