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देखिए भाई, मामला थोड़ा दिलचस्प है! 🐕🔥 इस कुत्ते ने जैसे ही गमछा सूंघा, ऐसा लगा मानो इसे पूरा राज़ पहले से पता हो। इंसान अपनी आँखों से देखकर भी कई बार समझ नहीं पाता, लेकिन जनाब ने सिर्फ सूंघकर ही सुराग पकड़ लिया! नाक की ताकत देखिए—गमछा बना...

110,468 views • 18 days ago •via X (Twitter)

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Adani vs Vedanta एक समय की इंफ्रास्ट्रक्चर की भारत की दिग्गज कंपनी Jaypee के अधिग्रहण के मुद्दे पर बवाल मचा हुआ है। कंपनी पहले ही दिवालिया हो चुकी थी। उसकी नीलामी में 18,000 करोड़ की बोली लगाते हुए वेदांता ग्रुप ने उसे खरीद लिया था और सौदा कागजों में भी पक्का हो गया था। फिर एक बड़ा ट्विस्ट आया और वेदांता से कम बोली लगाने वाली अदाणी को 14,000 करोड़ में बेच दिया गया। अब इस पर वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भगवद गीता के उद्धरण के साथ पब्लिक में अपनी बात रखी है, साथ ही मामला सुप्रीम कोर्ट भी ले गए हैं। अब इस पूरे मामले में अदाणी के आने से जो ट्विस्ट और टर्न आया, उसके पीछे की कहानी तो नहीं मालूम है, लेकिन जिस वजह से ऐसा किया गया है, वह भी कम दिलचस्प नहीं है।

Ankit Kumar Avasthi

94,002 views • 4 months ago

कारसेवकों पर गोली चली - भाजपा 35 साल से इस एक घटना को बार-बार दोहराती रही है। लेकिन क्या भाजपा अयोध्या का पूरा इतिहास बताने का साहस करेगी? क्या वह बताएगी कि 1990 में अदालत का आदेश क्या था और प्रशासन के सामने परिस्थितियाँ क्या थीं? क्या वह 1992 में सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासनों और उसके बाद हुए विध्वंस की कहानी भी उतनी ही जोर से सुनाएगी? क्या वह बताएगी कि सुप्रीम कोर्ट ने उस विध्वंस पर क्या टिप्पणी की थी? और सबसे दिलचस्प सवाल - 1990 में मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में रहे नृपेंद्र मिश्रा आगे चलकर भाजपा के इतने भरोसेमंद कैसे बने कि नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना प्रधान सचिव बनाया और बाद में वही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बने? भाजपा की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत शायद यही रही है - इतिहास से अपने काम के पन्ने निकालो, बाकी छिपा दो और आधे सच को बार-बार दोहराकर पूरा सच बना दो। इस वीडियो में नारा नहीं, पूरी कहानी है। 1990 भी है, 1992 भी। अदालत के आदेश भी हैं और भाजपा से वे सवाल भी, जिनके जवाब उसके भाषणों में नहीं मिलते। वीडियो देखिए और साझा कीजिए - क्योंकि इतिहास आधा नहीं, पूरा बताया जाना चाहिए।

Dr. Laxman Yadav

67,227 views • 1 month ago

मैं इस डॉक्टर को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा, क्योंकि इस डॉक्टर ने बना-बनाया काम बिगाड़ दिया! यही वह गाय थी जो पिछले 5 से 8 दिनों से लगातार खेत में एक ही जगह पर परिक्रमा कर रही थी। देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुटने लगी, पूजा-पाठ शुरू हो गया, पंडित जी भी सक्रिय हो गए और कई लोग इसे चमत्कार मानने लगे, लेकिन तभी डॉक्टर साहब आए और पता चला कि गाय किसी चमत्कार की वजह से नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य समस्या की वजह से गोल-गोल घूम रही थी। डॉक्टर ने इलाज किया और गाय की परिक्रमा बंद हो गई, अब बताइए, डॉक्टर ने पूरा माहौल ही खराब कर दिया! न भीड़ आएगी, न पूजा होगी, न चमत्कार की चर्चा चलेगी। बेचारे डॉक्टर ने अंधविश्वास पर पानी फेर दिया।

ʀᴜᴅʜʀᴀ ʏᴀᴅᴀᴠ🇮🇳

222,744 views • 2 months ago

आइए, आपको दिल्ली की एक ऐसी घटना बताते हैं जो हमें सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि इंसानियत और संस्कार की ताकत का मतलब समझाती है। भाई साहब अपने आपको ताकतवर समझ रहे थे 2 मिनट में रिक्शा वाले ने इनको सुधार दिया वीडियो में दिखाई देता है कि एक गरीब रिक्शावाला एक व्यक्ति को अपनी मेहनत से उसकी मंजिल तक पहुंचाता है। जब वह अपनी मेहनत का किराया मांगता है तो बात कहासुनी तक पहुंच जाती है और देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल जाता है। शायद सामने वाले को अपनी शारीरिक ताकत पर बहुत भरोसा था। शरीर बनाया जा सकता है, मांसपेशियां मजबूत की जा सकती हैं, लेकिन असली ताकत इंसान के आचरण, व्यवहार और संस्कारों में होती है। जिस रिक्शावाले को कमजोर समझा गया, वह भी आखिर मेहनत करने वाला इंसान है। दिन-रात सड़कों पर पसीना बहाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता है। उसकी कमाई भले कम हो, लेकिन वह अपनी मेहनत की कमाई से जीता है और उसी मेहनत का हक मांगता है। इस घटना से एक बात जरूर सीखनी चाहिए पैसा आपको बड़ा बना सकता है लेकिन सम्मान आपको आपके व्यवहार से मिलता है। गरीबी इंसान को परिस्थितियों से मजबूर कर सकती है, लेकिन उसकी इज्जत नहीं छीन सकती। गरीब आदमी भी सम्मान का हकदार है। उसके साथ अच्छा व्यवहार करना कोई एहसान नहीं, बल्कि इंसान होने की पहचान है। इसलिए चाहे आप जिंदगी में कितने भी बड़े और ताकतवर क्यों न बन जाएं, अपने से कमजोर या गरीब समझे जाने वाले व्यक्ति का अपमान मत कीजिए। क्योंकि शरीर की ताकत कुछ मिनटों की होती है, लेकिन अच्छे आचरण की पहचान जिंदगी भर रहती है। मेरी नजर में इस वीडियो की सबसे बड़ी सीख यही है गरीब की मजबूरी को उसकी कमजोरी मत समझिए। वह भी मेहनत करता है, सपने देखता है और सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार रखता है। आप इस घटना को देखकर क्या सीखते हैं?

Shivam Yadav

208,876 views • 14 days ago

हाथरस बहन #मनीषा वाल्मीकि को अभी तक न्याय नहीं मिलने के पीछे कई कारण हैं, जो मुख्य रूप से कानूनी प्रक्रिया, पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप से संबंधित के चलते 2020 में हुए इस इस गम्भीर घटना में मनीषा के साथ गैंगरेप और अत्याचार हुआ था,लेकिन शुरुआत में पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई। पुलिस की लापरवाही शुरुआत में पुलिस ने पीड़िता की शिकायत को सही तरीके से नहीं लिया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की। इसके कारण मामला पहले ही कमजोर कर दिया हाथरस कांड के बाद इस मामले में कई राजनीतिक हस्तक्षेप हुए, जिससे जांच और न्याय की प्रक्रिया पर असर पड़ा। साथ ही, समाज में इस मामले को लेकर विभाजन भी देखने को मिला,जो न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया लेकिन इसे सही तरीके से आगे बढ़ाने में समय लगा। बहन मनीषा वाल्मीकि को अब तक पूरी तरह से न्याय नहीं मिल पाया! #मनीषा_वाल्मीकि_हाथरस

B_L Bairwa

44,648 views • 1 year ago