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- ना टेलीप्रॉम्प्टर - ना सीना ठोकने वाली बयानबाज़ी - ना लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ी - ना विपक्ष पर हमले ऐसे प्रधानमंत्री गांधी परिवार ने देश को दिए.. 🔥 “हालात अगर माँगें तो मैं इस देश के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर दूँगा।” क्या मोदी की उनसे कोई...

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केजरीवाल पर court का फैसला बिलकुल साफ है. CBI का case कमज़ोर निकला. ना कोई गवाह मिला, ना कोई सबूत मिला. Court के मुताबिक ना किसी ने रिश्वत मांगी, ना किसी ने रिश्वत ली. ना CBI का investigate करने का procedure सही था, ना case में कोई दम था. अदालत का फैसला कहता है कि ना कोई घोटाला हुआ, ना केजरीवाल ने बेईमानी की, ना उनके मंत्रियों ने. Court ने 600 pages के फैसले में शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी. ज़ाहिर है, केजरीवाल के लिए इससे बेहतर फैसला और क्या हो सकता था. अब CBI को जवाब देना होगा. अगर CBI का case इतना कमज़ोर था तो केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह को महीनों तक जेल में क्यों रखा गया? बीजेपी के लिए ये बड़ा embarrassment है. जवाब देना मुश्किल हो गया है और केजरीवाल को अपनी सियासत revive करने का ज़बरदस्त मौका मिला है, और वो ऐसे अवसर का फायदा उठाने में माहिर हैं. #AajKiBaat #MyTake #LiquorScam #ArvindKejariwal

Rajat Sharma

129,657 Aufrufe • vor 7 Monaten

उज्ज्वल राणा जो मात्र 5200 रु. कॉलेज की बकाया फ़ीस नहीं दे पाने की बजह से ख़ुद को आग लगा कर मर जाता है ये न्यूज़ ना किसी मीडिया में आई ना कहीं किसी ने इसके बारे में बात की ना कोई शोरगुल हुआ ना कोई नेता उसके दुःखी परिवार से मिलने के लिए दौड़ा ना ही किसी संसद में इसकी कोई भी चर्चा हुईं.. पता है क्यों..? क्योंकि वो बेचारा बस """जरनल कैटेगरी"""से था..!! वहीं रोहित वेमुला भी इसी देश का छात्र था जिस देश का छात्र उज्जवल राणा है पर उसकी मौत पर देश में सुनामी आ गई थी पूर्ण बहुमत वाली सरकारें हिल गई थी HRD मिनिस्टर के सफाई देते देते होश उड़ गये थे देश के प्रधानमंत्री का भी रो रो कर बुरा हाल था संसद से लेकर सड़क तक का तांडव मचा हुआ था उस पूरे संसद सत्र में पिछड़े दलित शोषित बंचित अखबारों में भी दलित शोषित बंचित न्यूज़ चैनल्स पर दलित शोषित बंचित के अलावा कुछ ना सुनाई दे रहा था ना दिखाई दे रहा था जबकि सच ये है कि ना तो रोहित वेमुला कोई दलित था ना कोई शोषित था ना कोई बंचित था ना उसकी आत्महत्या के पीछे कोई सवर्ण समाज का छात्र था फिर भी दलितों के लिए सरकारों की एक से एक फ्री कोचिंग तरह तरह की स्कीम तरह तरह के यूजीसी जैसे अंधे और बिना सर पैर वाले कानून बनाना शुरू कर दिए जिसमें पूर्वाग्रह में ही सिर्फ़ सवर्ण समाज को सीधा क्रिमिनल मान लिया जाता है किस नेता को नहीं पता कि सवर्ण समाज में भी ग़रीब लोग होते हैं सरकारों से लेकर सिस्टम तक सबको पता है पर साथ में उनको ये भी पता है कि इनका कोई बड़ा वोट बैंक नहीं है बस इसलिए मरने दिया जाता है उज्जवल राणा की तरह हजारों सवर्ण समाज के गरीब छात्रों को जिनके लिए ना कोई संसद होती है ना कोई सरकार होती है ना कोई सिस्टम ना कोई समाज ना कोई देश.. देश के हर क्षेत्र में ईमानदारी से सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूट करने वाले इस समाज को, मात्र 28% होने के बाद 75% टैक्स देने वाले इस समाज को बदले में क्या मिलता है यूजीसी और SC/ST एक्ट के अलावा..? मामला मुज्जफरनगर के डी.ए.बी (पीजी) कॉलेज का है जहां 18 वर्षीय उज्जवल राणा लगभग अपनी सारी फीस जमा कर चुका था जिसमें लगभग पांच सात हजार रुपये बाकी थे जिसको भरने के लिए उसने थोड़ा बक्त मांगा बजाय बक्त देने के कॉलेज के प्रधानाचार्य समेत कई स्टॉफ के लोगों ने उसकी बीच कॉलेज में मारपीट की कई दिन तक तरह तरह से उसे फ़ीस के लिए टॉर्चर किया गया भरे कॉलेज में पिटने वाले उज्वल राणा को ग़रीबी और अपमान की आग में हर रोज जलने से आसान लगा पेट्रोल की आग में जलना..

ocean jain

20,216 Aufrufe • vor 7 Monaten