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धर्म कि दुकान चलाने वाले पाखंडी को सुनिए
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@omprakashmegwa1 इन झूठे मक्कार अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए,इनकी दुकान बंद होनी चाहिए,

१९३५ ईसवी से पहले भारत में कोई संविधान नही था। सभी छूत भई राजा लोग अपनी२ दुकान चलाते थे।इस लौंडे को इतनी सी जानकारी नहीं है लेकिन इसकी बात सुनने के लिए मूर्ख लोगों को पेमेंट पर लाकर देश में झूठा प्रचार किया जा रहा है।

कुछ पड़ लिख लिया होता तो, झूठ नहीं परोसता, संविधान 1950 को लागू किया गया था

लोग कहते हैं कि तू हूतिया नहीं है, लेकिन मैं कहता हूं तू ही हूतिया है।

महाराज जी हमें तो पता नहीं है किसने लिखा लेकिन हमें पता यह है कि आपके पिताजी ने लिखा है।

@omprakashmegwa1 यह नचनिया है। जिस संविधान की यह दुहाई दे रहा है उसी संविधान में अछूतों, दलितों, शूद्रों और महिलाओं की क्या स्थिति थी ? उस संविधान के रहते ही भारत मुगलों और अंग्रेजों का गुलाम रहा।

जब dr Bhim Rao Ambedkar से पहले संविधान था तो फिर उस संविधान ने मुगलों को क्यों नहीं भगाया अंग्रेजों को क्यों नहीं भगाया

बाबा बिडू चौथी क्लास एडमिशन लो।संविधान अंबेडकर साहेब ने ही लिखा है। आपके संविधान और बाबा साहेब के संविधान में जमीन आसमान का फरक है। जब आपका संविधान था औरतें मरे हुए मर्द के साथ जला दी जाती थी। लड़की पैदा होने से जिंदा गाड़ दी जाती थी। जवान औरत का सतन ढकना माना था। दलित अछूत था।
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