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धर्म ध्वजा का भगवा रंग कहता है "हम शांत हैं शून्य नहीं " !! जय सियाराम 🙏🚩🏹

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रामलला मंदिर के शिखर पर लगाई जाने वाली धर्म ध्वजा उस धर्म का प्रतीक है जिसने भारत को धारण कर रखा है, जिसने संपूर्ण संसार को धारण कर रखा है। संस्कृत में एक-एक शब्द का बहुत ही गहरा अर्थ है। इसलिए समझना चाहिए कि धर्म की परिभाषा ‘ध’ धातु से है, यानी धारण करना। धैर्य शब्द, धरती शब्द और धर्म शब्द भी इसी से बने हैं। जिसे कहते हैं धारयति इति धर्मः यानी वह तत्व जिसने संपूर्ण संसार, ब्रह्मांड को धारण किया हुआ है, वही धर्म है। और उसी की ध्वजा आपको उन कर्तव्यों का ध्यान दिलाती है जो इस संसार को चलाए रखने के लिए आवश्यक हैं। ध्वजा में क्या है? ॐ है- यानी एटरनल वॉइस; सूर्य है- ऊर्जा का प्रतीक; और कोविदार का वृक्ष है- जो प्रकृति का प्रतीक है। रंग क्या है? भगवा, जो अग्नि का प्रतीक है। अगर आइंस्टीन ने एनर्जी मास कन्वर्जन की इक्वेशन दी है, तो केवल हमारा ही एक धार्मिक संस्कार ऐसा है जिसमें मास कन्वर्ट्स इन टू एनर्जी, और हमारा ही अंतिम संस्कार एक ऐसा है जहां मास कन्वर्ट्स इन टू एनर्जी। तो यह भगवा रंग उसी एनर्जी मास कन्वर्जन की उस एनर्जी का प्रतीक है। इसी रंग को देखकर पूरा भारत एकाकार होता है। आज ध्वजा को देखकर जो भाव उत्पन्न होता है, वह इस प्रकार है - जन-जन के मन में राम रमे, और प्राण-प्राण में सीता है। हर हृदय की धड़कन रामायण, पग-पग पर बनी पुनीता है। यदि राम नहीं हैं श्वासों में, तो प्राणों का घट रहता है। नर-नाहर श्री पुरुषोत्तम का, हम मंदिर भव्य बनाएंगे। सौगंध राम की खाते हैं हम, भारत को भव्य बनाएंगे।

Dr. Sudhanshu Trivedi

28,325 views • 9 months ago