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#धर्म_एक_पंथ_अनेक जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, स्कूल एडमिशन सहित सभी सरकारी अभिलेखों में 'धर्म' के स्थान पर 'पंथ' लिखने की मांग वाली जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।

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दिल्ली पुलिस Special Cell, Delhi Police की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के बांग्लादेशी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया । दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु में कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर लश्कर-ए-तैय्यबा गिरोह के बांग्लादेश मूल के 7 आतंकियों सहित कुल 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया। मेट्रो स्टेशन पर पुलिस द्वारा लगाए पोस्टरों के आधार पर CISF की मदद से मेट्रो यूनिट की टीम ने 2 आतंकियों की पहचान की। आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए भारतीय आईडी प्राप्त की और सभी भारत में अवैध रूप से रह रहे थे और आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। बरामदगी: - Pro-Pak और आतंकी पोस्टर - 10 मोबाइल फोन - 25 क्रेडिट/डेबिट कार्ड - 5 पीओएस मशीनें - बांग्लादेशी पासपोर्ट और पहचान पत्र #DPUpdates

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156 पैरा में लिखा है कि आधार नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। 198 पैरा में लिखा है कि राशन कार्ड भी नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है। यानी- बाकी दस्तावेज भी नागरिकता का प्रमाण नहीं होंगे, जिसकी लिस्ट चुनाव आयोग ने भी दी थी। जैसे: जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के जन्म का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, 10th मार्कशीट ऐसे में मैं मानता हूं- अगर आधार और राशन कार्ड नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं हो सकता तो ये दस्तावेज भी नहीं होंगे। मगर चुनाव आयोग ने SIR की पूरी प्रक्रिया इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर की है। यानी- निष्कासन पहले, निर्णय बाद में... पश्चिम बंगाल में आंतरिक आदेशों द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने एक सिस्टम बनाया है कि जो लोग निष्कासित हुए हैं, उन्हें एक अपील का मौका मिलना चाहिए। रोचक बात ये है कि 6 हजार अपीलों में 4 हजार अपील allow हो गई हैं। कहते हैं कि 80% अपील allow हो रही हैं कि इन्हें नहीं हटाया जा सकता था, मगर चुनाव तो ख़त्म हो गया। तो क्या ये चुनावों पर प्रश्न चिन्ह नहीं है। इस बात पर भी सुप्रीम कोर्ट को टिप्पणी करनी चाहिए थी। : AICC-Law, Human Rights and RTI Department के चेयरमैन Abhishek Singhvi जी 📍 दिल्ली

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चुनाव आयोग बिहार में दलित, पिछड़ों, अतिपिछड़ों का वोटिंग अधिकार खत्म करने के खेल में जुट गई है! भाजपा और चुनाव आयोग के गंदे खेल इस वीडियो में समझिए तीन मुख्य दस्तावेज मांगे जा रहे है जन्म प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र दसवीं प्रमाण पत्र भारत सरकार के NFHS-3 के अनुसार 2001-2005 में जन्में बच्चों में केवल 2.8% के पास जन्म प्रमाण पत्र था! अब ये मां बाप का जन्म प्रमाण पत्र कहां से लाएं? मैट्रिक प्रमाण पत्र की बात करें तो NFHS-2 के अनुसार आज 40-60 वर्ष के पुरुषों में से केवल 10 से 13% ने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की है। जाति प्रमाण पत्र की बात करें तो India Human Development Survey (2011-12) के अनुसार 20% SC और 25% OBC के पास जाति प्रमाण पत्र है। अनाथ लोगों का तो कोई सुध ही नहीं लिया जा रहा है, ये अपने माता पिता का सर्टिफिकेट कहा से लाएंगे? बिहार में 4 करोड़ से ज्यादा वोटर पलायन करके दूसरे राज्यों में है। उनका क्या होगा? 73% क्षेत्र बाढ़ग्रस्त है, ऐसे में उनके घर बह जाते है वो कागज कितना सहेज पाएंगे? 88% बिहारी के पास आधार कार्ड है मगर उसको दस्तावेज नहीं मान रहे तो फिर देश में आधार कार्ड का धंधा क्यों चल रहा है?

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#WATCH रामपुर, उत्तर प्रदेश: 10वीं कक्षा की जुड़वां छात्राओं का रेटिना डेटा मैच होने के बाद आधार से जुड़ी समस्या पर ज़िला मजिस्ट्रेट अजय द्विवेदी ने कहा, "दो छात्रा हैं खिजरा जुबैर और तुबा जुबैर, ये रामपुर शहर की रहने वाली हैं। यह दोनों बच्चियां आइडेंटिकल ट्विंस हैं। पूर्व में 4 साल की उम्र में इनका आधार कार्ड बना था जो कि माता-पिता के पहचान पत्र के आधार पर बना था। दसवीं कक्षा में आने पर जब नया आधार कार्ड बनना था तो एक बच्ची के फिंगरप्रिंट और रेटिना लेने के बाद जब दूसरी बच्ची का आधार कार्ड बनाया गया तो वह एकदम मैच कर गया और डुप्लीकेसी में चला गया। इस वजह से उन दोनों का अलग-अलग आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था। यह प्रकरण हमारे पास लगभग 4 महीने पहले आया था। जिला प्रशासन ने UIDAI के वरिष्ठ अधिकारियों से दिल्ली में बात कर कोऑर्डिनेट किया जिसके माध्यम से दोनों बच्चियों का अलग-अलग आधार कार्ड बन गया है। अब इनकी पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं है।"(23.09)

ANI_HindiNews

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