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देश को आज़ाद हुए राजशाही खत्म हुए 75 साल हो गये लेकिन इनके चोंचले ही खत्म नहीं हो रहे।
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11 Kommentare

75 saal reservation ko bhi ho chuke hai..tum logo ke chonchle khatam hue?

उनके पास पैसा है जो करे तुम क्यों इतने परेशान हो रहे हो ? ख़ुद को सम्भालो …

भीमटे हो क्या?? सबकी अपनी औकात होती है!! इनकी अपनी गौरवशाली औकात और विरासत है। तुम्हारे जैसे 5000 सालों के प्यासे उसे नहीं समझ पाएंगे!! देश और मिट्टी के गौरव!! शत शत नमन उनकी बहादुरी को।

राजशाही भारतीय संस्कृति परंपरा का हिस्सा है जिस अंग्रेजो का गुण गाते हो शासन का जो ब्रिटिश मॉडल भारत में है वहां भी राजतंत्र है अरब में राजतंत्र है अंग्रेजो के मानसिक गुलामों को केवल भारतीय परंपरा से परेशानी है

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इन्हीं चोचलों की वजह से ये तेरी बिरादरी वाले जो छत्र, चंवर, झाल लेकर चल रहे हैं उन्हें रोजगार मिला है और कुछ घोड़ों की लीद साफ कर रहे होंगे गड़रिए🤣😂, अबे उनका पैसा वो अपने हिसाब से सेलिब्रेट करेंगे तुमको क्या दिक्कत है

कर दी ना मूर्खों वाली बात, दौर कोई भी हो परम्परायें कभी खत्म नही होती, वोट पड़ने लगे तो क्या पूजा करना बंद कर दें, परम्पराये भूल जाएं बैसे तुम्हारी कियूँ जल रहीं है ? बैसे करना तो तुम भी चाहते हो , पर अंगूर खट्टे हैं! बस ऐसे ही जलकर बजन कम करते रहो ☺️

Tumhari maa ko nachwa rahe jo gand me khujli ho rahi

तुम्हें तो शर्म आनी चाहिए! सवाल भी उनपर उठा रहे हो जिन्होंने गरीबों एवं जरूरतमंदों के कल्याण के लिए भूदान आंदोलन के तहत गिरिवर प्रसाद सिंह जी(रंका के राजा)ने 1,10,000 एकड़ निजी जमीन समाज कल्याण एवं गरीबों के उत्थान के लिए(दान)में दे दिया था! तू भी कर दे 3-4 एकड़ जमीन दान !🤦🏻

ये क्या है इसके लिए भी दो शब्द बोल सकते हो हिम्मत है

लेकिन मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही उनके रीति रिवाज से तुझे क्या लेना देना क्या तूने तेरी जब से पैसा दिया है इनको खर्च करने के लिए 🙄🙄...गौरव शब्द ही हमारा है और राज भी... सबसे पहले तो तू इनको हटा.... और हाँ जो तुझे चोंचले लग रहे है ना वो हमारा कल्चर है समझा जाहिल, और इसमें खर्चा आता है जो हम उठाते है तेरे अब्बू नहीं.... हमारी जिंदगी हम जैसे मन रहे तू है कौन बे जाहिल चिमटे 🙄🙄🙄
