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धम्मचक्र प्रवर्तन दिन महोत्सव भव्य धम्म मेळावा, अकोला.

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अशोक विजयदशमी की शुभकामनाएँ अशोक विजयदशमी केवल विजय का पर्व नहीं, बल्कि अन्याय और हिंसा पर करुणा और धम्म की जीत का प्रतीक है। सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध की विभीषिका देखकर हिंसा का त्याग किया और धम्म का मार्ग अपनाया। उनकी यह ऐतिहासिक विजय मानवता की सबसे बड़ी जीत थी। सदियों बाद, इसी दिन 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने नागपुर में लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर धम्मचक्र प्रवर्तन किया। इसने शोषण और असमानता पर आधारित व्यवस्था को गहरी चुनौती दी और समाज को समता, न्याय और बंधुत्व के रास्ते पर आगे बढ़ाया। अशोक विजयदशमी हमें याद दिलाती है कि असली विजय तलवार से नहीं, बल्कि विचार और करुणा से होती है। यही विजय धम्म की विजय है। जय भीम। नमो बुद्धाय।

Sumit Chauhan

38,320 views • 1 year ago