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दृश्य नागौर के बुनरावता क्षेत्र में अवैध खनन रोकने पहुंची टीम की स्थिति है।

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चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से ना जाए! हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में धड़ल्ले से बालू की चोरी हो रही है। इस काले धन का इस्तेमाल चुनाव में किया जा सकता है। साहेबगंज जिप अध्यक्ष मोनिका किस्कू ने बरहेट अंचलाधिकारी को बालू का अवैध खनन रोकने के लिए लगभग 10 बार कॉल किया। अंचलाधिकारी द्वारा 5 मिनट में आने का आश्वासन देने के बावजूद वो डेढ़ घंटे तक अवैध खनन रुकवाने नहीं पहुंचे। जिला परिषद अध्यक्ष मोनिका किस्कू द्वारा डीसी एवं अंचलाधिकारी के संज्ञान में लाने के बावजूद अधिकारियों ने अवैध खनन रोकने की कोई रुचि नहीं ली। Election Commission of India से हमारी मांग है कि, टीम गठन कर बरहेट में हो रहे अवैध खनन की जांच कराएं एवं डीसी, सीओ पर कड़ी कारवाई करें। जेल जाने के बावजूद हेमंत अब भी अपने क्षेत्र में अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं। हेमंत की अनुपस्थिति में फिलहाल रिमोट कंट्रोल से नेतृत्व संभाल रहीं कल्पना सोरेन को चाहिए की हेमंत जी की गलतियों एवं अपराध से सबक लेते हुए कम से कम उनके विधानसभा क्षेत्र में जारी अपराध एवं माफियागिरी को अब तो नियंत्रित करायें…. ANI_HindiNews Press Trust of India ANI

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मानसून अवधि में नदी क्षेत्र में बजरी खनन गतिविधियाँ सामान्यतः बंद रहती हैं तथा पर्यावरणीय शर्तों व एनजीटी के निर्देशों के अनुसार प्रतिबंधित भी होती हैं इसके बावजूद नागौर जिले के रियां उपखंड क्षेत्र से लगातार नदी क्षेत्र में बजरी खनन किया जा रहा है। साथ ही, लीज की आड़ में लीज क्षेत्र से बाहर भी बजरी माफियाओं द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री Bhajanlal Sharma से पूछना चाहता हूँ कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने इस क्षेत्र में बजरी माफियाओं के विरुद्ध बड़ा आंदोलन किया था। सीएमओ के निर्देशों के बाद कलक्टर व SP सहित आला अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ था। आपकी सरकार ने उस समझौते की पालना सुनिश्चित नहीं कि मगर आंदोलन करने वाले जन-प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों को झूठे मामले में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया | क्या यही भाजपा सरकार का सुशासन है ? आज प्रधानमंत्री जी ने खेजड़ी की महता को बताते हुए भाषण दिया, दूसरी तरफ इन माफियाओं ने खेजड़ी सहित कई प्रकार के हजारों वृक्षों को उजाड़ दिया ,एक तरफ न्यायालय समय-समय पर अवैध बजरी खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी निगरानी और कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नागौर जिले में थांवला एवं पादूकलां थाना क्षेत्रों, डेगाना वृत्त तथा संबंधित पुलिस एवं खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही है ,वृता अधिकारी डेगाना,SHO थांवला व SHO पादू कला ,उपखंड अधिकारी मेड़ता व उपखंड अधिकारी रियां बड़ी ,ME नागौर व AME गोटन द्वारा अवैध बजरी खनन, ओवरलोड वाहनों के संचालन तथा कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। बिना पुलिस कप्तान वाले नागौर जिलें में पुलिस फोर्स का जिम्मा संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लाखों रूपये बजरी माफियाओं से मंथली ले रहे है ,क्या राजस्थान सरकार ऐसे भ्रष्ट अधिकारीयों पर कार्यवाही कर अवैध बजरी खनन बंद करवाएगी ? यदि सरकार ने समय रहते इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए पुनः बड़ा आंदोलन करेगी | आज इस मामले को लेकर मेड़ता व डेगाना विधानसभा क्षेत्र के जन- प्रतिनिधियों ने मुझसे मुलाकात भी की | रात्रि में बजरी का खनन नदी क्षेत्र में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है बावजूद इसके सत्ता के संरक्षण में खनन किया जा रहा है,पुलिस चौकियां मूक दर्शक बनी हुई है | जून माह में रात्रि में हो रहे बजरी के अवैध खनन का सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सरकार के संज्ञान हेतु साझा कर रहा हूं | PMO India CMO Rajasthan Government of Rajasthan Rajasthan Police Ajmer Range Police

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सच तो यह है..कि ओडिशा सरकार के पास कोई सबूत ही नहीं है, कोई दस्तावेज ही नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वेदांता को ज़मीन देने के लिए ग्रामसभा की बैठक कभी बुलाई भी गई थी....ना ही अभी तक ‘स्टेज-2’ की वन मंजूरी मिली है और ना ही ‘पर्यावरण मंजूरी’ मिली है इसके बावजूद खनन के के लिए रोड का काम शुरू है मानो मोदी जी आदिवासियों की ज़मीन बेचने के लिए तैयार बैठे हों. रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में स्थित सिजीमली पर्वत का यह क्षेत्र, जहाँ वेदांता कंपनी को बॉक्साइट खनन का ठेका दिया गया है, संविधान की 5वीं अनुसूची से शासित होता है. यह पूरा क्षेत्र संसद से पारित PESA कानून के दायरे में है. जिसके अनुसार बिना ग्रामसभा की पूर्व अनुमति के किसी भी हालत में खनन का ठेका किसी भी कंपनी को नहीं दिया जा सकता है. स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि 2023 में पेश किए गए ग्रामसभाओं के दस्तावेज फ़र्ज़ी थे और प्रशासन द्वारा ग़ैर-कानूनी तरीके से तैयार किए गए थे. बहुत से लोगों के हस्ताक्षर फ़र्ज़ी थे. पड़ताल से पता चला कि ग्रामसभा की बैठक कभी हुई ही नहीं. इसलिए सितंबर 2024 में ग्रामीणों ने अपनी स्वतंत्र ग्राम सभाएं आयोजित कीं और वेदांता के पक्ष में दिए गए खनन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया. और अब सरकार खुलेआम हिंसा पर उतारू है!

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